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लखनऊ में बढ़ा राजनीतिक तापमान—महापौर के बयान से भड़की सपा, घर के बाहर नारेबाजी और विरोध

लखनऊ: लखनऊ की भाजपा महापौर सुषमा खर्कवाल द्वारा अखिलेश यादव की दिवंगत मां पर की गई विवादित टिप्पणी के बाद समाजवादी पार्टी (सपा) में भारी आक्रोश फैल गया। मंगलवार को महिला आरक्षण बिल के मुद्दे पर भाजपा की जनाक्रोश रैली के दौरान महापौर के बयान के विरोध में बुधवार को सपा समर्थकों ने उनके आवास पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नारेबाजी की और महापौर के आवास के गेट पर विरोध प्रदर्शन किया।

महापौर सुषमा खर्कवाल ने रैली में महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष (खासकर सपा और कांग्रेस) पर हमला बोलते हुए कहा था, “इन्होंने उस महिला का अपमान किया है जिनकी कोख से इन्होंने जन्म लिया है। उस महिला का अपमान किया है जिस बहन की ऊंगली पकड़कर चले हैं… उस बेटी का अपमान किया है, जब कभी किसी काम से थक-हारकर आए तो बेटी का चेहरा देखकर थकान चली जाती थी।” उन्होंने यह भी कहा कि महिलाएं 2027 और 2029 में विपक्ष को सबक सिखाएंगी। सपा समर्थकों ने इसे अखिलेश यादव की मां पर सीधा हमला माना।

इस बयान पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तीखा पलटवार करते हुए एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया: “आदरणीय सुषमा खरकवाल जी, आप कृपया अपनी राजनीतिक मजबूरीवश मेरी दिवंगत मां का नाम लेकर एक महिला के रूप में एक अन्य महिला का अपमान न करें। नारी के सम्मान में आपसे बस इतना आग्रह है। यदि आपके घर में कोई बड़े-बुजुर्ग हों या बच्चे तो उनसे पूछ लीजिए कि आपका ये अति निंदनीय द्वेषपूर्ण बयान उचित है या नहीं।” अखिलेश ने इसे सभी महिलाओं के सम्मान के खिलाफ बताया।

बयान के बाद सपा कार्यकर्ता और समर्थक महापौर के आवास पहुंचे, जहां उन्होंने जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने गेट पर लगी नेम प्लेट को चप्पलों से पीटकर अपना गुस्सा जताया। पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए मौके पर भारी बल तैनात किया।

महापौर सुषमा खर्कवाल ने बाद में विवाद पर सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने किसी व्यक्ति विशेष या अखिलेश यादव की मां का नाम नहीं लिया, बल्कि सामान्य रूप से सभी मांओं, बहनों और बेटियों के सम्मान की बात की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।

यह घटना महिला आरक्षण बिल को लेकर सियासी घमासान के बीच हुई है, जिसमें भाजपा विपक्ष पर महिलाओं के खिलाफ रुख अपनाने का आरोप लगा रही है, जबकि सपा इसे राजनीतिक हमला बता रही है। विवाद अभी भी जारी है और दोनों पक्षों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।

सपा की प्रतिक्रिया: पार्टी ने इसे नारी सम्मान का अपमान करार दिया और कार्यकर्ताओं में आक्रोश है। अखिलेश यादव ने नैतिकता और मर्यादा का हवाला देते हुए महापौर से संयम बरतने की अपील की।

भाजपा पक्ष: महापौर के समर्थकों ने इसे सपा की संवेदनशीलता का नाटक बताया।

यह मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ने वाला साबित हो रहा है, खासकर महिला सम्मान और राजनीतिक भाषा की मर्यादा को लेकर।

news desk

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