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गाजा पर इजरायल की नीति को ‘अस्वीकार्य’ बताया, हमास के निरस्त्रीकरण की योजना पर भी संकट

न्यूयॉर्क। गाजा में युद्धविराम के बाद शांति और पुनर्निर्माण की कोशिशों को बड़ा झटका लगता दिखाई दे रहा है। अमेरिका के नेतृत्व वाले बोर्ड ऑफ पीस के गाजा दूत निकोलाय म्लादेनोव ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक में इजरायल की गाजा नीति पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने गाजा में आश्रय सामग्री की आपूर्ति पर इजरायली प्रतिबंधों को ‘अस्वीकार्य’ बताया और कहा कि लगातार किए जा रहे सैन्य हमले हमास को निरस्त्र करने में मदद नहीं करेंगे।

म्लादेनोव ने सुरक्षा परिषद को गाजा के पुनर्निर्माण और हमास के निरस्त्रीकरण की योजना की मौजूदा स्थिति की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हमास ने निरस्त्रीकरण की योजना स्वीकार कर ली थी, लेकिन अब यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। इसकी मुख्य वजह इजरायल की ओर से प्रस्ताव को स्वीकार न करना बताई जा रही है।

इजरायल से की गाजा में बेहतर आश्रय सामग्री भेजने की अपील

म्लादेनोव ने कहा कि गाजा में करीब 20 लाख लोगों की आबादी का बड़ा हिस्सा अभी भी तंबुओं में रहने को मजबूर है। सर्दियां करीब आने के बीच उन्होंने इजरायल से बेहतर गुणवत्ता वाले आश्रय और राहत सामग्री को गाजा में प्रवेश की अनुमति देने की अपील की।

उन्होंने कहा कि गाजा में मौजूदा आश्रय व्यवस्था लोगों की गरिमा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिहाज से पर्याप्त नहीं है। उनके मुताबिक, गाजा में मानवीय जरूरतें अब सिर्फ भोजन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पानी, स्वच्छता, ऊर्जा और सुरक्षित आश्रय की जरूरत भी बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।

‘इजरायली हमले हमास को निरस्त्र नहीं कर पाएंगे’

गाजा में जारी इजरायली सैन्य हमलों पर भी म्लादेनोव ने सवाल उठाए। इजरायल का कहना है कि उसके हमले हमास के लड़ाकों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हैं, लेकिन म्लादेनोव के मुताबिक लगातार हमले नागरिकों की जान ले रहे हैं और निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया को और मुश्किल बना रहे हैं।

उन्होंने सुरक्षा परिषद में सवाल उठाया कि अगर गाजा में हथियारों के किसी भंडार पर एक और हमला किया जाए तो क्या इससे हमास को दोबारा हथियार जुटाने से रोका जा सकेगा? म्लादेनोव ने कहा कि ऐसा नहीं होगा। उनके अनुसार, इस तरह के हमले निरस्त्रीकरण में देरी करते हैं और गाजा में नागरिक प्रशासन के संक्रमण की प्रक्रिया में बाधा डालते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि हर ऐसा सैन्य बल प्रयोग जो किसी तत्काल खतरे का जवाब नहीं देता और हर वह घटना जिसमें संघर्ष टालने के लिए बनाए गए डी-कॉन्फ्लिक्शन मैकेनिज्म का इस्तेमाल नहीं किया जाता, शांति प्रक्रिया को और कमजोर करता है।

हमास पर भी म्लादेनोव ने उठाए सवाल

हालांकि म्लादेनोव ने इजरायल की आलोचना की, लेकिन हमास को भी उसकी प्रतिबद्धताओं का पालन करने की चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि हमास ने सभी सैन्य गतिविधियां बंद करने का वादा किया था, लेकिन यह प्रतिबद्धता अभी पूरी तरह लागू नहीं हुई है।

म्लादेनोव ने कहा कि हथियार लेकर घूमना, सुरंगों पर काम जारी रखना और राहत सामग्री के काफिलों को रोकना शांति प्रक्रिया को पीछे धकेलता है। इससे उन लोगों को भी युद्ध दोबारा शुरू करने का तर्क मिलता है जो इसके पक्ष में हैं।

14 दिन की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं

हमास की ओर से 30 जुलाई को निरस्त्रीकरण योजना स्वीकार किए जाने के बाद दोनों पक्षों को 14 दिनों के भीतर चरणबद्ध निरस्त्रीकरण और गाजा से इजरायली सैनिकों की वापसी का कार्यक्रम तैयार करना था। हालांकि, यह दो सप्ताह की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हो सकी है।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस योजना को लेकर कहा था कि हमास की ओर से स्वीकार किया गया प्रस्ताव वास्तव में संगठन का निरस्त्रीकरण सुनिश्चित नहीं करता। इसी वजह से इजरायल ने योजना के तहत प्रस्तावित चरणबद्ध वापसी पर आगे बढ़ने से इनकार किया है।

म्लादेनोव ने कहा कि इजरायल से कोई नई निरस्त्रीकरण योजना स्वीकार करने को नहीं कहा जा रहा है, बल्कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 20-सूत्रीय गाजा शांति योजना के तहत की गई प्रतिबद्धताओं की फिर से पुष्टि करने को कहा जा रहा है।

‘गाजा के पास एक और तबाही झेलने की क्षमता नहीं’

म्लादेनोव ने चेतावनी दी कि गाजा अब एक और बड़े युद्ध या मानवीय संकट को झेलने की स्थिति में नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर युद्धविराम टूटता है और गाजा एक बार फिर बड़े पैमाने पर संघर्ष की चपेट में आता है तो शांति प्रक्रिया को वापस पटरी पर लाना बेहद मुश्किल होगा।

उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी स्थिति सभी पक्षों के लिए ‘नो रिटर्न प्वाइंट’ यानी ऐसी स्थिति बन सकती है, जहां से वापस लौटना संभव नहीं होगा।

म्लादेनोव के बयान से साफ है कि गाजा में युद्धविराम के बावजूद इजरायल, हमास और मध्यस्थ देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर सहमति अभी बाकी है। ऐसे में निरस्त्रीकरण, इजरायली सैनिकों की वापसी और गाजा के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाना बड़ी चुनौती बना हुआ है।

news desk

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