ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में लुइज इनासियो लूला डा सिल्वा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मुखर आलोचक लूला ने दूसरे चरण के चुनाव में दक्षिणपंथी उम्मीदवार फ्लावियो बोल्सोनारो को करीब 44 लाख वोटों से हराकर चौथी बार राष्ट्रपति बनने का रास्ता साफ कर लिया है। ब्राजील के निर्वाचन प्राधिकरण के मुताबिक, लूला को 51.79 प्रतिशत वैध वोट मिले, जबकि फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.21 प्रतिशत वोट हासिल हुए। लूला का नया कार्यकाल 5 जनवरी 2027 से शुरू होगा।
यह जीत केवल ब्राजील की घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं है। लैटिन अमेरिका में दक्षिणपंथी राजनीति के बढ़ते प्रभाव के बीच लूला की वापसी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के विरोध और ब्राजील की स्वतंत्र विदेश नीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
चुनाव में जीत के बाद लूला ने लोकतंत्र और राष्ट्रीय संप्रभुता को अपनी जीत का प्रमुख आधार बताया। उन्होंने कहा कि ब्राजील अपने फैसले खुद करेगा और किसी दूसरे देश के निर्देशों पर नहीं चलेगा। उनका जोर सरकार के निर्णयों में आम नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने पर भी रहा।
लूला की जीत ऐसे समय में हुई है, जब लैटिन अमेरिका के कई देशों में दक्षिणपंथी और ट्रंप समर्थक नेताओं का प्रभाव बढ़ रहा है। ऐसे में ब्राजील में वामपंथी नेतृत्व की वापसी क्षेत्रीय राजनीति में एक अलग संदेश देती है।
अमेरिका और ब्राजील के बीच व्यापारिक तनाव भी इस चुनाव के प्रमुख संदर्भों में शामिल रहा है। ट्रंप प्रशासन की ओर से ब्राजील पर लगाए गए ऊंचे टैरिफ दोनों देशों के संबंधों में तनाव की वजह बने। लूला ने चुनाव प्रचार के दौरान ब्राजील के आर्थिक और राजनीतिक फैसलों में अमेरिकी दबाव का विरोध किया था।
ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में मतदान की समयसीमा बढ़ाने को लेकर भी विवाद हुआ। मतदान समाप्त होने से कुछ मिनट पहले सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश क्रिस्टियानो जानिन ने वोटिंग का समय दो घंटे बढ़ाने का आदेश दिया। यह फैसला दोनों उम्मीदवारों की ओर से सामने आई मांगों के बाद लिया गया।
लूला की टीम ने साओ पाउलो और साल्वाडोर में मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचाने वाली बसों से जुड़ी समस्याओं का हवाला दिया। वहीं, फ्लावियो बोल्सोनारो की ओर से दक्षिणी ब्राजील में भारी बारिश के कारण मतदान प्रभावित होने की बात कही गई।
हालांकि, समय बढ़ाने के फैसले पर फ्लावियो बोल्सोनारो ने आपत्ति जताई और चुनाव परिणाम को चुनौती देने की बात कही। इस विवाद के कारण मतगणना शुरू होने में देरी हुई। हालांकि, चुनाव अधिकारियों के अनुसार, समय बढ़ाने से परिणाम पर असर पड़ने का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।
इस चुनाव का सबसे दिलचस्प पहलू यह रहा कि पहले चरण में लूला अपने प्रतिद्वंद्वी से पीछे थे। 4 अक्टूबर को हुए पहले चरण के मतदान में फ्लावियो बोल्सोनारो को 47.03 प्रतिशत और लूला को 45.16 प्रतिशत वैध वोट मिले थे।
पहले चरण में पिछड़ने के बावजूद लूला ने दूसरे चरण में अपनी स्थिति मजबूत की और अंततः जीत हासिल कर ली। इस दौरान युवाओं तक पहुंच बनाने, समर्थकों को मतदान के लिए प्रेरित करने और लोकतंत्र से जुड़े मुद्दों पर जोर देने की उनकी रणनीति महत्वपूर्ण रही।
दूसरे चरण में लूला को 6.42 करोड़ से अधिक वोट मिले, जबकि फ्लावियो बोल्सोनारो को करीब 5.98 करोड़ वोट हासिल हुए। दोनों के बीच अंतर लगभग 44.3 लाख वोटों का रहा।
ब्राजील के राष्ट्रपति चुनाव में महंगाई, रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती कीमतें और अपराध प्रमुख मुद्दे रहे। दोनों उम्मीदवारों को अपने राजनीतिक समर्थकों के बीच समर्थन बनाए रखने के साथ-साथ उन मतदाताओं को भी आकर्षित करना पड़ा, जो आर्थिक स्थिति और कानून-व्यवस्था को लेकर चिंतित थे।
लूला का राजनीतिक सफर भी विवादों से अछूता नहीं रहा है। भ्रष्टाचार के मामलों में उन्हें पहले जेल जाना पड़ा था, लेकिन बाद में उनकी दोषसिद्धि रद्द कर दी गई। दूसरी ओर, बोल्सोनारो परिवार और उसके राजनीतिक सहयोगियों से जुड़े विवाद भी चुनावी बहस का हिस्सा रहे।
इन परिस्थितियों में लूला की जीत को उनके राजनीतिक अनुभव, समर्थकों की लामबंदी और दूसरे चरण में बदले चुनावी समीकरणों के परिणाम के रूप में देखा जा रहा है।
लूला ने 1970 के दशक में मजदूर संगठन के नेता के रूप में अपनी राजनीतिक पहचान बनाई। वह वर्कर्स पार्टी के गठन से जुड़े रहे और 2002 तथा 2006 में ब्राजील के राष्ट्रपति चुने गए। उनके कार्यकाल के बाद उनकी सहयोगी दिल्मा रूसेफ राष्ट्रपति बनीं, जिन्हें 2016 में महाभियोग के जरिए पद से हटा दिया गया।
2018 में लूला चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन जेल में होने के कारण ऐसा नहीं कर सके। वह करीब 580 दिन बाद रिहा हुए और उनकी दोषसिद्धि रद्द होने के बाद उनकी राजनीतिक वापसी का रास्ता खुला। 2022 में उन्होंने जायर बोल्सोनारो को हराकर राष्ट्रपति पद हासिल किया था।
अब 2026 के चुनाव में फ्लावियो बोल्सोनारो को हराकर लूला ने अपने राजनीतिक जीवन में एक और बड़ी उपलब्धि जोड़ ली है। उनका चौथा कार्यकाल ब्राजील की राजनीति के साथ-साथ अमेरिका और लैटिन अमेरिका के संबंधों के लिए भी महत्वपूर्ण रहने वाला है।
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