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अयोध्या में बड़ा एक्शन? CM Yogi के राम मंदिर दौरे से दूर रहेंगे चंपत राय!

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या की सियासत और प्रशासनिक गलियारों से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शुक्रवार को अयोध्या के बेहद अहम दौरे पर रहने वाले हैं, जहां उनके प्रस्तावित कार्यक्रमों में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन-पूजन भी शामिल है।

लेकिन इस वीवीआईपी (VVIP) दौरे से ठीक पहले जिला प्रशासन द्वारा जारी एक गुप्त सुरक्षा निर्देश ने पूरी अयोध्या में खलबली मचा दी है। राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय को मुख्यमंत्री के मंदिर कार्यक्रम से पूरी तरह दूर रखने की चर्चाओं ने तूल पकड़ लिया है।

बिंदु संख्या 29 का ‘सस्पेंस’: चंपत राय के सीधे प्रवेश पर लगी रोक?

दरअसल, जिला प्रशासन की ओर से मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर सुरक्षा एवं प्रोटोकॉल संबंधी एक गाइडलाइन जारी की गई है। इस निर्देश की ‘बिंदू संख्या 29’ में सीधे तौर पर चंपत राय का नाम लेते हुए एक विशेष अनुरोध किया गया है।

प्रशासन का आदेश: गाइडलाइन में चंपत राय से कहा गया है कि मुख्यमंत्री के राम मंदिर दर्शन-पूजन कार्यक्रम की व्यवस्था संभालने के लिए वह स्वयं उपस्थित होने के बजाय किसी अन्य व्यक्ति को अपना ‘प्रतिनिधि’ (Representative) नामित करें। साथ ही, उस प्रतिनिधि की पूरी जानकारी ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सीयूजी (CUG) नंबर पर तुरंत उपलब्ध कराएं।

चढ़ावा विवाद और जांच की आंच: क्या चंपत राय पर गिरी गाज?

राजनीतिक गलियारों और सचिवालय के सूत्रों के अनुसार, प्रशासन का यह कड़ा रुख ऐसे समय में आया है जब हाल ही में राम मंदिर के चढ़ावे की हेराफेरी को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हुआ है और इस मामले की उच्च स्तरीय जांच चल रही है।

प्रशासनिक स्तर पर इसे एक बहुत बड़े राजनीतिक संकेत (Political Signal) के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘जीरो टॉलरेंस’ छवि को देखते हुए, जांच पूरी होने तक विवादित चेहरों को सीएम के फ्रेम से दूर रखने की रणनीति अपनाई गई है। यही वजह है कि चंपत राय के समर्थन में उनके करीबियों द्वारा दी गई तमाम सफाइयों का भी सरकार पर फिलहाल कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है।

आधिकारिक चुप्पी, लेकिन कयासों का बाजार गर्म

हालांकि, इस संवेदनशील मामले पर न तो जिला प्रशासन और न ही राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक बयान (Official Statement) जारी किया गया है कि चंपत राय को खुद आने से क्यों रोका गया। लेकिन सुरक्षा प्रोटोकॉल में लिखित रूप से ‘प्रतिनिधि नामित’ करने के इस निर्देश ने विपक्ष और सोशल मीडिया को एक नया मुद्दा दे दिया है। शुक्रवार को सीएम योगी के अयोध्या पहुंचने पर सभी की निगाहें इस बात पर टिकी होंगी कि चंपत राय की जगह मंदिर में मुख्यमंत्री की अगवानी कौन करता है।

news desk

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