काठमांडू: नेपाल की राजनीति एक बार फिर इतिहास के मोड़ पर खड़ी है। सितंबर 2025 में हुए युवाओं के नेतृत्व वाले ‘जेन-जी आंदोलन’ ने जिस तरह देश की सियासत को हिलाकर रख दिया, उसका असर अब सीधे चुनावी मैदान में दिखने जा रहा है। भ्रष्टाचार, सोशल मीडिया पर पाबंदियों और सरकार की जवाबदेही को लेकर भड़के इस आंदोलन ने तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया। हिंसक प्रदर्शनों में 77 लोगों की जान गई, संसद और सरकारी इमारतों को नुकसान पहुंचा और हालात इतने बिगड़े कि अंततः अंतरिम सरकार का गठन करना पड़ा।
अब राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा के लिए आम चुनाव का ऐलान कर दिया है। नेपाल में 5 मार्च 2026 को वोटिंग होगी, जबकि नतीजे 7 मार्च को आने की उम्मीद है। यह चुनाव इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि पहली बार बड़ी संख्या में युवा वोटर और नए चेहरे पुरानी राजनीतिक पार्टियों को सीधी चुनौती दे रहे हैं।
चुनावी मुकाबले में चार बड़े चेहरे प्रधानमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे हैं। सबसे ज्यादा चर्चा काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह की है, जिन्होंने मेयर पद छोड़कर राष्ट्रिय स्वतंत्र पार्टी (RSP) जॉइन की और झापा-5 सीट से केपी शर्मा ओली के खिलाफ ताल ठोक दी है। उनके चुनावी दौरों में उमड़ रही युवा भीड़ जेन-जी लहर की ताकत दिखा रही है। वहीं नेपाली कांग्रेस से गगन थापा, UML से केपी शर्मा ओली और माओवादी केंद्र से प्रचंड भी मैदान में हैं।
275 सीटों वाली संसद में बहुमत का आंकड़ा 138 है, लेकिन मौजूदा हालात में किसी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलना मुश्किल माना जा रहा है। 10 लाख से ज्यादा नए वोटरों की एंट्री और युवाओं की बढ़ती भागीदारी ने इस चुनाव को और दिलचस्प बना दिया है। अब देखना है कि जेन-जी का गुस्सा और उम्मीदें बैलेट बॉक्स में क्या रंग दिखाती हैं।