काठमांडू: नेपाल और तिब्बत की सीमा पर बुधवार को आई प्रलयंकारी बाढ़ ने भारी तबाही मचा दी है। भोटेकोशी नदी में अचानक आए सैलाब के बाद नेपाल के कई इलाकों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इस आपदा में भारत के 140 से ज्यादा लोगों के लापता होने की खबर सामने आई है। इनमें तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के तीर्थयात्री और पर्यटक भी शामिल हैं। बड़ी संख्या में लोग कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले थे और बाढ़ के बाद उनसे संपर्क नहीं हो पाया है। नेपाल में तबाही के बाद उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में भी हाई अलर्ट जारी किया गया है।
नेपाल के तीन जिलों में अचानक आई बाढ़ से कम से कम 162 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, सैकड़ों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में सुरक्षाकर्मियों के साथ कई भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। इस प्राकृतिक आपदा के बाद नेपाल के प्रभावित इलाकों में सड़क और संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है, जिससे राहत और बचाव अभियान में भी मुश्किलें आ रही हैं।
बुधवार देर रात तक तमिलनाडु के कम से कम 37 तीर्थयात्रियों से संपर्क नहीं हो सका था। ये सभी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे थे। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, लापता लोगों की संख्या 37 से बढ़कर 50 तक भी पहुंच सकती है।
तमिलनाडु सरकार के निगरानी प्रकोष्ठ को यात्रा समन्वयक थिन्नारासु की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, राज्य के 106 लोग चार अलग-अलग समूहों में यात्रा पर निकले थे। इनमें से 57 लोग कुंभकोणम की एक यात्रा एजेंसी के जरिए 23 अगस्त को रवाना हुए थे, जबकि 49 लोग चेन्नई से यात्रा पर गए थे।
इन चार समूहों में से दो से संपर्क स्थापित हो चुका है, जबकि बाकी दो समूहों के बारे में अभी जानकारी नहीं मिल पाई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, 17 लोगों के एक समूह ने ऑडियो संदेश भेजकर अपने सुरक्षित होने की जानकारी दी है।
बाढ़ की चपेट में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया ईशा फाउंडेशन का एक समूह भी आया है। ईशा फाउंडेशन के मुताबिक, उसका एक समूह तिब्बत के ग्यिरोंग इलाके में स्थित आव्रजन केंद्र पर मौजूद था, तभी अचानक बाढ़ आ गई।
फाउंडेशन ने बताया कि आव्रजन केंद्र पर मौजूद 77 लोगों के बारे में फिलहाल कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिल सकी है। हालांकि, 21 समूहों में शामिल लोगों में से 495 लोगों के सुरक्षित लौटने की जानकारी दी गई है।
पश्चिम बंगाल से भी लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, कोलकाता से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया 32 सदस्यों वाला समूह भी बाढ़ के बाद संपर्क से बाहर है।
एक अधिकारी के अनुसार, इस समूह में 30 पर्यटक और दो यात्रा प्रबंधक शामिल हैं। यह समूह 21 अगस्त को कोलकाता से रवाना हुआ था और अगले दिन नेपाल पहुंचा था। बाढ़ आने के बाद से समूह के सदस्यों की जानकारी नहीं मिल सकी है।
नेपाल में आई अचानक बाढ़ ने कई इलाकों में सड़क और संचार व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है। इसकी वजह से बचाव दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है। प्रशासन की प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश करना और प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है।
बाढ़ में सैकड़ों लोगों के लापता होने के साथ मृतकों की पहचान की प्रक्रिया भी जारी है। प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया गया है।
नेपाल में मची तबाही के बीच भारत ने राहत अभियान में मदद के लिए 10 टन राहत सामग्री भेजी है। प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों तक मदद पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। वहीं, नेपाल में भारतीय नागरिकों के लापता होने की खबरों के बाद भारत में भी संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
नेपाल से लगे उत्तर प्रदेश और बिहार के कई जिलों में भी बाढ़ की आशंका को देखते हुए सतर्कता बढ़ाई गई है। गंडक और अन्य नदियों में पानी बढ़ने की संभावना को देखते हुए प्रशासन को तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं।
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