Sign In
  • My Bookmarks
Indian Press House
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • झारखंड
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • सेहत
  • अन्य
Reading: मंगल के चंद्रमा से मिट्टी लाएगा जापान, खुलेगा सौरमंडल का बड़ा रहस्य! जानिए क्या है MMX मिशन
Share
Indian Press HouseIndian Press House
Font ResizerAa
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
Search
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
    • उत्तर प्रदेश
    • मध्य प्रदेश
    • पंजाब
    • हरियाणा
    • झारखंड
    • छत्तीसगढ़
    • राजस्थान
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
    • सेहत
  • अन्य
Have an existing account? Sign In
Follow US
© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.
Indian Press House > Blog > Trending News > मंगल के चंद्रमा से मिट्टी लाएगा जापान, खुलेगा सौरमंडल का बड़ा रहस्य! जानिए क्या है MMX मिशन
Trending Newsवर्ल्ड

मंगल के चंद्रमा से मिट्टी लाएगा जापान, खुलेगा सौरमंडल का बड़ा रहस्य! जानिए क्या है MMX मिशन

vineet verma
Last updated: October 19, 2026 9:15 pm
vineet verma
Share
SHARE

नई दिल्ली: अंतरिक्ष विज्ञान की दुनिया में जापान एक महत्वाकांक्षी अभियान की तैयारी कर रहा है। जापान की अंतरिक्ष एजेंसी जेएएक्सए (JAXA) मंगल ग्रह के चंद्रमा फोबोस से मिट्टी के नमूने जुटाकर उन्हें पृथ्वी पर लाने की योजना पर काम कर रही है। इस अभियान का नाम मार्टियन मून्स एक्सप्लोरेशन (MMX) है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इन नमूनों के अध्ययन से मंगल के दोनों चंद्रमाओं की उत्पत्ति, लाल ग्रह के शुरुआती इतिहास और सौरमंडल के विकास से जुड़े कई सवालों के जवाब मिल सकते हैं। यह मिशन इसलिए भी खास है, क्योंकि इसके जरिए पहली बार मंगल के किसी चंद्रमा से नमूने लाकर पृथ्वी पर उनका अध्ययन करने का लक्ष्य रखा गया है।

Contents
क्या है जापान का MMX मिशन?मंगल के दो चंद्रमा कौन हैं और क्यों हैं खास?दशकों से वैज्ञानिकों के लिए पहेली बने हैं फोबोस और डीमोसआखिर कैसे बने मंगल के दोनों चंद्रमा?फोबोस से मिट्टी कैसे इकट्ठा करेगा अंतरिक्ष यान?फोबोस पर उतरना इतना मुश्किल क्यों है?क्या मंगल पर जीवन के रहस्य भी खुलेंगे?चंद्र मिशन में झटका झेल चुका है जापान

क्या है जापान का MMX मिशन?

MMX का पूरा नाम मार्टियन मून्स एक्सप्लोरेशन है। जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) इस मिशन का संचालन कर रही है। इसके तहत अंतरिक्ष यान मंगल के क्षेत्र में पहुंचेगा, उसके चंद्रमा फोबोस का अध्ययन करेगा और उसकी सतह से मिट्टी के नमूने इकट्ठा करेगा। इसके बाद नमूनों को एक विशेष कैप्सूल में सुरक्षित रखकर पृथ्वी पर वापस लाने की योजना है।

मिशन की मूल योजना के मुताबिक, अंतरिक्ष यान को जापान के एच-3 रॉकेट से रवाना किया जाना है। इसके अगस्त 2027 के आसपास मंगल क्षेत्र में पहुंचने और 2031 तक पृथ्वी पर लौटने का लक्ष्य बताया गया है। हालांकि, ये निर्धारित कार्यक्रम हैं और वास्तविक समयसीमा मिशन की प्रगति पर निर्भर करेगी।

इस अभियान में फ्रांस और जर्मनी के सहयोग से विकसित इडेफिक्स रोवर भी शामिल है। अमेरिका और यूरोप की अंतरिक्ष एजेंसियां भी विभिन्न उपकरणों और संचार व्यवस्था में सहयोग कर रही हैं। इस तरह MMX जापान का नेतृत्व वाला एक अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक अभियान है।

मंगल के दो चंद्रमा कौन हैं और क्यों हैं खास?

