क्या आप सोच सकते हैं कि कोई इंसान इतने जमा देने वाले पानी में घंटों बिता सकता है, जहां कुछ ही मिनटों में खून जमने की नौबत आ जाए? पोलैंड की रहने वाली मारिया ‘आइसब्रेकर’ बोडाज (Maria Bodaj) ने इस नामुमकिन से दिखने वाले कारनामे को सच कर दिखाया है। मारिया ने 1 घंटे 38 सेकंड तक शून्य से नीचे तापमान वाले बर्फीले पानी में डूबे रहकर ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ (Guinness World Records) में अपना नाम दर्ज कराया है। उनकी यह चौंका देने वाली और प्रेरणादायक कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।
‘पानी की ठंडक नहीं बदल सकते, लेकिन मन को बदल सकते हैं’
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मारिया के लिए ठंडे पानी में उतरना पहले सिर्फ एक एडवेंचर था, लेकिन धीरे-धीरे यह उनकी जीवनशैली का हिस्सा बन गया। मारिया साल 2021 से बर्फीले पानी में रहने का कड़ा अभ्यास कर रही हैं।
मारिया का कहना है:
“आप बर्फीले पानी की ठंडक तो नहीं बदल सकते, लेकिन उस स्थिति में अपनी प्रतिक्रिया और मन पर काबू जरूर पा सकते हैं। ठंडे पानी ने मुझे आज में जीना, धैर्य रखना और मुश्किल से मुश्किल हालात में भी शांत रहना सिखाया है।”
एक के बाद एक तोड़े कई रिकॉर्ड्स: मारिया का सफर
मारिया बोडाज ने बहुत ही कम समय में अपनी शारीरिक और मानसिक क्षमता का लोहा मनवाते हुए कई बड़े रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं:
- जून 2025: पूरे शरीर पर 3 घंटे 33 मिनट 33 सेकंड तक बर्फ की परत रखकर पहला रिकॉर्ड बनाया।
- सितंबर 2025: 1 घंटा 38 सेकंड तक बर्फीले पानी में पूरी तरह डूबे रहकर महिलाओं के वर्ग में नया विश्व कीर्तिमान स्थापित किया।
- फरवरी 2026: बर्फ के सीधे संपर्क में रहकर 1 घंटा 33 मिनट 33 सेकंड बिताने की एक और असाधारण उपलब्धि हासिल की।
कैसे संभव हुआ यह चमत्कार? ध्यान और सांसों का खेल
जमा देने वाली ठंड में शरीर का तापमान गिरना और दिल की धड़कनें बेकाबू होना लाजमी है। लेकिन मारिया इस दौरान डरने के बजाय सांसों पर नियंत्रण (Breathing Exercises) रखती हैं और पानी के बुलबुलों पर ध्यान केंद्रित करती हैं।
उनके मेंटॉर वैलेरियन रोमानोव्स्की का मानना है कि जब आपका दिमाग पूरी तरह शांत होता है, तभी आप ठंड की असल प्रकृति को समझ सकते हैं। मारिया डर पर काबू पाने के लिए मन में सकारात्मक और जिज्ञासा से भरे विचार लाती हैं।
महिलाओं के लिए मारिया का खास संदेश
मारिया का कहना है कि उनका मकसद सिर्फ रिकॉर्ड बनाना नहीं है। वे दुनिया भर की महिलाओं को यह बताना चाहती हैं कि हर इंसान के भीतर असीमित ताकत छिपी होती है। छोटे-छोटे अभ्यास और आत्म-विश्वास के जरिए हम अपने शरीर और मन दोनों की क्षमताओं को नए शिखर पर पहुंचा सकते हैं।