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मुस्तांग में China Border के पास ‘Special Zone’ प्लान! नेपाल के यूरेनियम प्रोजेक्ट पर बढ़ा विवाद क्या बालेन शाह बदलने जा रहे हैं गेम?

नई दिल्ली/काठमांडू, 19 अप्रैल 2026:  नेपाल से जुड़ी एक खबर ने अचानक पूरे साउथ एशिया की राजनीति और स्ट्रैटेजी में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऊपरी मुस्तांग में मौजूद यूरेनियम भंडार को लेकर नेपाल सरकार एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है—और इसमें अमेरिका व ऑस्ट्रेलिया की कंपनियों की एंट्री की चर्चा है।

सबसे दिलचस्प (और संवेदनशील) बात ये है कि जिस इलाके की बात हो रही है, वो चीन की सीमा से सिर्फ 10 किलोमीटर दूर है। ऐसे में ये मामला सिर्फ खनन या निवेश का नहीं, बल्कि सीधा भू-राजनीति (geopolitics) से जुड़ता दिख रहा है।

‘मुस्तांग स्पेशल जोन’ क्या है?

रिपोर्ट्स के अनुसार, लो मान्थांग इलाके में करीब 30 वर्ग किमी का “मुस्तांग स्पेशल जोन” बनाने का प्लान है। इसे हाई-सिक्योरिटी रिसर्च एरिया बनाया जा सकता है, जहां सिर्फ नेपाल आर्मी और विदेशी टेक्निकल टीमें काम करेंगी।

यूरेनियम की मौजूदगी की पुष्टि 2014 में Department of Mines and Geology Nepal ने की थी। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, भंडार काफी बड़ा हो सकता है, लेकिन इसकी असली क्षमता अभी तक पूरी तरह सामने नहीं आई है।

क्यों बढ़ा विवाद?

मामला तब और गरमा गया जब कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि मार्च 2026 में इस प्रोजेक्ट को लेकर “सैद्धांतिक सहमति” बन चुकी है। हालांकि, नेपाल के कई बड़े नेताओं ने ऐसे किसी समझौते से इनकार भी किया है।

इधर, नेपाल की राजनीति में एक्टिव Balen Shah को लेकर भी अटकलें तेज हैं। कहा जा रहा है कि आर्थिक जरूरतें, विदेशी निवेश और ऊर्जा प्रोजेक्ट्स के चलते नेपाल को बड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं।

चीन-भारत क्यों सतर्क?

चीन के इतने करीब किसी विदेशी प्रोजेक्ट की मौजूदगी बीजिंग को असहज कर सकती है। वहीं भारत भी नेपाल में बढ़ते इंटरनेशनल इन्फ्लुएंस पर नजर बनाए हुए है।

यानी यह सिर्फ एक “खनन प्रोजेक्ट” नहीं, बल्कि तीन बड़े खिलाड़ियों—अमेरिका, चीन और भारत—के बीच बैलेंस का खेल भी बन सकता है।

आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल नेपाल सरकार की तरफ से कोई ऑफिशियल कन्फर्मेशन नहीं आया है। लेकिन इतना तय है कि यूरेनियम जैसे क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर दुनिया में होड़ तेज हो चुकी है।

अगर ये प्लान आगे बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं रहेगा—पूरे क्षेत्र की राजनीति, सुरक्षा और इकोनॉमी पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।

फिलहाल सबकी नजर एक ही सवाल पर टिकी है—क्या नेपाल सच में ‘मुस्तांग’ में यह बड़ा दांव खेलने जा रहा है, या ये सिर्फ अटकलें हैं? आने वाले दिनों में तस्वीर और साफ होगी।

news desk

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