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सोनम वांगचुक का जंतर-मंतर से PM मोदी को सीधा संदेश कहा – “पेपर से लेकर वोट सब बिकाऊ”

देश की एजुकेशन और एग्जामिनेशन प्रणाली में सुधारों की मांग को लेकर दिल्ली का जंतर-मंतर एक बार फिर बड़े आंदोलन का केंद्र बन गया है। जाने-माने शिक्षाविद और क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक पिछले 17 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं। NEET जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुए इस आंदोलन से वांगचुक 28 जून को जुड़े थे, और तब से उनका अनशन लगातार जारी है।

हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में वांगचुक ने देश के मौजूदा हालात और सरकार के रवैये पर तीखे सवाल उठाए हैं।

“पेपर से लेकर वोट तक सब बिकाऊ है”

आंदोलन के मंच से सोनम वांगचुक ने देश की नैतिक स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, “आज देश में ईमानदारी की कोई वैल्यू नहीं रह गई है। हर चीज बेईमानी के भरोसे चल रही है। एग्जाम के पेपर लीक होने से लेकर जनता के वोट तक, आज सब कुछ बिकाऊ हो चुका है।”

उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर आज हम नकल और धांधली से पास होने वाले डॉक्टर्स और इंजीनियर्स तैयार करेंगे, तो भविष्य में ये देश के लिए एक बड़ा खतरा साबित होंगे।

“अड़ियलपन नहीं, करुणा की जरूरत”

सोनम वांगचुक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सीधे संबोधित करते हुए एक खास मैसेज दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार को अपना अड़ियल रवैया छोड़ना चाहिए।

“लोकतंत्र कठोरता से नहीं, बल्कि करुणा, सहानुभूति और जनता की आवाज सुनने से चलता है। लोगों की बात सुनना और उनके मुद्दों को समझना लंबे समय में सरकार के ही फायदे में होता है।”

केवल इस्तीफे से नहीं, संसद में चर्चा से निकलेगा हल

यह आंदोलन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले हो रहा है, जो पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है। जब वांगचुक से पूछा गया कि क्या सिर्फ एक इस्तीफे से यह बड़ी समस्या हल हो जाएगी? तो उन्होंने बेहद प्रैक्टिकल जवाब दिया:

इस्तीफा देने से समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी, लेकिन इससे सरकार की जवाबदेही तय होगी, जो कि बेहद जरूरी है। वांगचुक ने मांग की है कि संसद के आगामी मानसून सत्र में शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधारों को लेकर व्यापक चर्चा होनी चाहिए। इस पॉलिसी-मेकिंग और सुधारों के ब्लूप्रिंट में देश के युवाओं और एजुकेटर्स को भी शामिल किया जाना चाहिए।

आंदोलन ‘नॉन-पॉलिटिकल’, सभी दलों को न्योता

सोशल मीडिया पर मिल रहे भारी सपोर्ट के बीच वांगचुक ने साफ किया कि इस मंच का कोई राजनीतिक रंग नहीं है। यह युवाओं के भविष्य से जुड़ा एक गंभीर सामाजिक मुद्दा है। उन्होंने राहुल गांधी और अखिलेश यादव समेत सभी राजनीतिक दलों के नेताओं से अपील की है कि वे अपनी राजनीति से ऊपर उठकर इस आंदोलन का समर्थन करें।

सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर दिल्ली सरकार की मंत्री आतिशी समेत कई नेताओं ने चिंता जताई है, लेकिन वांगचुक का हौसला अब भी बुलंद है। अब देखना यह है कि क्या सरकार इस आंदोलन के बाद बातचीत की मेज पर आती है, या फिर यह गतिरोध आगे भी जारी रहता है।

news desk

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