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1972 में हुई शादी, 1978 से अलग रह रहे थे दंपति; 49 साल पुराने रिश्ते पर हाई कोर्ट ने लगाया विराम, 70-72 साल की उम्र में मिला तलाक

अमरावती: आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने 70 वर्षीय महिला और 72 वर्षीय पुरुष के करीब 49 साल पुराने वैवाहिक विवाद का अंत कर दिया। दोनों सितंबर 1978 से अलग रह रहे थे और अब आपसी सहमति से विवाह समाप्त करने पर राजी हो गए। मामले की परिस्थितियों को देखते हुए अदालत ने छह महीने की अनिवार्य कूलिंग-ऑफ अवधि को भी माफ कर दिया।

4 जून 1972 को हुई थी शादी

मामला उस दंपति का है, जिनका विवाह 4 जून 1972 को हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। दोनों की कोई संतान नहीं है। शादी के करीब छह साल बाद सितंबर 1978 से पति-पत्नी अलग रहने लगे थे। इसके बाद उनका वैवाहिक जीवन व्यावहारिक रूप से समाप्त हो गया और दोनों करीब पांच दशकों तक अलग-अलग रहे।

महिला गृहिणी हैं, जबकि 72 वर्षीय पति सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं। पति ने वर्ष 2024 में फैमिली कोर्ट में याचिका दायर कर क्रूरता और परित्याग के आधार पर विवाह समाप्त करने की मांग की थी। फैमिली कोर्ट ने 3 जून 2024 को उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए विवाह भंग कर दिया था। इसके बाद महिला ने इस फैसले को आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में चुनौती दी।

अपील के दौरान तलाक पर दोनों की बनी सहमति

हाई कोर्ट में अपील लंबित रहने के दौरान दोनों ने अपने विवादों को सुलझा लिया। इसके बाद पति-पत्नी आपसी सहमति से तलाक लेने पर राजी हो गए। पति ने पत्नी को हर महीने 20,000 रुपये भरण-पोषण देने पर सहमति जताई। इसके साथ ही उन्होंने अपने खिलाफ लंबित एक आपराधिक मामले को वापस लेने की बात कही।

वहीं, पत्नी ने भी अपने द्वारा दर्ज कराए गए एक अन्य लंबित मामले को वापस लेने पर सहमति जताई। इस तरह दोनों पक्षों ने लंबे समय से चले आ रहे विवादों को खत्म करने पर सहमति बनाई।

कोर्ट ने रिश्ते को बचाने की भी कोशिश की

जस्टिस बट्टू देवानंद और जस्टिस सुनीता गांधम की पीठ ने कहा कि अदालत की ओर से दोनों को वैवाहिक रिश्ता बनाए रखने की सलाह देने का प्रयास किया गया था। हालांकि, करीब 49 वर्षों से अलग रह रहे दंपति के बीच लंबे समय से चला आ रहा तनाव इतना गहरा था कि दोनों में दोबारा साथ रहने की इच्छा नहीं थी।

अदालत ने माना कि दोनों के फिर से साथ आने की बिल्कुल कोई संभावना नहीं है। ऐसे में लंबे समय तक मुकदमेबाजी जारी रखने के बजाय दोनों ने विवाह समाप्त कर विवादों पर विराम लगाने का फैसला किया।

छह महीने की कूलिंग-ऑफ अवधि भी माफ

मामले की परिस्थितियों को देखते हुए हाई कोर्ट ने आपसी सहमति से तलाक के लिए निर्धारित छह महीने की कूलिंग-ऑफ अवधि को भी माफ कर दिया। अदालत ने महिला की अपील स्वीकार करते हुए फैमिली कोर्ट के पुराने आदेश को रद्द कर दिया और दोनों का विवाह आपसी सहमति से समाप्त कर दिया।

हाई कोर्ट ने 13 अगस्त को दिए अपने आदेश में कहा कि कानून का उद्देश्य हिंदू विवाह को आपसी सहमति से समाप्त करने की व्यवस्था उपलब्ध कराना है। पीठ ने कहा कि यह उस सोच में बदलाव को दर्शाता है, जिसमें हिंदू विवाह को हमेशा एक अविच्छेद्य संस्कार माना जाता था। मौजूदा कानूनी व्यवस्था कुछ परिस्थितियों में पति-पत्नी को आपसी सहमति से विवाह समाप्त करने की अनुमति देती है।

vineet verma

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