नई दिल्ली। देश में जारी भीषण गर्मी और ‘नौतपा’ के टॉर्चर के बीच मॉनसून को लेकर बेहद चिंताजनक खबर सामने आ रही है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने शुक्रवार (29 मई) को आयोजित एक हाई-प्रोफाइल प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस साल सामान्य से कम मॉनसूनी बारिश होने की बड़ी भविष्यवाणी की है। मौसम विभाग द्वारा जारी सीजन के दूसरे लॉन्ग-रेंज पूर्वानुमान (Long-Range Forecast) के मुताबिक, भारत में जून से सितंबर के दौरान औसत से काफी कम पानी बरसेगा, जिसके पीछे सबसे बड़ा विलेन ‘सुपर अल-नीनो’ (Super El-Nino) को बताया जा रहा है।
मौसम विभाग ने देश के ‘मॉनसून कोर ज़ोन’ (कृषि प्रधान क्षेत्रों) के लिए भी रेड फ्लैग जारी किया है, जिसका सीधा असर देश की खेती और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
IMD का नया आंकड़ा: सिर्फ 90% बरसेगा पानी
IMD ने 13 अप्रैल को जारी अपने पहले पूर्वानुमान को अपडेट करते हुए आज नए और सटीक आंकड़े पेश किए हैं:
- लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA): इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के दौरान कुल बारिश LPA का महज 90% रहने का अनुमान है (इसमें प्लस-माइनस 4% की मॉडल त्रुटि शामिल है)। मौसम विज्ञान के नियमों के मुताबिक, 90% या उससे कम बारिश को ‘सामान्य से कम’ या ‘सूखे जैसी स्थिति’ की श्रेणी में गिना जाता है।
- सुपर अल-नीनो का अटैक: प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार ‘अल-नीनो’ नहीं बल्कि ‘सुपर अल-नीनो’ सक्रिय है, जो मानसूनी हवाओं को कमजोर कर रहा है और भारत की तरफ आने वाले बादलों को रोक रहा है।
आपके इलाके में कैसी होगी बारिश? क्षेत्रवार समझें स्थिति
मौसम विभाग ने देश को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर जो रिपोर्ट जारी की है, वह देश के अधिकांश हिस्सों के लिए अच्छी नहीं है:
| भारत का क्षेत्र | बारिश का पूर्वानुमान | संभावित असर |
| उत्तर-पश्चिम भारत | औसत से कम (LPA का केवल 92%) | पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी यूपी और राजस्थान में धान की बुवाई प्रभावित हो सकती है। |
| मध्य भारत (Core Zone) | सामान्य से कम | देश का मुख्य ‘खेती हब’ (MP, महाराष्ट्र का हिस्सा) जहां फसलें पूरी तरह बारिश पर निर्भर हैं, वहां संकट। |
| दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत | सामान्य से कम | दक्षिणी राज्यों में जलाशयों का जलस्तर घटने की आशंका। |
| उत्तर-पूर्व भारत | सामान्य बारिश (LPA का 94% से 106%) | असम, बिहार और पूर्वोत्तर राज्यों में राहत, हालांकि कुछ इलाकों में बाढ़ का खतरा। |
‘Monsoon Core Zone’ पर सबसे बड़ा खतरा, क्यों बढ़ी सरकार की चिंता?
IMD की इस रिपोर्ट ने सरकार और नीति-निर्माताओं की नींद उड़ा दी है। देश का ‘मॉनसून कोर जोन’ मुख्य रूप से मध्य और ग्रामीण भारत का वह इलाका है जहां सिंचाई की आधुनिक व्यवस्थाएं कम हैं और किसान पूरी तरह आसमान से बरसने वाले पानी पर निर्भर रहते हैं।
अगर मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश 90% के आसपास ठहरती है, तो खरीफ फसलों (जैसे धान, मक्का, सोयाबीन और दलहन) के उत्पादन पर भारी असर पड़ सकता है। इससे आने वाले दिनों में खाद्य महंगाई (Food Inflation) बढ़ने का खतरा भी पैदा हो सकता है।