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नेशनल हेराल्ड मामले में कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस का बयान, कहा-सच की जीत हुई

नेशनल हेराल्ड मामले में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य आरोपियों को बड़ी राहत मिली है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से दाखिल चार्जशीट पर फिलहाल संज्ञान लेने से इनकार कर दिया है। हालांकि, कोर्ट ने मामले की जांच जारी रखने की अनुमति दी है।

नवंबर 2025 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने PMLA की धारा 66(2) के तहत दिल्ली पुलिस को सूचना दी थी। इसी आधार पर दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने 3 अक्टूबर 2025 को सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य के खिलाफ नई एफआईआर दर्ज की। इस एफआईआर में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराएं 420, 406, 403 और 120-B के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश के आरोप लगाए गए हैं।

नेशनल हेराल्ड मामले में कोर्ट के फैसले के बाद कांग्रेस ने इसे सच की जीत बताया है। पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया कि मोदी सरकार की दुर्भावना और गैरकानूनी कार्रवाई पूरी तरह बेनकाब हो गई है। बयान में कहा गया कि यंग इंडियन मामले में कांग्रेस नेतृत्व सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की गई कार्रवाई को अदालत ने पूरी तरह अवैध और दुर्भावनापूर्ण पाया है।

कांग्रेस ने कहा कि कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ईडी का यह मामला अधिकार क्षेत्र से बाहर है और बिना एफआईआर के कोई मामला बनता ही नहीं है। ऐसे में ईडी की पूरी कार्यवाही कानूनी आधारहीन साबित हुई है।

पार्टी ने आरोप लगाया कि पिछले एक दशक से मोदी सरकार ने राजनीतिक बदले की भावना से देश की मुख्य विपक्षी पार्टी और उसके नेताओं को निशाना बनाया। बयान में कहा गया कि न तो मनी लॉन्ड्रिंग का कोई मामला है, न ही अपराध से अर्जित संपत्ति और न ही किसी तरह की संपत्ति का हस्तांतरण हुआ।

कांग्रेस के अनुसार, यह पूरा मामला राजनीतिक प्रतिशोध, दुष्प्रचार और छवि खराब करने की साजिश का हिस्सा था, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया है। पार्टी ने दोहराया कि कांग्रेस और उसका नेतृत्व सच और हर भारतीय के अधिकारों के लिए लड़ता रहेगा और किसी भी दबाव या डर से पीछे हटने वाला नहीं है।

क्या है नेशनल हेराल्ड मामला?

नेशनल हेराल्ड केस भारत के सबसे चर्चित राजनीतिक और कानूनी विवादों में से एक है। इस मामले की शुरुआत साल 2012 में हुई, जब बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने इसकी शिकायत दर्ज कराई। यह मामला एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) से जुड़ा है, जो कभी नेशनल हेराल्ड अखबार का प्रकाशन करती थी। इस अखबार की स्थापना 1938 में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने की थी।

समय के साथ AJL पर भारी कर्ज चढ़ गया, जिसके बाद कांग्रेस पार्टी ने कंपनी को 90.25 करोड़ रुपये का ब्याज-मुक्त कर्ज दिया। आरोप है कि बाद में यह कर्ज महज 50 लाख रुपये में यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड (YIL) को ट्रांसफर कर दिया गया।

ईडी के मुताबिक, इसी प्रक्रिया के जरिए AJL की करोड़ों नहीं बल्कि अरबों रुपये की संपत्तियां-जो दिल्ली, मुंबई जैसे प्रमुख शहरों में स्थित हैं, YIL के नियंत्रण में चली गईं। प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि यह पूरा लेनदेन एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा था, जिसके तहत धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और मनी लॉन्ड्रिंग को अंजाम दिया गया।

इस मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी समेत कई अन्य लोग जांच के दायरे में हैं, जबकि कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है।

news desk

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