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US-ईरान युद्ध से प्रभावित MSMEs को सरकार का सहारा… ₹2.5 लाख करोड़ की सॉवरेन गारंटी योजना, क्या ग्लास उद्योग की भट्टियां फिर जलेंगी?

नई दिल्ली/फिरोजाबाद, 8 अप्रैल 2026: अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने मध्य पूर्व से गैस और रॉ मटेरियल की सप्लाई चेन को बुरी तरह बाधित कर दिया है। इससे भारत के टेक्सटाइल और ग्लास उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। खासकर उत्तर प्रदेश की ‘शिशा नगरी’ फिरोजाबाद में ग्लास फैक्टरियों का उत्पादन 40% तक घट गया है और हजारों मजदूर बेरोजगार हो गए हैं।

इसी संकट को देखते हुए केंद्र सरकार कोविड जैसी राहत योजना लाने की तैयारी कर रही है। सरकार ₹2.5 लाख करोड़ (26.7 बिलियन डॉलर) की सॉवरेन क्रेडिट गारंटी स्कीम लॉन्च करने वाली है, जिसमें बैंकों को दिए जाने वाले ऋणों पर 90% तक गारंटी दी जाएगी। यह योजना चार साल तक चलेगी और मुख्य रूप से छोटे-मध्यम उद्यमों (MSMEs) को टारगेट करेगी।

योजना की मुख्य बातें

  • कवरेज: ₹100 करोड़ तक के ऋणों पर 90% गारंटी (डिफॉल्ट होने पर सरकार नुकसान की भरपाई करेगी)।
  • लागत: सरकार को इस स्कीम पर अनुमानित ₹17,000 से ₹18,000 करोड़ का खर्च आएगा।
  • कार्यान्वयन: नेशनल क्रेडिट गारंटी ट्रस्टी कंपनी (NCGTC) के माध्यम से।
  • उद्देश्य: प्रभावित उद्योगों को लिक्विडिटी उपलब्ध कराना, उत्पादन जारी रखना और नौकरियां बचाना।

कोविड ECLGS से मिली सीख — योजना कितनी सफल हो सकती है?

यह स्कीम कोविड-19 के दौरान चलाई गई Emergency Credit Line Guarantee Scheme (ECLGS) पर आधारित है, जो काफी सफल रही थी।

ECLGS की उपलब्धियां:

  • लगभग 13.5 लाख MSME यूनिट्स को NPA बनने से बचाया।
  • 1.5 करोड़ नौकरियां बचाईं (लगभग 6 करोड़ परिवारों की रोजी-रोटी सुरक्षित रही)।
  • MSME सेक्टर में क्रेडिट ग्रोथ औसतन 30.6% तक बढ़ी।
  • RBI अध्ययन के अनुसार, स्कीम का फायदा लेने वाले MSMEs का नेट प्रॉफिट मार्जिन उन यूनिट्स से बेहतर रहा जो स्कीम का लाभ नहीं ले पाईं।

इस बार सफलता की संभावना: सकारात्मक पक्ष:

  • कोविड जैसी स्कीम पहले भी प्रभावी साबित हुई है। बैंकों को डिफॉल्ट का कम जोखिम रहेगा, इसलिए वे आसानी से ऋण दे सकेंगे।
  • फिरोजाबाद जैसे ग्लास हब और टेक्सटाइल क्लस्टर में तुरंत कैश फ्लो उपलब्ध होगा, जिससे भट्टियां फिर से जल सकेंगी और मजदूरों को काम मिल सकेगा।
  • अगर युद्ध जल्द खत्म हुआ तो यह योजना उद्योग को तेजी से रिकवर करने में मदद करेगी।

चुनौतियां और सीमाएं:

  • समस्या की जड़ गैस की कमी है, न कि सिर्फ फाइनेंस की। गैस सप्लाई बहाल नहीं हुई तो ऋण लेकर भी उत्पादन नहीं बढ़ पाएगा।
  • फिरोजाबाद में 20% गैस कटौती से 40% उत्पादन घटा है — ऋण से भट्टियां नहीं जलेंगी अगर गैस ही नहीं मिलेगी।
  • टेक्सटाइल में निर्यात ऑर्डर रद्द हो रहे हैं और शिपिंग लागत बढ़ रही है — सिर्फ क्रेडिट गारंटी से ऑर्डर वापस नहीं आएंगे।
  • अगर संकट लंबा चला तो NPA बढ़ने का खतरा रहेगा और सरकार पर बोझ बढ़ सकता है।

निष्कर्ष: राहत तो मिलेगी, लेकिन पूरी सफलता संकट की अवधि पर निर्भर

सरकार की यह ₹2.5 लाख करोड़ वाली क्रेडिट गारंटी योजना निश्चित रूप से प्रभावित MSMEs को सांस लेने का मौका देगी और कोविड अनुभव के आधार पर अच्छी सफलता की उम्मीद है। कोविड में इस तरह की स्कीम ने लाखों यूनिट्स और करोड़ों नौकरियां बचाई थीं।

हालांकि, पूर्ण सफलता तभी मिलेगी जब:

  • मध्य पूर्व में जल्द शांति स्थापित हो और गैस/RLNG सप्लाई सामान्य हो।
  • सरकार गैस कोटा में उद्योगों को प्राथमिकता दे।
  • निर्यात बाजार में मांग वापस आए।

फिरोजाबाद और टेक्सटाइल क्लस्टर के लिए यह योजना एक महत्वपूर्ण राहत है, लेकिन यह सिर्फ “ऑक्सीजन” है — “इलाज” गैस सप्लाई और स्थायी शांति पर निर्भर करेगा।

अगर योजना को सही तरीके से लागू किया गया और संकट कम हुआ तो यह MSMEs के लिए गेम चेंजर साबित हो सकती है। फिलहाल, उद्योग जगत और मजदूर इस योजना की घोषणा और तेज क्रियान्वयन का इंतजार कर रहे हैं।

Gopal Singh

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