Trending News

स्टडी टूर या सियासी मैनेजमेंट? स्टडी टूर के बीच Siddaramaiah और D. K. के सत्ता संघर्ष ने बढ़ाई कांग्रेस की टेंशन !

बंगलौर: कर्नाटक कांग्रेस में इन दिनों सियासी तापमान काफी हाई चल रहा है। 2023 विधानसभा चुनाव में 135 सीटें जीतकर शानदार बहुमत से सरकार बनाने वाली पार्टी अब अंदरूनी खींचतान से जूझती दिख रही है। मामला है मुख्यमंत्री की कुर्सी का — और टकराव सीधा-सीधा सिद्धारमैया और उप-मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के बीच माना जा रहा है।

चुनाव के बाद से ही शिवकुमार खेमे का दावा रहा है कि ढाई साल बाद नेतृत्व परिवर्तन होगा और उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। लेकिन सिद्धारमैया समर्थक इस तरह के किसी “रोटेशन फॉर्मूला” से साफ इनकार करते रहे हैं। यही वजह है कि सत्ता साझेदारी को लेकर सस्पेंस और सियासी बयानबाज़ी लगातार जारी है।

हाल ही में डीके शिवकुमार ने दावा किया कि उनके पास सभी 136 विधायकों का समर्थन है। खबरें थीं कि वे विधायकों की बैठक बुलाकर शक्ति प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने दिल्ली जाकर पार्टी हाईकमान से भी मुलाकात की, जहां राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से चर्चा हुई। हालांकि, नेतृत्व परिवर्तन पर कोई ठोस फैसला सामने नहीं आया। डीके ने फिलहाल इतना ही कहा कि “धैर्य का फल मीठा होता है” और वे हाईकमान के फैसले का सम्मान करेंगे।

उधर, सिद्धारमैया ने अलग ही चाल चली है। उनके करीबी 20-24 विधायक 16 फरवरी से ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के ‘स्टडी टूर’ पर जा रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे रिसॉर्ट पॉलिटिक्स के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है — यानी विधायकों को एकजुट रखना और किसी भी तरह की टूट-फूट से बचाना। मुख्यमंत्री का कहना है कि विधायकों को घूमने-फिरने का हक है और इसमें कोई गलत बात नहीं है। उनके बेटे यथिंद्रा ने भी दावा किया है कि सिद्धारमैया पूरे पांच साल मुख्यमंत्री रहेंगे।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं के बयान भी सुर्खियों में हैं। गृह मंत्री जी. परमेश्वर ने नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा बंद करने की सलाह दी है, जबकि सामाजिक कल्याण मंत्री एचसी महादेवप्पा का बयान तो और ज्यादा विवादित रहा। वहीं कांग्रेस विधायक बीके हरिप्रसाद ने डीके शिवकुमार को “रेलवे इंजन” बताते हुए तंज कसा।

दिलचस्प बात यह है कि यह सियासी घमासान उस वक्त सामने आया है जब सरकार अपने 1000 दिन पूरे होने का जश्न मना रही है। विकास और गारंटी योजनाओं की चर्चा से ज्यादा फोकस अंदरूनी राजनीति पर है। फिलहाल हाईकमान की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि बजट सत्र के बाद तस्वीर कुछ साफ हो सकती है।

अब देखना यह है कि कांग्रेस इस अंदरूनी कलह को कैसे संभालती है — क्योंकि आने वाले चुनावों से पहले एकजुटता बनाए रखना उसके लिए बेहद अहम होगा।

news desk

Recent Posts

Instagram पर बच्चों से जुड़े ऑफेंसिव ऐड्स को लेकर भारत सरकार ने Meta को भेजा समन! WhatsApp को लेकर भी बढ़ा सस्पेंस

सोशल मीडिया दिग्गज मेटा “Meta” की मुश्किलें भारत में बढ़ती नजर आ रही हैं। भारत…

5 hours ago

स्मार्ट इनवेस्टर्स की पहली पसंद बना Cera Sanitaryware! दमदार रिटर्न के साथ बंपर डिविडेंड देने का अनाउंसमेंट, देखें पूरी डिटेल

शेयर बाजार में धमाल मचाने वाली कंपनी Cera Sanitaryware ने अपने इनवेस्टर्स की चांदी कर…

6 hours ago

मार्केट में तेजी की हैट्रिक! आईटी बूम और क्रूड की नरमी से सेंसेक्स 77,763 पर बंद, निफ्टी ने भी पकड़ी रफ्तार

भारतीय शेयर बाजार इस समय फुल-ऑन एक्शन मोड में है। ग्लोबल मार्केट के प्रेशर और…

6 hours ago

22 रुपए की राइड के बाद तीन फाउंडर्स पर FIR! आखिर नागपुर RTO के ‘स्टिंग ऑपरेशन’ में कैसे फंसा रैपिडो

भारत के मशहूर बाइक टैक्सी स्टार्टअप Rapido की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ…

7 hours ago

पंजाब कांग्रेस में ‘महाभारत’!  राजा वड़िंग की ताजपोशी से भड़के चन्नी, 60 नेताओं ने दिया इस्तीफा, शाह से मिले रंधावा

पंजाब विधानसभा चुनावों से ठीक पहले पंजाब कांग्रेस के भीतर अंदरूनी कलह का एक बड़ा…

9 hours ago

‘नो-पॉकेट’ ड्रेस कोड और फर्श पर पहरा! राम मंदिर में दान की गिनती के बदले नियम, चोरी के खुलासे के बाद प्रशासन का कड़ा एक्शन

राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की राशि की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर प्रशासन ने…

9 hours ago