नई दिल्ली: पश्चिम अफ्रीकी देश बुर्किना फासो में सैन्य सरकार के दो बड़े फैसलों ने नई बहस छेड़ दी है। सरकार ने आतंकवाद, देशद्रोह और जासूसी जैसे गंभीर अपराधों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान फिर से लागू करने की दिशा में कदम उठाया है। वहीं, देश में राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर होने वाली ब्यूटी कॉन्टेस्ट प्रतियोगिताओं पर भी रोक लगा दी गई है। सरकार इन फैसलों को राष्ट्रीय सुरक्षा, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक मूल्यों की रक्षा से जोड़कर देख रही है, जबकि मृत्युदंड की वापसी को लेकर मानवाधिकार संगठनों की चिंताएं सामने आई हैं।
बुर्किना फासो की अंतरिम संसद ने नए आपराधिक कानून को मंजूरी दी है। इसके तहत आतंकवाद, देशद्रोह और जासूसी जैसे गंभीर अपराधों के लिए मृत्युदंड का प्रावधान किया गया है। इस कानून के पक्ष में सभी 71 सांसदों ने मतदान किया।
इस फैसले के साथ ही 2018 में मृत्युदंड समाप्त करने की दिशा में उठाए गए कदम को पलट दिया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, देश में आखिरी बार फांसी दिए जाने का मामला 1988 का है। लंबे समय से मृत्युदंड पर अमल नहीं होने के बाद इसकी वापसी ने कानूनी और मानवाधिकार से जुड़ी बहस को फिर तेज कर दिया है।
मृत्युदंड की वापसी के साथ ही बुर्किना फासो की सरकार ने सौंदर्य प्रतियोगिताओं को लेकर भी सख्त कदम उठाया है। संचार, संस्कृति, कला और पर्यटन मंत्रालय ने देशभर में राष्ट्रीय और स्थानीय स्तर की ब्यूटी कॉन्टेस्ट आयोजित करने पर रोक लगा दी है।
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, इन प्रतियोगिताओं को देश की सांस्कृतिक पहचान, सामाजिक मूल्यों और मानवीय गरिमा के अनुरूप होना चाहिए। नए दिशा-निर्देश तैयार होने तक किसी भी नए आयोजन को मंजूरी नहीं दी जाएगी।
इस फैसले के बाद सौंदर्य प्रतियोगिताओं के आयोजन को लेकर अनिश्चितता पैदा हो गई है। हालांकि, सरकार की ओर से इसे सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण से जुड़ा कदम बताया जा रहा है।
ब्यूटी कॉन्टेस्ट पर रोक के बीच सरकार ने महिलाओं को शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में प्रोत्साहित करने के लिए एक राष्ट्रीय प्रतियोगिता भी शुरू की है। इसका नाम ‘हाकिली मूसो’ (HAKILI Mousso) रखा गया है।
इस पहल के तहत गणित, भौतिकी और रसायन विज्ञान जैसे विषयों में युवा महिलाओं की प्रतिभा को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। ऐसे में सरकार के फैसलों में एक ओर सौंदर्य प्रतियोगिताओं पर प्रतिबंध दिख रहा है, तो दूसरी ओर विज्ञान और शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करने की पहल भी सामने आई है।
बुर्किना फासो में सितंबर 2022 में तख्तापलट के बाद कैप्टन इब्राहिम ट्राओरे के नेतृत्व में सैन्य सरकार सत्ता में आई थी। उनके शासनकाल में देश के कानूनी और सामाजिक ढांचे में बदलाव किए जा रहे हैं।
सरकार इन कदमों को राष्ट्रीय संप्रभुता, सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान मजबूत करने के प्रयास के रूप में पेश कर रही है। वहीं, मृत्युदंड की वापसी को लेकर मानवाधिकार संगठनों ने चिंता जताई है।
बुर्किना फासो के न्याय मंत्री एडासो रोड्रिग बयाला ने मृत्युदंड की वापसी का बचाव करते हुए कहा है कि आतंकवाद से निपटने और राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत करने के लिए कठोर सजा जरूरी है।
हालांकि, इन फैसलों को लेकर विरोध और आलोचना भी सामने आई है। एक तरफ सरकार सुरक्षा और सांस्कृतिक मूल्यों को प्राथमिकता देने की बात कर रही है, तो दूसरी तरफ मृत्युदंड की बहाली मानवाधिकारों और न्याय व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर रही है। आने वाले समय में इन नए नियमों का देश के सामाजिक और कानूनी माहौल पर क्या असर पड़ता है, इस पर नजर रहेगी।
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