चमत्कार और अंधविश्वास की आड़ में जनता की आस्था से खिलवाड़ करने वाले संतों के एक गुट का असली चेहरा एक बार फिर बेनकाब हुआ है। कानपुर देहात के देवराहट थाना क्षेत्र में ‘पानी की बोतल में फूंक मारकर’ गंभीर से गंभीर बीमारियां ठीक करने का दावा करने वाले ‘बोतल बाबा’ उर्फ हरिओम यादव के खिलाफ पुलिस ने सामूहिक शिकंजा कसा है। एक पीड़ित महिला की शिकायत पर पुलिस ने बाबा समेत कुल 10 लोगों के खिलाफ दुष्कर्म के प्रयास, हत्या के प्रयास और हजारों रुपये की ठगी जैसी संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
यह पूरा मामला औरैया जिले की रहने वाली एक महिला की शिकायत के बाद सामने आया है। पीड़ित महिला के मुताबिक, वह अपने परिवार की परेशानी और बीमारी से निजात पाने के लिए ‘चैन के पुरवा’ गांव स्थित बाबा के आश्रम पहुंची थी। वहां बाबा और उसके सेवादारों ने महिला को डराया कि उसके परिवार पर भारी संकट और भूत-प्रेत का साया है। संकट टालने और चमत्कारिक पानी देने के बदले में महिला से 40,000 रुपए ऐंठ लिए गए।
जब पैसे देने के बाद भी कोई राहत नहीं मिली, तो पीड़ित महिला अपने पैसे वापस मांगने और शिकायत करने दोबारा आश्रम पहुंची। आरोप है कि अकेलापन का फायदा उठाकर ‘बोतल बाबा’ ने महिला के साथ अश्लील हरकतें कीं और उसके साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया।
महिला ने जब इस करतूत का विरोध किया और शोर मचाया, तो आश्रम में मौजूद बाबा के गुर्गे और सेवादार एक्टिव हो गए। महिला के साथ आए परिजनों और मददगारों ने जब बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो बाबा के सेवादारों ने उन पर लाठी-डंडों से जानलेवा हमला कर दिया। पीड़ितों को बंधक बनाने और जान से मारने की नियत से प्रहार किया गया, जिसके बाद किसी तरह जान बचाकर पीड़ित पक्ष ने पुलिस की शरण ली।
गौरतलब है कि ‘बोतल बाबा’ पिछले कुछ समय से सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर भारी चर्चा में था। बाबा का दावा था कि वह पानी की साधारण बोतल में फूंक मारकर उसे ‘दिव्य और चमत्कारी’ बना देता है। इस पानी को पीने से कैंसर, टीबी, लिवर की बीमारियां और ऊपरी हवा के चक्कर पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। इसी झूठे प्रचार के झांसे में आकर हर रोज हजारों की संख्या में भोले-भाले लोग, महिलाएं और गंभीर मरीज अपनी जमापूंजी लेकर इस आश्रम के चक्कर काट रहे थे।
नामजद, सिंडिकेट खंगालने में जुटी टीम
देवराहट थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य आरोपी हरिओम यादव उर्फ बोतल बाबा सहित उसके सिंडिकेट के 10 मुख्य सेवादारों के खिलाफ नामजद और कई अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस ने साफ किया है कि अंधविश्वास फैलाकर लोगों का आर्थिक और शारीरिक शोषण करने वाले इस पूरे नेटवर्क को ख़त्म किया जाएगा। फिलहाल पुलिस फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए ख़ोज कर रही है और आश्रम में होने वाली गतिविधियों पर भी कड़ा पहरा बैठा दिया गया है।
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