लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी में बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है। गोमती नदी के उफान के बीच मंगलवार सुबह इटौंजा क्षेत्र के लासा गांव में छह दोस्त बाढ़ के पानी में डूब गए। इनमें पांच युवकों को सुरक्षित बचा लिया गया, लेकिन गहरे पानी में जाने से विमल की मौत हो गई। घंटों की मशक्कत के बाद प्रशासन ने उसका शव बरामद किया। उधर, गोमती का जलस्तर बढ़ने से मड़ियांव, घैला, फैजुल्लागंज, दौलतगंज और गोमती नगर विस्तार के निचले इलाकों में भारी जलभराव है।
फैजुल्लागंज, मल्लाही टोला और आसपास के बाढ़ प्रभावित इलाकों में हालात बेहद खराब हैं। पानी घरों में घुसने के साथ लोगों की वर्षों की कमाई और गृहस्थी को भी तबाह कर रहा है। एक लाख से अधिक आबादी पलायन के लिए मजबूर है। घरों का सामान, वाहन और दुकानें पानी में डूबी हैं। अब लोगों के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि नुकसान के बाद जिंदगी दोबारा कैसे शुरू होगी।
फैजुल्लागंज की गलियों में महंगी कारें और दोपहिया वाहन पानी में डूबे हुए हैं। घरों में रखा फर्नीचर, फ्रिज, टीवी, कपड़े और जरूरी दस्तावेज तक खराब हो चुके हैं। दुकानों के बेसमेंट पानी से भर गए हैं और व्यापारियों को लाखों रुपये के नुकसान का अंदेशा है।
कई परिवार ट्रैक्टरों पर सामान लादकर सुरक्षित जगहों की ओर जाते नजर आए। कोई घर से फ्रिज निकालने की कोशिश कर रहा था तो कोई बच्चों की किताबें और जरूरी कागजात बचाने में जुटा था। लेकिन पानी की रफ्तार और जलभराव की स्थिति ऐसी है कि बड़ी संख्या में लोग अपनी आंखों के सामने गृहस्थी को डूबता देखने को मजबूर हैं।
जलभराव इतना ज्यादा है कि कई इलाकों में लोग अपने घरों तक पहुंचने के लिए नाव का सहारा ले रहे हैं। नावों की संख्या कम होने के कारण लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
कई जगह नावें गलियों में खड़ी दिखाई दीं, जबकि जरूरतमंद लोग उनके इंतजार में परेशान होते रहे। कई परिवार सिर्फ यह देखने के लिए नाव तलाश रहे हैं कि उनके घर की दीवारें और अंदर रखा सामान किस हालत में है।
बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए बनाए गए राहत कैंप भी संकट से अछूते नहीं हैं। कैंप के भीतर पानी नहीं पहुंचा है, लेकिन वहां तक जाने वाले रास्ते जलमग्न हो चुके हैं। मुख्य मार्ग पर पानी भरने के कारण जरूरतमंद लोगों को राहत कैंप तक पहुंचने के लिए भी नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन लोगों को राहत की सबसे ज्यादा जरूरत है, उनके लिए राहत केंद्र तक पहुंचना ही मुश्किल हो गया है। लोगों को आशंका है कि जलस्तर और बढ़ा तो राहत कैंप भी प्रभावित हो सकते हैं।
बाढ़ के बीच महिलाओं और बच्चों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कई जगह लोग पीने के पानी और जरूरी मदद की मांग करते दिखाई दिए। महिलाएं साफ पानी और राहत सामग्री के लिए परेशान हैं, जबकि छोटे बच्चे घरों से दूर अस्थायी ठिकानों पर रहने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों ने कहा कि उन्होंने कोविड-19 के दौरान भी मुश्किल वक्त देखा था, लेकिन इस बाढ़ ने उनके सामने उससे अलग और बेहद गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। कई परिवारों का कहना है कि बाढ़ से हुआ नुकसान इतना बड़ा है कि इसकी भरपाई में वर्षों लग सकते हैं।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में नगर आयुक्त गौरव कुमार, अपर जिलाधिकारी राकेश कुमार सिंह समेत प्रशासनिक अधिकारी निगरानी करते नजर आए। नगर निगम की टीमें भी राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। कई जनप्रतिनिधि और पार्षद भी प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे।
प्रशासन की ओर से राहत सामग्री, भोजन और पानी पहुंचाने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों की संख्या और नुकसान का दायरा काफी बड़ा है। ऐसे में राहत और बचाव के सामने चुनौती लगातार बनी हुई है।
फैजुल्लागंज और मल्लाही टोला की गलियों में लोगों के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि पानी उतरने के बाद वे अपनी जिंदगी फिर से कैसे शुरू करेंगे। जिन घरों और दुकानों को वर्षों की मेहनत से खड़ा किया गया था, उनमें से बहुत कुछ बाढ़ के पानी में डूब चुका है।
पानी एक दिन उतर जाएगा, लेकिन बाढ़ से हुए नुकसान की भरपाई और प्रभावित परिवारों की जिंदगी को पटरी पर लाने में लंबा वक्त लग सकता है।
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