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K Annamalai Political Comeback: बीजेपी से अलग राह ? अमित शाह से मुलाकात के बीच अन्नामलाई के ‘मक्कल शक्ति इयक्कम’ ने बढ़ाई हलचल

चेन्नई/दिल्ली। तमिलनाडु की सियासत में इस समय एक ही सवाल हर राजनीतिक गलियारे में गूंज रहा है-क्या ‘सिंघम’ के नाम से मशहूर के. अन्नामलाई (K Annamalai) एक नए और बेहद आक्रामक अवतार में वापसी करने जा रहे हैं?

बिना कोई चुनाव जीते भी राज्य की राजनीति का केंद्र बने रहने वाले पूर्व आईपीएस अधिकारी अन्नामलाई का अचानक दिल्ली दौरा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संभावित मुलाकात ने कयासों के बाजार को बेहद गर्म कर दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु का यह कद्दावर नेता अब अपनी एक स्वतंत्र और नई राजनीतिक पहचान गढ़ने की तैयारी में है।

अमित शाह से मुलाकात और ‘मक्कल शक्ति इयक्कम’ का सस्पेंस

मंगलवार को दिल्ली रवाना होने से पहले जब मीडिया ने अन्नामलाई से उनके अगले कदम को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने बेहद सस्पेंस भरा जवाब दिया:

“बस दो दिन का इंतजार कीजिए, फिर इस पर खुलकर बैठकर बात करेंगे।”

सूत्रों से मिली इनसाइड स्टोरी के मुताबिक, अन्नामलाई बीजेपी की पारंपरिक सांगठनिक संरचना से अलग हटकर सीधे जनता और युवाओं को जोड़ने के लिए एक नए जनआंदोलन आधारित संगठन की रूपरेखा तैयार कर चुके हैं। अंदरूनी सूत्रों का दावा है कि इस नए संगठन का संभावित नाम ‘मक्कल शक्ति इयक्कम’ (Peoples Power Movement) हो सकता है। यह संगठन उन्हें पारंपरिक पार्टी सीमाओं से परे एक स्वतंत्र और मजबूत राजनीतिक चेहरा बनाने में मदद करेगा।

बिना चुनावी जीत के भी अन्नामलाई कैसे बने तमिलनाडु के ‘पोस्टर बॉय’?

आमतौर पर किसी भी नेता की ताकत उसकी जीती हुई सीटों और चुनावी सफलता से तय होती है, लेकिन अन्नामलाई का मामला बिल्कुल जुदा है:

  • चुनावी हार का सिलसिला: वह 2021 का विधानसभा चुनाव (अरावाकुरिची सीट) हारे, 2024 का लोकसभा चुनाव (कोयंबटूर सीट) हारे और 2026 के हालिया विधानसभा चुनाव में तो उम्मीदवार तक नहीं बने।
  • फिर भी लोकप्रियता बरकरार: चुनाव हारने के बाद भी वह राज्य में लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। उनकी ताकत उनके चुनावी आंकड़े नहीं, बल्कि उनकी बेदाग प्रशासनिक छवि, भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख और आक्रामक राजनीतिक शैली है।

राजनीति में आने से पहले कर्नाटक कैडर के इस दबंग आईपीएस अधिकारी ने उडुपी और बेंगलुरु में अपनी सख्त पुलिसिंग से ‘सिंघम’ की पहचान बनाई थी, जो आज भी युवाओं के बीच उनके बड़े आकर्षण की वजह है।

‘एन मन्न, एन मक्कल’ यात्रा और AIADMK से वो ऐतिहासिक टकराव

अन्नामलाई ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले 168 दिनों की ‘एन मन्न, एन मक्कल’ (मेरी माटी, मेरे लोग) पदयात्रा निकाली थी, जिसने सूबे की सभी 234 विधानसभा सीटों को कवर किया था। इस यात्रा के समापन पर खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी जमकर तारीफ की थी। हालांकि यह यात्रा वोटों में तब्दील नहीं हो सकी, लेकिन इसने राज्य में बीजेपी के वोट शेयर को ऐतिहासिक मजबूती दी।

लेकिन, अन्नामलाई के करियर का सबसे विवादित मोड़ तब आया जब उनका द्रविड़ियन दिग्गज AIADMK के साथ सीधा टकराव हुआ। उनकी आक्रामक बयानबाजी के चलते 2023 में बीजेपी-AIADMK का गठबंधन टूट गया। आलोचकों का मानना है कि इस बिखराव की वजह से विपक्षी वोट बंट गए और नतीजा यह हुआ कि 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी एक भी सीट नहीं जीत सकी।

बदले हुए सियासी समीकरण में अवसर और चुनौतियां

तमिलनाडु का राजनीतिक परिदृश्य पिछले कुछ महीनों में 180 डिग्री बदल चुका है। अभिनेता से नेता बने सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने अपने पहले ही विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड 108 सीटें जीतकर सत्तारूढ़ डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) के दशकों पुराने एकाधिकार को ध्वस्त कर दिया है।

इस नए राजनीतिक परिदृश्य ने अन्नामलाई के सामने दो बड़ी स्थितियां पैदा कर दी हैं:

  1. कड़ी चुनौती: जिस युवा और बदलाव चाहने वाले वोट बैंक पर अन्नामलाई नजर गड़ाए हुए थे, उस जमीन पर अब सीधे तौर पर सीएम विजय की पार्टी ‘TVK’ का कब्जा हो चुका है।
  2. बड़ा अवसर: राज्य की सियासत में पहली बार ऐसा कूटनीतिक शून्य (Political Vacuum) बना है, जहां पारंपरिक द्रविड़ियन राजनीति से अलग हटकर नए चेहरों और नए प्रयोगों के लिए जनता खुले दिल से तैयार दिख रही है।

41 वर्ष के युवा और ऊर्जावान नेता अन्नामलाई के पास खोने के लिए कुछ नहीं है और पाने के लिए पूरा आसमान बाकी है। अब देखना यह होगा कि दिल्ली में होने वाली इस हाई-प्रोफाइल बैठक के बाद वह बीजेपी के भीतर रहकर ही कोई बड़ा धमाका करते हैं या ‘मक्कल शक्ति इयक्कम’ के जरिए तमिलनाडु की त्रिकोणीय जंग को चतुष्कोणीय मुकाबले में बदल देते हैं।

news desk

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