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‘बस कुछ सेकंड और…’, सत्य निकेतन हादसे में कैसे बच गईं कई जिंदगियां? चश्मदीदों ने सुनाई उस खौफनाक पल की पूरी कहानी

नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत के अचानक भरभराकर गिरने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। छात्रों से भरे रहने वाले इस पीजी की जगह कुछ ही पलों में मलबे का ढेर दिखाई देने लगा। हादसे के बाद अब इलाके की पुरानी इमारतों, बेसमेंट में चल रहे निर्माण और पीजी के तौर पर इस्तेमाल हो रही संपत्तियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। चश्मदीदों ने बताया कि हादसे से ठीक पहले वहां क्या हो रहा था और किस तरह कुछ लोग महज कुछ सेकंड के अंतर से मलबे की चपेट में आने से बच गए।

जमीन हिलने जैसा महसूस हुआ, फिर भरभराकर गिरी इमारत

स्थानीय निवासी राजेन छेत्री के मुताबिक, इमारत में करीब 15 कमरे थे और हर कमरे में दो से तीन छात्र रहते थे। एक अन्य स्थानीय निवासी ने बताया कि अचानक हल्का झटका महसूस हुआ। उन्हें ऐसा लगा जैसे जमीन हिल गई हो और भूकंप आ गया हो।

इसके बाद लोग अपने घरों से बाहर निकलकर सड़क पर आए तो सामने इमारत का मलबा बिखरा पड़ा था। छात्रों के रहने वाली पूरी इमारत देखते ही देखते ढह चुकी थी।

मदद के लिए प्रशासन का इंतजार नहीं, खुद मलबा हटाने लगे लोग

एक चश्मदीद के मुताबिक, हादसा होते ही आसपास के लोग बाहर भागे और अंदर फंसे लोगों को निकालने की कोशिश शुरू कर दी। उनका दावा है कि शुरुआत में तत्काल कोई व्यवस्था नजर नहीं आई तो स्थानीय लोगों ने खुद भारी कंक्रीट के स्लैब हटाने और मलबे में फंसे लोगों की तलाश शुरू की।

चश्मदीद ने यह भी दावा किया कि बगल की इमारत भी सुरक्षित नहीं लग रही थी और वह कुछ झुकी हुई दिखाई दे रही थी। ऐसे में आसपास रहने वाले लोगों में भी डर का माहौल बन गया।

‘कुछ सेकंड का मामला था’, बाल-बाल बचा छात्र

एक स्थानीय निवासी ने बताया कि इमारत गिरने के समय ऊपरी मंजिलों पर करीब 35 से 40 छात्र मौजूद थे। इनमें कुछ उस वक्त सो रहे थे। उनका दावा है कि बेसमेंट में काम चल रहा था और इमारत गिरने से कुछ मिनट पहले ही वह वहां से बाहर निकल पाए थे। इस दौरान उन्हें चोट भी लगी।

एक अन्य चश्मदीद ने बताया कि जैसे ही वह इमारत से बाहर निकले, उसके तुरंत बाद पूरी बिल्डिंग ढह गई। एक स्थानीय निवासी के मुताबिक, उसका भतीजा भी हादसे से कुछ क्षण पहले बाइक से वहां से निकला था। उसके गुजरने के तुरंत बाद तेज आवाज के साथ इमारत गिर गई। परिवार के मुताबिक, उसने बाद में कहा कि यह पूरा घटनाक्रम महज कुछ सेकंड का था।

रविवार की वजह से पीजी में ज्यादा छात्र मौजूद थे

स्थानीय लोगों के मुताबिक, रविवार होने के कारण कई छात्र कॉलेज नहीं गए थे और पीजी में ही मौजूद थे। एक स्थानीय निवासी ने दावा किया कि मलबे में फंसे कई छात्रों के केरल से होने की आशंका है।

प्रियंका नाम की स्थानीय निवासी ने बताया कि इलाके में पांच से छह मंजिल तक की इमारतें बनी हुई हैं। उनके मुताबिक, इलाके में नालियां और सीवर भी खुले हैं। उन्होंने बताया कि बारिश के कारण ज्यादातर छात्र अपने कमरों में थे, जबकि कुछ छात्र सप्ताहांत के चलते अपने घर गए हुए थे।

पुरानी इमारतों पर उठे सवाल, बेसमेंट निर्माण की भी जांच की मांग

हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने इलाके की पुरानी इमारतों की संरचनात्मक जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि इस आवासीय इलाके में बेसमेंट के साथ पांच मंजिला इमारतें भी बनाई गई हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इन इमारतों के निर्माण और उनमें किए जा रहे बदलावों के लिए जरूरी अनुमति और सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे के बाद सिर्फ एक इमारत की जांच पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि आसपास की ऐसी सभी इमारतों की संरचनात्मक स्थिति की जांच होनी चाहिए, जहां बड़ी संख्या में छात्र रह रहे हैं।

vineet verma

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