नई दिल्ली: घरेलू रसोई गैस सिलेंडर एक बार फिर महंगा हो गया है। रविवार से 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी लागू हो गई है। इससे पहले मार्च 2026 में भी सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़ाए गए थे। महज तीन महीनों में घरेलू गैस सिलेंडर 89 रुपये महंगा हो चुका है, जिससे आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ गया है।
कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर गैस सिलेंडर महंगा क्यों हो रहा है और क्या आने वाले समय में कीमतें और बढ़ सकती हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार घरेलू LPG की कीमतें सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार से प्रभावित होती हैं। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतें बढ़ती हैं तो उसका असर घरेलू बाजार पर भी पड़ता है।
हाल के महीनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों ने वैश्विक गैस बाजार को प्रभावित किया है। इससे LPG आयात की लागत बढ़ी है, जिसका असर घरेलू कीमतों पर दिखाई दे रहा है।
उद्योग से जुड़े सूत्रों के मुताबिक हालिया मूल्य वृद्धि से पहले सरकारी तेल कंपनियों को घरेलू LPG सिलेंडर बेचने पर भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था। बताया जा रहा है कि प्रति सिलेंडर सैकड़ों रुपये तक का घाटा हो रहा था।
तेल कंपनियों का कहना है कि लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय कीमतों का बोझ खुद उठाना संभव नहीं होता। यदि लगातार घाटे में बिक्री जारी रखी जाए तो ईंधन आयात और आपूर्ति व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।
घरेलू सिलेंडर ही नहीं, पिछले कुछ महीनों में कमर्शियल LPG सिलेंडरों की कीमतों में भी कई बार बढ़ोतरी की जा चुकी है। 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर के दामों में लगातार संशोधन हुआ है, जबकि 5 किलोग्राम वाले छोटे सिलेंडर की कीमत भी बढ़ाई गई है।
इससे होटल, रेस्तरां और छोटे व्यवसायों की लागत भी बढ़ रही है।
मार्च 2026 में घरेलू LPG सिलेंडर 60 रुपये महंगा हुआ था। अब जून में 29 रुपये की नई बढ़ोतरी के बाद कुल वृद्धि 89 रुपये तक पहुंच गई है।
दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाला घरेलू सिलेंडर अब 942 रुपये का हो गया है, जबकि मार्च से पहले इसकी कीमत 853 रुपये थी।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि भविष्य की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति पर निर्भर करेंगी। यदि वैश्विक गैस और कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो तेल कंपनियों पर दबाव जारी रह सकता है।
कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि कंपनियों का घाटा पूरी तरह कम नहीं होता तो आने वाले महीनों में छोटी-छोटी किस्तों में कीमतों में और संशोधन किया जा सकता है। हालांकि इस संबंध में सरकार या तेल कंपनियों की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आती है, आपूर्ति बाधाएं कम होती हैं और अंतरराष्ट्रीय कीमतों में नरमी आती है तो घरेलू LPG की कीमतों पर दबाव घट सकता है। ऐसे में भविष्य में राहत मिलने की संभावना बन सकती है।
फिलहाल उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई कीमतों के साथ ही गैस सिलेंडर खरीदना होगा और आगे की स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजार के रुख पर निर्भर करेगी।
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