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लद्दाख हिंसा में मारे गए लोगों में कारगिल युद्ध में शामिल त्सेवांग की भी मौत, पिता बोले-“पाकिस्तानी ना मार सके, अपनी ही फोर्स ने मार दिया”

news desk
Last updated: September 29, 2025 6:44 pm
news desk
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लद्दाख हिंसा में मारे गये पूर्व सैनिक त्सेवांग थारचिन
लद्दाख हिंसा में मारे गये पूर्व सैनिक त्सेवांग थारचिन
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लद्दाख के लेह इलाके में हाल ही में हुए प्रदर्शन के दौरान हुई फायरिंग में कारगिल युद्ध के पूर्व सैनिक त्सेवांग थारचिन की मौत ने पूरे देश में हलचल मचा दी है.कांग्रेस पार्टी ने इस घटना को लेकर कड़ी नाराज़गी जताई है और इसे “गंभीर चिंता और गुस्से का विषय” करार दिया है.

लद्दाख त्सेवांग थारचिन के 1996 से 2017 तक लद्दाख स्काउट्स में हवलदार रहे और Kargil War में हिस्सा लिया था. उन्होंने द्रास के दह टॉप और तोलोलिंग सेक्टर में पाकिस्तानी घुसपैठियों से लोहा लिया था.
त्सेवांग थारचिन सिर्फ़ एक सैनिक नहीं थे — वे दूसरी पीढ़ी के योद्धा थे. उनके पिता स्तानजिन नामग्याल भी कारगिल युद्ध लड़ चुके हैं. 2002 में वे सूबेदार मेजर और मानद कैप्टन के पद से रिटायर हुए थे. बेटे की मौत के बाद टूटे स्वर में उन्होंने कहा,- “मेरा बेटा देशभक्त था. पाकिस्तानी मार ना सके, हमारी ही फोर्स ने मार दिया. क्या हमारे जैसे देशभक्तों के साथ ऐसा बर्ताव होना चाहिए?”

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता जयराम रमेश ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए लिखा कि:”थारचिन ने सियाचिन की बर्फीली चोटियों पर देश की सेवा की थी और 1999 के कारगिल युद्ध में साहसिक भूमिका निभाई थी। उनके पिता भी भारतीय सेना के सिपाही रह चुके हैं.”
उन्होंने बताया कि त्सेवांग थारचिन लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के अंतर्गत लाने की माँग को लेकर शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे थे.जयराम रमेश ने आगे कहा,”यह बेहद दुखद और शर्मनाक है कि ऐसे सिपाही, जो देश के लिए लड़े, उन्हें अपनी ही जमीन पर विरोध की आवाज़ उठाने पर गोली का सामना करना पड़ा.”

प्रदर्शन,और पुलिस कार्रवाई

24 सितंबर को लेह शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया था, जब लेह एपेक्स बॉडी (LAB) द्वारा बुलाए गए बंद के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव हो गया.
LAB लंबे समय से लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची के तहत संवैधानिक सुरक्षा की माँग को लेकर आंदोलन चला रही है.
उसी दिन की झड़पों में 150 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे, जिनमें करीब 80 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं.
अब तक 60 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिनमें दो निर्वाचित प्रतिनिधि (पार्षद) भी शामिल हैं.

सोनम वांगचुक को NSA में हिरासत

26 सितंबर को लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को भी राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत गिरफ्तार कर लिया गया.बाद में उन्हें जोधपुर जेल में भेज दिया गया है.वांगचुक पिछले कई महीनों से शांतिपूर्ण ढंग से लद्दाख के मुद्दों को उठाते आ रहे थे और उनका नाम इस आंदोलन का एक प्रमुख चेहरा बन चुका था.

कांग्रेस की सख्त मांग:कांग्रेस पार्टी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि:
शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करने वाले लोगों पर बल प्रयोग और गोलीबारी पूरी तरह लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है.ऐसी घटनाओं की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच होनी चाहिए ताकि दोषियों को जवाबदेह ठहराया जा सके.

जयराम रमेश ने यह भी कहा कि:”एक सच्चा लोकतंत्र वही है जो असहमति की आवाज़ को सुने-न कि उसे गोली से चुप कराए”.

लद्दाख की यह घटना केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि लोकतंत्र, अधिकार और संवैधानिक मांगों के टकराव की कहानी बन गई है.एक ऐसा सैनिक जिसने दुश्मनों के खिलाफ देश की रक्षा की, उसे अपने ही घर में विरोध जताने पर जान गंवानी पड़ी,यह हर भारतीय के लिए सोचने का विषय है.

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