नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मंगलवार को इंडिया गठबंधन के सांसदों ने ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ निकाला। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए। इसी दौरान अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए ‘दशरथ’ नाम के एक व्यक्ति का जिक्र किया और आरोप लगाया कि उसके नाम पर 100 से ज्यादा फॉर्म-7 भरे गए थे।
अखिलेश यादव ने दावा किया कि इन फॉर्म के जरिए एक ही विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी और पीडीए समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की गई। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले की शिकायत चुनाव आयोग से की गई थी और आयोग ने इसे माना भी, लेकिन किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई।
मीडिया से बातचीत में अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी के कुछ कार्यकर्ताओं और नेताओं ने दशरथ नाम के एक व्यक्ति को पकड़ा था। उनके मुताबिक, उस व्यक्ति के नाम से कथित तौर पर 100 से ज्यादा फॉर्म-7 भरे गए थे।
अखिलेश यादव ने कहा कि इन फॉर्म के जरिए एक ही विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी और पीडीए समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटाने का प्रयास किया गया। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी ने इसकी शिकायत चुनाव आयोग से की थी और आयोग ने शिकायत को स्वीकार भी किया, लेकिन किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की गई।
सपा प्रमुख ने सुल्तानपुर का उदाहरण देते हुए बीजेपी कार्यकर्ता नंदलाल निषाद का भी जिक्र किया। अखिलेश यादव ने दावा किया कि मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए नंदलाल निषाद से फॉर्म-7 पर हस्ताक्षर करवाए गए, जबकि उन्हें अपने नाम के हस्ताक्षर करने में भी परेशानी होती है।
इसी को लेकर अखिलेश यादव ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि चुनाव आयोग आखिर क्या कर रहा है और वह किसके कहने पर काम कर रहा है। अखिलेश ने कहा कि चुनाव आयोग को बिना किसी भेदभाव के काम करना चाहिए और उसकी जिम्मेदारी मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाने की है, ताकि आम लोगों को परेशानी न हो।
अखिलेश यादव ने बीजेपी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को किसी राजनीतिक दल के दबाव में काम नहीं करना चाहिए। उनके मुताबिक, समाजवादी पार्टी चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन कर रही है और धरना अभी जारी है।
अखिलेश यादव ने कहा कि अगर विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है तो बीजेपी को उसका बचाव नहीं करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी चुनाव आयोग के जरिए व्यवस्था को अपने पक्ष में प्रभावित करने की कोशिश कर रही है।
फॉर्म-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची में दर्ज किसी नाम को हटाने या किसी नाम पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है। अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि किसी शख्स का नाम गलत तरीके से मतदाता सूची में दर्ज है, तो वह फॉर्म-7 के जरिए उसे हटाने की मांग कर सकता है।
इस फॉर्म में अलग-अलग तरह की आपत्तियों के विकल्प होते हैं। इनमें अपना नाम हटाने का अनुरोध, किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर आपत्ति और नए नाम के मतदाता सूची में जुड़ने पर आपत्ति दर्ज करना शामिल है। वहीं, नए मतदाताओं का नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 का इस्तेमाल किया जाता है।
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