लखनऊ: यूपी की राजधानी में गोमती नदी का बढ़ता जलस्तर अब धार्मिक स्थलों और आम जनजीवन के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। गोमती का पानी लेटे हुए हनुमान मंदिर परिसर में घुस गया है और करीब 15 फुट पानी बढ़ने से हनुमान जी जलमग्न हो गए हैं। मंगलवार को बाढ़ के पानी के कारण भक्त लेटे हुए हनुमान जी का सिंदूर अभिषेक नहीं कर सके। हालांकि, इस मौके पर 51 लीटर दूध से हनुमान जी का अभिषेक किया गया। वहीं, पौराणिक चंद्रिका देवी मंदिर भी चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिर गया है।
गोमती के बढ़ते जलस्तर का असर लेटे हुए हनुमान मंदिर पर भी साफ दिखाई दे रहा है। मंदिर में पानी भरने के कारण मंगलवार को भक्त हनुमान जी का सिंदूर अभिषेक नहीं कर पाए। इस दौरान 51 लीटर दूध से हनुमान जी का अभिषेक किया गया।
वहीं, चंद्रिका देवी मंदिर के चारों ओर भी पानी भर गया है। मंदिर परिसर में फिलहाल पुजारी के अलावा इक्का-दुक्का भक्त और स्थानीय दुकानदार ही नजर आ रहे हैं। आम दिनों में भक्तों से गुलजार रहने वाले मंदिर परिसर में अब सन्नाटा पसरा हुआ है।
चंद्रिका देवी मंदिर तक पहुंचने के तीन प्रमुख रास्ते हैं। मुख्य मार्ग पिछले करीब एक सप्ताह से पानी में डूबा हुआ है। पीछे की ओर से आने वाली सड़क भी बाढ़ के पानी में डूब गई है और वहां पानी तेज रफ्तार से बह रहा है।
हनुमान गढ़ी के सामने बने टीन शेड में भी घुटनों तक पानी भर गया है। मंदिर परिसर चारों ओर से पानी से घिरकर टापू जैसा बन गया है। इससे श्रद्धालुओं के लिए मंदिर तक पहुंचना मुश्किल हो गया है।
मंदिर समिति के महामंत्री अनुराग तिवारी ने बताया कि मौजूदा स्थिति को देखते हुए मंदिर समिति ने हालात सामान्य होने तक भक्तों से मंदिर परिसर में नहीं आने की अपील की है।
गोमती नदी के बढ़े जलस्तर का असर निर्माणाधीन पुलों पर भी पड़ा है। बाढ़ के कारण पक्का पुल और मेहंदीघाट पुल के निर्माण की रफ्तार थम गई है। सेतु निगम दोनों पुलों को दिसंबर तक पूरा करने की कोशिश कर रहा था, लेकिन अब निर्माण में और समय लगने की संभावना है।
दोनों पुलों का करीब 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है। पक्का पुल के अंतिम डेक का काम केवल कुछ मीटर ही बाकी है। पुल की सतह पर इस्तेमाल होने वाली निर्माण सामग्री नदी के किनारे रखी गई थी, जिसे क्रेन के जरिए ऊपर पहुंचाया जाना था। लेकिन पानी बढ़ने के बाद क्रेन का काम प्रभावित हो गया है।
मेहंदीघाट पुल का निर्माण 11 खंभों पर किया जा रहा है। यहां भी अंतिम खंभे पर काम चल रहा था, लेकिन बढ़े जलस्तर ने निर्माण की रफ्तार पर असर डाला है।
फैजुल्लागंज में बाढ़ का पानी अब लोगों के लिए सिर्फ जलभराव की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि जान का खतरा भी बढ़ गया है। गंदे और दूषित पानी के बीच सांप और दूसरे जहरीले जीव-जंतु घरों में घुस रहे हैं। इससे इलाके के लोगों में डर का माहौल है।
लोग पानी में कदम रखने से पहले भी सावधानी बरत रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों को लेकर सबसे ज्यादा चिंता बनी हुई है। बाढ़ के पानी के बीच जहरीले जीवों के निकलने से स्थानीय लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
बाढ़ और दूषित पानी का असर बच्चों पर भी दिखाई दे रहा है। सामाजिक कार्यकत्री ममता तिपाठी के मुताबिक, करीब एक सप्ताह से कई बच्चों ने डर की वजह से स्कूल जाना छोड़ दिया है।
बच्चों और उनके परिवारों को आशंका है कि रास्तों में जमा हरे और काले पानी में कोई जहरीला जीव हो सकता है या घर के आसपास मौजूद जहरीले जीव नुकसान पहुंचा सकते हैं। लगातार डर और तनाव के कारण इलाके के लोग सदमे की स्थिति में हैं।
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