सागर: मध्य प्रदेश के सागर जिले में कथित जहरीली शराब पीने से 12 लोगों की मौत के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है। शुरुआती पड़ताल में शराब की सप्लाई का तार उत्तर प्रदेश के ललितपुर में सक्रिय एक गिरोह से जुड़ता नजर आ रहा है। आरोप है कि यह गिरोह मध्य प्रदेश में बिकने वाले शराब ब्रांड की नकल कर नकली देशी शराब तैयार करता था और फिर उसकी सप्लाई करता था।
हादसे के बाद कई अन्य लोग भी अस्पताल में भर्ती हैं। इन लोगों ने शनिवार रात सागर जिले में कथित तौर पर यही अवैध शराब पी थी। पुलिस के मुताबिक, पीड़ितों में ज्यादातर लोग बांदा थाना क्षेत्र के नौराज और गोगरा गांव के रहने वाले हैं। रविवार तड़के से ही गंभीर रूप से बीमार लोगों को अस्पताल पहुंचाने का सिलसिला शुरू हो गया था।
सागर के पुलिस अधीक्षक अनुराग सुजानिया के मुताबिक, शुरुआती जांच में मौतों के लिए जिम्मेदार पदार्थ की पहचान देशी शराब के तौर पर हुई है। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस का ध्यान ललितपुर में सक्रिय उस गिरोह की ओर गया है, जिसके खिलाफ पहले भी नकली शराब तैयार करने और उसकी सप्लाई करने के आरोप में कानूनी कार्रवाई हो चुकी है।
पुलिस को आशंका है कि मध्य प्रदेश में बिकने वाले किसी शराब ब्रांड की नकल कर तैयार की गई नकली शराब इसी नेटवर्क के जरिए सागर तक पहुंचाई गई हो सकती है। अब जांच का फोकस शराब के असली स्रोत और उसके सागर तक पहुंचने की पूरी कड़ी का पता लगाने पर है।
हादसे के बाद प्रशासन ने आबकारी विभाग के अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी है। मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने बताया कि आधिकारिक जानकारी के मुताबिक घटना में करीब 11 से 12 लोगों की मौत हुई है। मामले में तीन अधिकारियों को निलंबित किया गया है।
उप आबकारी आयुक्त को भी व्यापक जांच पूरी होने तक विभाग के मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया है। शुरुआती जांच में आबकारी विभाग के स्तर पर लापरवाही की आशंका सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई है।
सरकार ने संबंधित शराब लाइसेंसधारी की भूमिका की भी विशेष रूप से जांच करने के निर्देश दिए हैं। जांच में उसकी जिम्मेदारी सामने आने पर उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित अवैध शराब कहां से आई, इसे किसने खरीदा और किसके जरिए प्रभावित गांवों तक पहुंची। पूछताछ के लिए करीब 10 लोगों को हिरासत में लिया गया है।
जांचकर्ता शराब की सप्लाई और वितरण से जुड़े लोगों की पहचान करने में जुटे हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि कहीं प्रशासनिक स्तर पर ऐसी कोई चूक तो नहीं हुई, जिसकी वजह से अवैध शराब प्रभावित इलाकों तक पहुंच गई।
एसपी अनुराग सुजानिया के मुताबिक, अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी आबकारी विभाग के साथ पुलिस की भी है। इसलिए जांच में यह भी देखा जाएगा कि आखिर किस स्तर पर कमी या लापरवाही हुई।
इस बीच शराब को लेकर मध्य प्रदेश में सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के एक बयान को लेकर विवाद खड़ा हुआ है। उन्होंने दावा किया कि मध्य प्रदेश में महिलाएं देश के किसी भी अन्य स्थान की तुलना में ज्यादा शराब पीती हैं।
उनके इस बयान पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सवाल उठाए और कहा कि महिलाओं के लिए ऐसी स्थिति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सागर शराब त्रासदी के बीच यह बयान भी राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है।
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