भोपाल/नई दिल्ली, 13 अप्रैल 2026 — खेतों में रात के अंधेरे में काम करने वाले किसानों के लिए एक बड़ी राहत वाली तकनीक सामने आई है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘किसान मित्र छड़ी’ लॉन्च की है, जो देखने में सामान्य लाठी जैसी लगती है, लेकिन काम किसी स्मार्ट सुरक्षा डिवाइस से कम नहीं करती। यह छड़ी सांप, बिच्छू और दूसरे जहरीले जीवों को पहले ही सतर्क कर दूर भगाने में मदद करती है, ताकि किसान सुरक्षित तरीके से सिंचाई या दूसरे खेत के काम कर सकें। खास बात यह है कि इसमें वाइब्रेशन सिस्टम और सोलर टॉर्च दोनों लगे हैं, जिससे यह रात में और भी उपयोगी बन जाती है।
कैसे काम करती है किसान मित्र छड़ी
यह स्मार्ट छड़ी जमीन पर टेकते ही एक्टिव हो जाती है। इसमें लगा वाइब्रेशन मोटर जमीन के जरिए कंपन पैदा करता है। सांप और बिच्छू जैसे जीव इन कंपन को बहुत जल्दी महसूस कर लेते हैं और खतरा समझकर दूसरी दिशा में हट जाते हैं। यही वजह है कि किसान के पैर के नीचे उनके आने का खतरा काफी कम हो जाता है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इसका असर करीब 100 मीटर तक हो सकता है, जिससे खेत में पहले से ही एक सुरक्षा घेरा बन जाता है।
इसके साथ लगी हाई-पावर सोलर टॉर्च रात के समय खेतों में रास्ता साफ दिखाती है। इससे किसान अंधेरे में भी आसानी से पानी देने, मोटर देखने या फसल का निरीक्षण करने जा सकते हैं। यह बैटरी और सोलर दोनों पावर पर चलने वाला पोर्टेबल डिवाइस है, इसलिए इसे बार-बार चार्ज करने की झंझट भी कम रहती है।
किसानों के लिए सुरक्षा कवच जैसी नई तकनीक
शिवराज सिंह चौहान ने इस डिवाइस को किसानों के लिए “सुरक्षा कवच” बताया। उन्होंने कहा कि रात में खेतों में सिंचाई के दौरान सांप काटने की घटनाएं अक्सर सामने आती हैं और यह छड़ी ऐसे हादसों को काफी हद तक रोक सकती है। भारत में हर साल खासकर मानसून के दौरान हजारों किसान और ग्रामीण सांप के काटने का शिकार होते हैं, ऐसे में यह तकनीक काफी उपयोगी मानी जा रही है।
इस छड़ी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह जहरीले जीवों को मारे बिना दूर भगाने में मदद करती है। यानी किसानों की सुरक्षा के साथ पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण का भी ध्यान रखा गया है। आसान, किफायती और पोर्टेबल डिजाइन की वजह से इसे छोटे किसानों के लिए भी उपयोगी माना जा रहा है। फिलहाल इसे कृषि मेलों और सरकारी योजनाओं के जरिए उपलब्ध कराया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसका बड़े स्तर पर इस्तेमाल शुरू हुआ, तो यह किसानों के लिए रात के कामों में गेमचेंजर साबित हो सकती है।