मुंबई: दशहरे के बाद मुंबई की हवा ने चिंता बढ़ा दी है। जिस शहर की पहचान समुद्री हवाओं और भागती-दौड़ती जिंदगी से है, वहां प्रदूषण का स्तर बढ़कर 165 एक्यूआई तक पहुंच गया। IQAir के आंकड़ों के मुताबिक, मुंबई दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में चौथे स्थान पर रही। हैरानी की बात यह है कि इस दौरान मुंबई की हवा दिल्ली से भी ज्यादा प्रदूषित दर्ज की गई। हालांकि, भारत के केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े इससे अलग तस्वीर दिखाते हैं।
IQAir के मुताबिक, प्रदूषण के मामले में कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य की राजधानी किंशासा 201 एक्यूआई के साथ पहले स्थान पर रही। पाकिस्तान का लाहौर 190 एक्यूआई के साथ दूसरे और मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर 180 एक्यूआई के साथ तीसरे नंबर पर रहा। 165 एक्यूआई के साथ मुंबई चौथे स्थान पर पहुंच गई, जबकि दिल्ली का एक्यूआई 164 दर्ज किया गया।
इन आंकड़ों के आधार पर मुंबई उस समय भारत का सबसे प्रदूषित शहर भी रही। दशहरे के अगले दिन शहर में धुंध की मोटी परत दिखाई दी, जिसने हवा की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा दी।
IQAir की रिपोर्ट में PM2.5 को मुंबई की हवा में मौजूद प्रमुख प्रदूषकों में शामिल किया गया है। ये बेहद महीन कण होते हैं, जो सांस के जरिए फेफड़ों के भीतर तक पहुंच सकते हैं और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
IQAir ने अपने आकलन के लिए मुंबई के छह निगरानी केंद्रों के आंकड़ों का इस्तेमाल किया। इनमें अमेरिकी वाणिज्य दूतावास का निगरानी केंद्र भी शामिल था। हालांकि, सरकारी निगरानी के आंकड़ों में प्रदूषण का स्तर इससे कम दर्ज किया गया।
मुंबई के प्रदूषण को लेकर IQAir और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों में अंतर सामने आया है। CPCB के अनुसार, बुधवार दोपहर मुंबई का औसत एक्यूआई 113 था। शहर के 23 सक्रिय निगरानी केंद्रों में कोलाबा में सबसे ज्यादा 160 एक्यूआई दर्ज किया गया। बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में यह स्तर 150 और बांद्रा पूर्व के खेरवाड़ी इलाके में 142 रहा।
नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, दोनों एजेंसियों की निगरानी और आंकड़ों के आकलन की पद्धति अलग होने से यह अंतर दिखाई दे सकता है। IQAir प्रति घंटे के औसत आंकड़ों के आधार पर हालिया बदलाव दर्ज करता है और अपेक्षाकृत छोटे क्षेत्र की हवा की गुणवत्ता का आकलन करता है। वहीं, CPCB और बृहन्मुंबई नगर निगम के केंद्र निर्धारित स्थानों पर आसपास की हवा की गुणवत्ता मापते हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भी मुंबई में प्रदूषण बढ़ा है। मंगलवार को शहर का औसत एक्यूआई 102 था, जो बुधवार को बढ़कर 113 हो गया। ऐसे में दोनों एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर के बावजूद हवा की गुणवत्ता में गिरावट का संकेत मिला है।
मुंबई में मानसून की विदाई के बाद वायु प्रदूषण बढ़ना आम है। बारिश कम होने पर धूल के कण वातावरण में ज्यादा समय तक बने रह सकते हैं। इसके अलावा हवा में नमी और मौसम में बदलाव भी प्रदूषण के स्तर को प्रभावित करते हैं।
इस बार अक्टूबर की शुरुआत से ही मुंबई की हवा खराब होने लगी थी। दो अक्टूबर को ही शहर का एक्यूआई 100 के पार पहुंच गया था। मानसून के बाद प्रदूषण बढ़ने की आशंका रहती है, लेकिन इस साल अक्टूबर की शुरुआत में ही हवा की गुणवत्ता गिरने से चिंता बढ़ गई है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अल नीनो से जुड़ी शुष्क मौसम परिस्थितियां भी मुंबई में प्रदूषण की समस्या बढ़ा सकती हैं। मानसून की जल्दी विदाई और बारिश से मिलने वाली राहत में कमी के कारण धूल और दूसरे सूक्ष्म कण वातावरण में लंबे समय तक बने रह सकते हैं।
पर्यावरण वैज्ञानिक तुहिन बनर्जी ने आशंका जताई है कि आने वाले सप्ताह में मुंबई की वायु गुणवत्ता और खराब हो सकती है। उनके मुताबिक, इस साल अल नीनो से जुड़ी परिस्थितियों के बीच मध्य पूर्व से आने वाली हवाएं वातावरण में शुष्कता बढ़ा रही हैं।
बनर्जी ने समुद्र से आने वाले सोडियम क्लोराइड (NaCl) के महीन कणों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, ये कण वातावरण में लंबे समय तक मौजूद रह सकते हैं। उन्होंने फिलहाल प्रदूषण से राहत मिलने के संकेत नहीं होने की बात कही है।
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