सुल्तानपुर/लखनऊ । लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से जुड़े मानहानि मामले में सोमवार को सुल्तानपुर की विशेष MP-MLA अदालत के संभावित फैसले पर सबकी नजरें टिकी हैं। यह मामला वर्ष 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा है। शिकायत भाजपा नेता और जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष विजय मिश्रा ने दर्ज कराई थी।
करीब आठ साल पुराने इस मामले में अदालत में कई चरणों में सुनवाई हुई। राहुल गांधी को फरवरी 2024 में अदालत से जमानत मिली थी। इसके बाद शिकायतकर्ता की ओर से गवाहों के बयान, राहुल गांधी के वॉयस सैंपल के मिलान और अन्य कानूनी पहलुओं को लेकर कार्यवाही आगे बढ़ी।
अब 26 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित फैसले के कारण यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी चर्चा के केंद्र में है। हालांकि, फैसले की वास्तविक स्थिति और अदालत के आदेश की पुष्टि आधिकारिक न्यायिक जानकारी से की जानी चाहिए।
यह मामला वर्ष 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी की एक कथित टिप्पणी से जुड़ा है। आरोप है कि 8 मई 2018 को बेंगलुरु में चुनाव प्रचार के दौरान राहुल गांधी ने तत्कालीन भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
इसके बाद भाजपा नेता विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई। शिकायतकर्ता का आरोप था कि टिप्पणी से अमित शाह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।
मामले में अदालत ने 27 नवंबर 2023 को राहुल गांधी को तलब किया। इसके बाद फरवरी 2024 में राहुल गांधी अदालत में पेश हुए और उन्हें जमानत मिल गई।
मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता विजय मिश्रा ने राहुल गांधी के वॉयस सैंपल का मिलान कराने की मांग की थी। इस आवेदन को मजिस्ट्रेट अदालत ने खारिज कर दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने सेशन कोर्ट में चुनौती दी, जहां से भी राहत नहीं मिली।
बाद में इस मुद्दे को हाईकोर्ट में उठाया गया, लेकिन वहां भी याचिका खारिज कर दी गई। इस कानूनी प्रक्रिया के कारण मामले में वॉयस सैंपल की जांच को लेकर अलग से विवाद बना रहा।
सुल्तानपुर की विशेष MP-MLA अदालत का फैसला इस मामले की आगे की कानूनी दिशा तय कर सकता है। अदालत के आदेश के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि मामले में राहुल गांधी के खिलाफ आरोपों पर क्या निष्कर्ष निकाला गया है और आगे किसी अपील या अन्य कानूनी कार्यवाही की जरूरत होगी या नहीं।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि मानहानि के मामले में आरोप लगना और दोषसिद्धि होना अलग-अलग बातें हैं। राहुल गांधी के खिलाफ मामले का अंतिम परिणाम अदालत के आदेश से ही तय होगा।
अमित शाह पर कथित टिप्पणी से शुरू हुआ यह विवाद आठ साल बाद एक अहम कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। अब सुल्तानपुर की विशेष MP-MLA अदालत के आदेश पर नजर रहेगी, जो राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे मानहानि मामले की आगे की दिशा तय करेगा।
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