Sign In
  • My Bookmarks
Indian Press House
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • झारखंड
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • सेहत
  • अन्य
Reading: 40 दिन तक बिना नहाए रहते हैं पुरुष, फिर धरते हैं महिलाओं का रूप… राजस्थान की गवरी परंपरा क्यों है इतनी अनोखी?
Share
Indian Press HouseIndian Press House
Font ResizerAa
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
Search
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • झारखंड
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • सेहत
  • अन्य
Have an existing account? Sign In
Follow US
© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.
Indian Press House > Blog > Latest News > 40 दिन तक बिना नहाए रहते हैं पुरुष, फिर धरते हैं महिलाओं का रूप… राजस्थान की गवरी परंपरा क्यों है इतनी अनोखी?
Latest Newsफीचर

40 दिन तक बिना नहाए रहते हैं पुरुष, फिर धरते हैं महिलाओं का रूप… राजस्थान की गवरी परंपरा क्यों है इतनी अनोखी?

vineet verma
Last updated: August 20, 2026 5:26 pm
vineet verma
Share
SHARE

उदयपुर: राजस्थान के मेवाड़ अंचल में भील आदिवासी समुदाय की गवरी लोकनाट्य परंपरा अपनी अनूठी धार्मिक मान्यताओं और कड़े नियमों के लिए जानी जाती है। रक्षाबंधन के अगले दिन से शुरू होने वाला यह उत्सव करीब 40 दिनों तक चलता है। इस दौरान पुरुष कलाकार महिलाओं की भूमिकाएं निभाते हैं और कई कठिन नियमों का पालन करते हैं।

भील समुदाय की खास लोकनाट्य परंपरा

गवरी लोकनाट्य मुख्य रूप से राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र के डूंगरपुर, उदयपुर, राजसमंद और चित्तौड़गढ़ में भील आदिवासी समुदाय द्वारा किया जाता है। इसे भील समाज की पारंपरिक आस्था और धार्मिक विश्वासों से जुड़ी महत्वपूर्ण लोकनाट्य परंपरा माना जाता है। इसकी शुरुआत रक्षाबंधन के अगले दिन होती है और आयोजन लगभग 40 दिनों तक जारी रहता है।

गौरज्या माता की आराधना से होती है शुरुआत

गवरी की धार्मिक परंपरा में गौरज्या माता की पूजा का विशेष महत्व है। गवरी के धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत माता की स्थापना और आराधना से की जाती है। लोक मान्यता के अनुसार, गौरज्या माता पार्वती की बहन हैं और ठंडी राखी के दिन कैलाश पर्वत से उनसे मिलने आती हैं। इसी मान्यता के तहत बहनों के इस मिलन को केंद्र में रखकर पूरे क्षेत्र में गवरी का आयोजन किया जाता है।

40 दिन तक नहीं नहाते कलाकार

गवरी में शामिल कलाकारों को कई कड़े नियमों का पालन करना पड़ता है। एक गवरी समूह में करीब 150 लोग हिस्सा लेते हैं। कलाकारों के लिए 40 दिनों तक स्नान न करने की परंपरा बताई गई है। इसके साथ ही उन्हें ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है और हरी सब्जियों के साथ मांस और मदिरा का भी त्याग करना पड़ता है।

इस दौरान कलाकार नंगे पैर रहते हैं, घर पर रहने के बजाय मंदिर में ठहरते हैं और जमीन पर सोते हैं। उनके लिए दिन में केवल एक बार भोजन करने का भी नियम होता है। गवरी की पूरी अवधि में कलाकार इन कठोर नियमों का पालन करते हुए धार्मिक अनुष्ठान और लोकनाट्य का हिस्सा बनते हैं।

भस्मासुर की कथा से जुड़ी है गवरी

गवरी लोकनाट्य के पीछे एक पौराणिक कथा भी मानी जाती है। लोक मान्यता के मुताबिक, भस्मासुर ने भगवान शिव की कठोर तपस्या करके ऐसा वरदान हासिल किया था, जिससे वह किसी को भी भस्म कर सकता था। वरदान मिलने के बाद उसने भगवान शिव को ही भस्म करने का प्रयास शुरू कर दिया।

भस्मासुर के इस संकट से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया और उसका अंत किया। गवरी के मंचन में इसी पौराणिक प्रसंग को आधार बनाकर कथा को लोकनाट्य के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।

पुरुष ही निभाते हैं महिलाओं के किरदार

गवरी की सबसे खास बात इसके पात्र और उनकी भूमिकाएं हैं। नाटक के प्रमुख पात्र बुड़िया को भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है और वह मुखौटा पहनकर अपनी भूमिका निभाता है। वहीं पार्वती और मोहिनी की भूमिकाएं भी पुरुष कलाकार ही निभाते हैं।

गवरी में हास्य और संवाद को प्रभावी बनाने के लिए झामट्या और कुटकुटिया जैसे पात्र भी होते हैं। धार्मिक आस्था, पौराणिक कथाओं, अभिनय और लोक परंपराओं का यह मेल गवरी को राजस्थान की विशिष्ट आदिवासी लोकनाट्य परंपराओं में खास स्थान देता है।

