मैक्सिको के 50% आयात शुल्क का बड़ा असर
वाशिंगटन/नई दिल्ली: मेक्सिको की सीनेट ने बुधवार को भारत, चीन और कई अन्य एशियाई देशों से आयातित 1,400 से अधिक उत्पादों पर 5% से 50% तक का भारी शुल्क लगाने की विधेयक को अंतिम मंजूरी दे दी। यह शुल्क 1 जनवरी 2026 से लागू होगा। विशेषज्ञों के अनुसार यह कदम सीधे तौर पर अमेरिका के आने वाले ट्रंप प्रशासन के दबाव का नतीजा है, जो मैक्सिको को चीनी सामान के “ट्रांजिट पॉइंट” के रूप में इस्तेमाल होने से रोकना चाहता है।
अमेरिका-मैक्सिको संबंधों का नया अध्याय
डोनाल्ड ट्रंप ने चुनाव अभियान के दौरान धमकी दी थी कि यदि मैक्सिको ने चीनी सामान को अमेरिका भेजने का रास्ता बंद नहीं किया, तो मैक्सिको के निर्यात पर 25% तक शुल्क लगा दिया जाएगा। मैक्सिको की 80% से अधिक निर्यात अमेरिका जाती है, इसलिए राष्ट्रपति क्लाउडिया शाइनबॉम की सरकार ने अमेरिका को खुश करने के लिए यह कठोर कदम उठाया। यह कदम USMCA (अमेरिका-मैक्सिको-कनाडा समझौता) को मजबूत करने और “नियरशोरिंग” (उत्तर अमेरिकी आपूर्ति श्रृंखला में निवेश) को बढ़ावा देने की अमेरिकी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
भारत-मैक्सिको व्यापार पर गहरा असर
2024 में भारत और मैक्सिको के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 11.71 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात लगभग $ 5.63 बिलियन और आयात लगभग $ 8.98 बिलियन था। भारत मुख्य रूप से ऑटो पार्ट्स, इंजीनियरिंग गुड्स और केमिकल्स का निर्यात करता है और पेट्रोलियम उत्पादों का आयात करता है।
नवंबर 2024 में अकेले मैक्सिको ने भारत से 729 मिलियन डॉलर का सामान आयात किया था। नए शुल्क से इन सभी वस्तुओं की कीमत 20-40% तक बढ़ सकती है, जिससे मैक्सिको के आयातक और अंततः अमेरिकी उपभोक्ता प्रभावित होंगे।
भारत के लिए दोहरी मार
भारत पहले से ही अमेरिका के इस्पात-एल्यूमिनियम शुल्क का सामना कर रहा है। अब मैक्सिको मार्ग भी महंगा हो जाएगा, जो उत्तर अमेरिकी बाजार में भारतीय ऑटो पार्ट्स, दवाइयों और कपड़े की पहुँच को कमजोर करेगा। विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2026 के मध्य तक भारत का मैक्सिको को निर्यात 15-25% तक गिर सकता है, जब तक दोनों देशों के बीच अलग से छूट समझौता न हो जाए।
मैक्सिको का यह फैसला इस बात की ओर इशारा है कि वैश्विक व्यापार में अमेरिका का दबदबा कितना मजबूत है। भारत जैसे उभरते देशों को अब न केवल चीन-अमेरिका व्यापार युद्ध, बल्कि अमेरिका के पड़ोसियों द्वारा उठाए जा रहे “सुरक्षा कवच” से भी निपटना पड़ेगा। भारत सरकार को तुरंत मैक्सिको के साथ उच्च-स्तरीय व्यापार वार्ता शुरू करनी चाहिए ताकि कम से कम महत्वपूर्ण क्षेत्रों (दवाइयाँ, ऑटो पार्ट्स) में छूट हासिल की जा सके।
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