राजधानी दिल्ली में मानसून इस बार अपने सबसे आक्रामक मोड़ पर है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने पिछले कई सालों के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग “IMD” के अनुसार, अगस्त के शुरुआती 7 दिनों में ही दिल्ली में कुल 127 mm बारिश दर्ज हो चुकी है। साल 2011 के बाद अगस्त के पहले हफ्ते में हुई यह सबसे ज्यादा बारिश है, जिसने पिछले 15 सालों का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया है।
झमाझम बारिश के पीछे का ‘वेदर गेम’
मौसम एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस भारी बारिश के पीछे एक साथ कई वेदर सिस्टम एक्टिव हैं, मानसून की मुख्य रेखा इस वक्त दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों के बेहद करीब से गुजर रही है। दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर एक कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है, जो लगातार नमी को दिल्ली की तरफ खींच रहा है। उत्तर-पश्चिम भारत में इसके एक्टिव होने से बारिश की स्पीड और दायरा दोनों काफी बढ़ गए हैं।
ट्रैफिक जाम और जलभराव
एक तरफ जहां इस बारिश ने लोगों को उमसभरी गर्मी से राहत दी है, वहीं दूसरी तरफ शहर के इन्फ्रास्ट्रक्चर की पोल भी खोल दी है। आईटीओ, महरौली-बदरपुर रोड, वज़ीराबाद रोड, छतरपुर और कई अंडरपास पानी में डूब गए। इसकी वजह से शहर में भीषण ट्रैफिक जाम लग गया। ऑफिस जाने वाले प्रोफेशनल्स और स्कूली बच्चों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। जगह-जगह जलभराव के चलते गाड़ियां रेंगती नजर आईं और मुख्य मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
भारी बारिश और ठंडी हवाओं के दौर ने दिल्ली का माहौल पूरी तरह बदल दिया है, लगातार बादलों और बारिश से अधिकतम तापमान सामान्य से 6 से 7 डिग्री गिरकर 27.5 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है। अगस्त के महीने में अब फरवरी-मार्च जैसा सुहाना अहसास हो रहा है।
बारिश ने हवा में मौजूद धूल और प्रदूषण के कणों को पूरी तरह धो दिया है। दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI सुधरकर 63 पर पहुंच गया है), जो कि ‘संतोषजनक’ (Satisfactory) कैटेगरी में आता है।
आगे का वेदर अपडेट
मौसम विभाग के मुताबिक, आने वाले दिनों में भी आसमान में बादल छाए रहेंगे और हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रहेगा। प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस ने एडवाइजरी जारी कर लोगों को घर से निकलने से पहले रूट चेक करने और जलभराव वाले इलाकों से बचने की सलाह दी है।