उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गहजी गांव में 22 सितंबर 2026 की देर रात जो हुआ, उसने पूरे इलाके को सन्न कर दिया। अंधविश्वास, प्रेतबाधा और पारिवारिक कलह की आग में झुलसे एक सिरफिरे शख्स ने अपने ही घर को श्मशान बना दिया। घर में चल रहे पांच दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान के दौरान शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ा कि देखते ही देखते खून की होली खेली गई, जिसमें मासूम बच्चों और पुरोहितों समेत कुल पाँच लोगों की जान चली गई।
घटना की शुरुआत कुछ दिन पहले हुई थी। आरोपी अरविंद सिंह की मां शमला देवी और उसकी पत्नी बबीता सिंह घर में सुख-शांति लाने के लिए एक विशेष पांच दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान (पूजा-पाठ) करवा रही थीं।
परिवार का मानना था कि घर पर ‘मृतक बड़े भाई की आत्मा’ और प्रेतबाधा का साया है, जिसे दूर करना जरूरी है। लेकिन आरोपी अरविंद इस अंधविश्वास और पूजा-पाठ का कड़ा विरोध कर रहा था। इसी बात को लेकर पिछले कई दिनों से घर में लगातार तनाव और कलह चल रही थी।
घटना वाले दिन (मंगलवार) उस पूजा का चौथा दिन था। शाम करीब 6 बजे अरविंद सिंह शराब के नशे में धुत होकर घर वापस लौटा। घर के भीतर पूजा होते देख उसका गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
वह आपा खो बैठा और पूजा करा रहे पुरोहितों को ‘ढोंगी’ करार देते हुए उनसे उनका आधार कार्ड मांगने लगा। जब पुरोहितों और घर के सदस्यों ने इसका विरोध किया, तो बात हाथापाई और गाली-गलौज तक पहुंच गई। गुस्से में पागल हो चुके अरविंद ने अपनी रिवॉल्वर निकाली और घर के अंदर ही अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं।
इस खूनी तांडव में अरविंद की पत्नी बबीता सिंह (32) और पूजा करा रहे दो पुरोहित—महेंद्र पाठक (60) तथा अहमद मिश्रा (50) की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
तिहरे हत्याकांड को अंजाम देने के बाद भी अरविंद का खून नहीं खौला था। उसने अपनी 6 साल और 8 महीने की दो बेटियों के साथ-साथ अपने 4 साल के मासूम बेटे (शौर्य) को बंदूक की नोक पर एक कमरे में बंद कर लिया और उन्हें बंधक बना लिया।
इतने में सनसनीखेज वारदात की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। डीआईजी सुनील कुमार सिंह, एसएसपी डॉ. अनिल कुमार भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लखनऊ से ATS के कमांडो को भी तुरंत मौके पर बुलाया गया और पूरे घर को चारों तरफ से घेर लिया गया।
पुलिस और एटीएस कमांडो ने घंटों तक सिरफिरे अरविंद को समझाने की कोशिश की कि वह आत्मसमर्पण कर दे और बच्चों को सुरक्षित बाहर आने दे। लेकिन नशे और सनक में चूर अरविंद किसी की बात सुनने को तैयार नहीं था।
बात तब और ज्यादा बिगड़ गई जब उसने कमरे के भीतर ही अपने 4 साल के मासूम बेटे शौर्य को भी गोली मार दी। इसके बाद उसने एटीएस कमांडो पर भी ताबड़तोड़ 5 राउंड फायरिंग कर दी। अपनी और बंधक बच्चियों की जान बचाने के लिए कमांडो टीम ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें मुख्य आरोपी अरविंद सिंह मौके पर ही ढेर हो गया।
इस नरसंहार का खौफनाक परिणाम (हताहतों की स्थिति):
कुल 5 लोगों की मौत:
1. बबीता सिंह (आरोपी की पत्नी)
2. महेंद्र पाठक (पुरोहित)
3. अखिलेश मिश्रा (पुरोहित)
4. शौर्य (4 वर्षीय मासूम बेटा)
5. अरविंद सिंह (स्वयं मुख्य आरोपी)
सुरक्षित बचाए गए बच्चे: पुलिस और एटीएस ने कड़ी मशक्कत के बाद 8 महीने की सबसे छोटी बच्ची और 6 साल की बड़ी बेटी को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। हालांकि, इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान बड़ी बेटी के हाथ में भी एक गोली लग गई, जिसे तुरंत इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
फिलहाल, वाराणसी जोन के एडीजी और स्थानीय पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर कैंप किए हुए हैं। पुलिस इस सनसनीखेज मामले की हर एंगल से गहन जांच कर रही है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।
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