काठमांडू। भ्रष्टाचार मुक्त नेपाल का सपना दिखाकर सत्ता के शीर्ष पर पहुंचे प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार को गठन के पहले महीने में ही गहरा झटका लगा है।
अनुशासनहीनता के कारण श्रम मंत्री दीपक कुमार शाह की विदाई के कुछ ही समय बाद, अब देश के गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। एक महीने के भीतर दो दिग्गज मंत्रियों का बाहर होना यह संकेत देता है कि नई सरकार के भीतर ‘शुद्धिकरण’ और ‘दबाव’ की राजनीति चरम पर है।
शेयर विवाद और मनी लॉन्ड्रिंग: जब ‘दीपक’ की आंच में झुलसे गृह मंत्री
सुदन गुरुंग का इस्तीफा उस समय आया जब उन पर जेल जा चुके विवादित कारोबारी दीपक भट्ट की कंपनियों में शेयर रखने और वित्तीय हेरफेर के गंभीर आरोप लगे। विपक्षी दल ‘नेपाली कांग्रेस’ और नागरिक समाज के कड़े विरोध ने सरकार को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया था।
- विपक्ष का तर्क: गृह मंत्री के पद पर रहते हुए मनी लॉन्ड्रिंग की निष्पक्ष जांच असंभव है।
- गुरुंग का बचाव: अपने इस्तीफे में गुरुंग ने इसे ‘स्वार्थ के टकराव’ (Conflict of Interest) से बचने की कोशिश बताया है। उन्होंने कहा कि आज की Gen-Z पीढ़ी जवाबदेही मांगती है, इसलिए वे पद पर बने रहकर जांच को प्रभावित नहीं करना चाहते।
बालेन शाह की ‘अग्निपरीक्षा’: क्या ढह जाएगा जनता का भरोसा?
- नेपाल की जनता ने बालेन शाह को पारंपरिक राजनीतिक दलों के विकल्प के रूप में चुना था। लेकिन सरकार के शुरुआती 30 दिनों का रिपोर्ट कार्ड चिंताजनक है:
- अनुशासन का संकट: श्रम मंत्री का हटाया जाना कैबिनेट के भीतर के अंतर्विरोधों को उजागर करता है।
- भ्रष्टाचार का साया: गृह मंत्री पर लगे आरोप सीधे तौर पर सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर हमला हैं।
कैबिनेट के पुनर्गठन की तैयारी
अब पूरी दुनिया की नजरें बालेन शाह पर हैं। क्या वे अपनी कैबिनेट में स्वच्छ छवि वाले चेहरों को जगह देकर इस डैमेज को कंट्रोल कर पाएंगे? विशेषज्ञों का मानना है कि बालेन शाह के पास अब गलती की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्हें यह साबित करना होगा कि उनकी सरकार केवल नारों तक सीमित नहीं है, बल्कि कड़े फैसले लेने का साहस भी रखती है।