Subscribe to Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

TAGGED: Bhil Tribe Rajasthan, Gaurja Mata, Gawari Festival, Gawari Folk Theatre, Mewar Gawari, Rajasthan Tribal Culture, आदिवासी लोकनाट्य, गवरी उत्सव, गवरी नाटक, गवरी लोकनाट्य, गौरज्या माता, भील जनजाति, मेवाड़ गवरी, राजस्थान की परंपरा, राजस्थान गवरी
Share This Article
Twitter Email Copy Link Print
Previous Article ट्रंप के ‘Economic D-Day’ पर ईरान का पलटवार, अराघची बोले- अमेरिका अपने संकट से ध्यान भटका रहा
Next Article लॉन्च से पहले ही सामने आई Kia Sorento, अनंतपुर में शुरू हुआ प्रोडक्शन… 4 सितंबर को होगी एंट्री, फीचर्स जानकर चौंक जाएंगे!

फीचर

View More

मायके से आई वो पोटली, जिसे खोलते ही नम हो जाती हैं बेटियों की आंखें! मगध की सावन पुरिया में छिपा है अपनों का प्यार

गया: मगध क्षेत्र में सावन का महीना केवल भगवान शिव की भक्ति और हरियाली से जुड़ा पर्व नहीं है, बल्कि…

By vineet verma 3 Min Read

टेलीफोन की लंबी कतारों से डिजिटल इंडिया तक: राजीव गांधी ने कैसे बदली भारत की तकनीकी तस्वीर?

कल्पना कीजिए उस दौर की, जब भारत में कंप्यूटर आम लोगों के…

6 Min Read

सोसाइटी ने कह दिया ‘घर खाली करो’, तो क्या सच में छोड़ना पड़ेगा फ्लैट? जानिए मालिक के पूरे अधिकार

नई दिल्ली: आपने अपनी मेहनत की कमाई से फ्लैट खरीदा, उसका रजिस्ट्रेशन…

7 Min Read

विचार

View More

भारतीय रेडियो प्रसारण के 100 वर्ष: ‘श्रुति’ की परंपरा से ‘मन की बात’ तक… ऐसा रहा जादुई तरंगों का 100 साल का सफर

उस अविस्मरणीय पल को याद कीजिए, जब आपने पहली बार…

August 13, 2026

क्या कभी सोचा है कि आखिर कैसे दक्षिण से उत्तर तक पूरे देश में छा जाते हैं बादल और शुरू हो जाती है झमाझम बारिश?

नई दिल्ली: देश में मानसून की…

July 9, 2026

‘एक भी अमेरिकी सैनिक जिंदा नहीं लौटेगा’… आखिर ईरान ने अमेरिका को क्यों दी खुली चेतावनी? जानिए कैसे बढ़ा नया सैन्य तनाव

तेहरान: पश्चिम एशिया में अमेरिका और…

July 9, 2026

अमीर पति बनेगा सहारा या मुसीबत? डेटिंग ऐप CEO की सलाह से छिड़ी बहस, महिलाओं से कहा- ‘कमाई का अंतर ज्यादा हो तो सोचिए’

नई दिल्ली: शादी और रिश्तों को…

June 9, 2026

मानसून की दस्तक में फिर देरी, आखिर कब पहुंचेगा केरल? जानिए क्यों बार-बार बदल रही है IMD की तारीख

नई दिल्ली: देश के कई राज्यों…

June 4, 2026

You Might Also Like

Latest Newsफीचर

मायके से आई वो पोटली, जिसे खोलते ही नम हो जाती हैं बेटियों की आंखें! मगध की सावन पुरिया में छिपा है अपनों का प्यार

गया: मगध क्षेत्र में सावन का महीना केवल भगवान शिव की भक्ति और हरियाली से जुड़ा पर्व नहीं है, बल्कि…

3 Min Read
Latest Newsबाजार

लॉन्च से पहले ही सामने आई Kia Sorento, अनंतपुर में शुरू हुआ प्रोडक्शन… 4 सितंबर को होगी एंट्री, फीचर्स जानकर चौंक जाएंगे!

नई दिल्ली: किआ भारत में अपनी नई एसयूवी Kia Sorento को लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। लॉन्च से…

3 Min Read
Trending Newsफीचर

टेलीफोन की लंबी कतारों से डिजिटल इंडिया तक: राजीव गांधी ने कैसे बदली भारत की तकनीकी तस्वीर?

कल्पना कीजिए उस दौर की, जब भारत में कंप्यूटर आम लोगों के लिए किसी अजूबे से कम नहीं था, टेलीफोन…

6 Min Read
Latest Newsक्राइम

पैसों के लिए 10वीं के दो छात्रों ने रची प्रिंसिपल की हत्या की साजिश, 27 बार चाकू घोंपा; ‘बाबू’ शब्द से खुला खौफनाक राज

नलगोंडा: तेलंगाना के नलगोंडा में महिला स्कूल प्रिंसिपल की हत्या का मामला पुलिस ने सुलझा लिया है। जांच में सामने…

3 Min Read
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य

© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.

Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?