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Monsoon Arrives in India: इंतजार खत्म! भारत पहुंचा दक्षिण-पश्चिम मानसून, केरल में भारी बारिश शुरू; जानें देरी की असली वजह

  • Weather Update 2026
  • भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने जारी किया नया मैप
  • अगले 24 घंटे में दूसरे राज्यों की ओर बढ़ेगा मानसून
  • प्रशांत महासागर में उभरते अल नीनो का दिखा असर

नई दिल्ली / तिरुवनंतपुरम। देश के करोड़ों किसानों और आम जनता के लिए राहत भरी बड़ी खबर है। लंबा इंतजार खत्म करते हुए दक्षिण-पश्चिम मानसून आखिरकार आज, 4 जून को भारत की मुख्य भूमि (केरल) पर दस्तक दे चुका है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा सैटेलाइट मैप के अनुसार, पिछले 24 घंटों में मानसूनी बादलों ने एक झटके में पूरे केरल राज्य को अपनी जद में ले लिया है।

मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले 24 घंटों के भीतर यह अनुकूल मौसमी परिस्थितियों के सहारे आगे बढ़ते हुए अन्य पड़ोसी राज्यों की ओर रुख करेगा।

इससे पहले तक, मौसम विभाग के मानचित्रों में मानसूनी बादलों की सक्रिय लाइन अरब सागर और श्रीलंका से होते हुए बंगाल की खाड़ी तक अटकी हुई दिखाई दे रही थी। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर इस साल मानसूनी बादलों को भारत की मुख्य भूमि तक पहुंचने से कौन रोक रहा था? आइए इसके पीछे के वैज्ञानिक कारणों को विस्तार से समझते हैं।

मानसून आने में क्यों हुई देरी? ये थे 3 मुख्य विलेन

आमतौर पर भारत में मानसून 1 जून को केरल के तट पर टकरा जाता है और इस साल तो मौसम विभाग ने 26 मई को ही इसके आगमन की संभावना जताई थी। इसके बावजूद मानसून ने 4 जून को दस्तक दी। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, इसके पीछे तीन बड़े वैश्विक और स्थानीय वायुमंडलीय कारक जिम्मेदार थे:

  • 1. हिंद महासागर और अरब सागर का असामान्य रूप से शांत होना: हिंद महासागर को मानसूनी बादलों की ‘फैक्ट्री’ कहा जाता है। इस बार अरब सागर वाले हिस्से में गर्म पानी के ऊपर बनने वाले कम दबाव वाले सिस्टम (Low-Pressure Systems) की हलचल बेहद कमजोर थी, जिससे बारिश वाले बादल नहीं बन पा रहे थे।
  • 2. लक्षद्वीप के पास स्थानीय सिस्टम का रोड़ा: लक्षद्वीप के आस-पास एक स्थानीय कम दबाव का क्षेत्र बनने के कारण, मानसूनी हवाओं की अरब सागर वाली शाखा (Arabian Sea Branch) अचानक धीमी पड़ गई और उसकी रफ्तार रुक गई।
  • 3. प्रशांत महासागर में अल नीनो (El Niño) का साया: प्रशांत महासागर की सतह का तापमान बढ़ने से ‘अल नीनो’ पैटर्न सक्रिय हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र (UN) की मौसम एजेंसी ने भी आगाह किया है कि इस वैश्विक बदलाव के कारण हवाओं की वह रफ्तार कमजोर हो गई है, जो बादलों को भारत की मुख्य भूमि के भीतर तक धकेलती है।


समझें विज्ञान: कैसे आता है भारत में मानसून?

दक्षिण-पश्चिम मानसून असल में हवा की दिशा में होने वाला एक विशाल मौसमी बदलाव है, जो जमीन और समुद्र के बीच तापमान तथा वायुदाब (Air Pressure) के अंतर के कारण पैदा होता है।

मानसून का चक्र: गर्मियों के दिनों में भारत की सूखी धरती सूरज की तपिश से बहुत जल्दी गर्म हो जाती है, जिससे मुख्य भूमि पर ‘कम दबाव’ का क्षेत्र बनता है। इसके विपरीत, विशाल समुद्र अपेक्षाकृत धीमे गर्म होता है और वहां ‘उच्च दबाव’ रहता है। नियम के मुताबिक, हवा हमेशा उच्च दबाव से कम दबाव की ओर चलती है। इसी भारी अंतर के कारण समुद्र से भारी नमी और भाप से लदी हवाएं तेजी से भारतीय उपमहाद्वीप की ओर दौड़ती हैं और झमाझम बारिश करती हैं।


क्या इस साल पड़ेगा सूखा? मौसम विभाग का अनुमान

उत्तर भारत के राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली और मध्य प्रदेश में मानसून का रूट अरब सागर से शुरू होकर केरल और पूर्वोत्तर के रास्तों से मुड़कर पहुंचता है।

मौसम विभाग (IMD) ने अपने ताजा बुलेटिन में स्पष्ट किया है कि हालांकि अल नीनो के उभरते प्रभाव के कारण इस साल कुल मौसमी बारिश सामान्य से थोड़ी कम रहने का अनुमान है, लेकिन देश में किसी बड़े पैमाने पर सूखे (Drought) की आशंका नहीं है। अगले कुछ दिनों में मध्य और उत्तर भारत में प्री-मानसून गतिविधियों में तेजी आने की उम्मीद है।

news desk

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