मंगल के दो प्राकृतिक चंद्रमा हैं—फोबोस और डीमोस। आकार में छोटे और अनियमित होने के कारण ये पृथ्वी के चंद्रमा की तरह गोल दिखाई नहीं देते, बल्कि इनकी बनावट कुछ हद तक आलू जैसी है।

फोबोस मंगल के ज्यादा करीब है और बहुत तेजी से उसकी परिक्रमा करता है। यह मंगल के एक दिन में लगभग तीन चक्कर लगा लेता है। वहीं, डीमोस ग्रह से अधिक दूरी पर स्थित है और उसकी परिक्रमा अपेक्षाकृत धीमी है।

इन दोनों चंद्रमाओं की उत्पत्ति वैज्ञानिकों के लिए लंबे समय से पहेली बनी हुई है। इनके आकार, सतह और संरचना का अध्ययन करने से यह समझने में मदद मिल सकती है कि मंगल के आसपास का क्षेत्र किस तरह विकसित हुआ। इसी कारण फोबोस से मिट्टी के नमूने लाने के अभियान को विशेष महत्व दिया जा रहा है।

दशकों से वैज्ञानिकों के लिए पहेली बने हैं फोबोस और डीमोस

1960 के दशक से मंगल ग्रह और उसके आसपास के क्षेत्र का अध्ययन करने के लिए कई अंतरिक्ष अभियान भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद फोबोस और डीमोस से जुड़े कई सवाल अब तक अनसुलझे हैं।

इन दोनों के नाम ग्रीक पौराणिक कथाओं के पात्रों से लिए गए हैं। फोबोस का अर्थ भय और डीमोस का अर्थ आतंक से जुड़ा है। ये युद्ध के देवता एरेस के पुत्र माने जाते हैं, जिनका रोमन नाम मंगल है।

फोबोस की सतह पर उतरने के प्रयास भी पहले किए जा चुके हैं। रूस का 2011 में भेजा गया फोबोस-ग्रंट मिशन भी सफल नहीं हो पाया था। ऐसे में जापान का MMX अभियान इस चंद्रमा के नजदीक पहुंचकर उसका अध्ययन करने और नमूने वापस लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

आखिर कैसे बने मंगल के दोनों चंद्रमा?

वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि फोबोस और डीमोस का जन्म कैसे हुआ। इसे लेकर मुख्य रूप से दो संभावनाओं पर विचार किया जाता है।

पहली संभावना के मुताबिक, अतीत में कोई बड़ा खगोलीय पिंड मंगल से टकराया होगा। इस टक्कर से निकले मलबे ने ग्रह के आसपास एकत्र होकर चंद्रमाओं का रूप ले लिया होगा। यदि यह सिद्धांत सही है, तो फोबोस की मिट्टी में मंगल की सतह से निकले पदार्थ के अंश मिल सकते हैं।

दूसरे सिद्धांत के अनुसार, फोबोस और डीमोस कभी क्षुद्रग्रह रहे होंगे। संभव है कि वे सौरमंडल के किसी दूसरे हिस्से से मंगल के गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में आए और उसकी परिक्रमा करने लगे।

फोबोस से जुटाए गए नमूनों में मौजूद खनिजों, रासायनिक तत्वों और अन्य पदार्थों का विश्लेषण इन दोनों संभावनाओं की जांच में मदद कर सकता है। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने का अवसर मिलेगा कि मंगल के चंद्रमाओं का निर्माण किस प्रक्रिया से हुआ और उनका पदार्थ कहां से आया।

फोबोस से मिट्टी कैसे इकट्ठा करेगा अंतरिक्ष यान?

MMX मिशन का लक्ष्य फोबोस की सतह से कम से कम 10 ग्राम नमूना इकट्ठा करना है। इसके लिए दो अलग-अलग तकनीकों का इस्तेमाल करने की योजना है।

पहली तकनीक में अमेरिकी उपकरण दबाव वाली गैस की मदद से सतह पर मौजूद धूल और छोटे कणों को एक संग्रह पात्र में पहुंचाएगा। दूसरी तकनीक में जापानी उपकरण सतह के भीतर लगभग दो सेंटीमीटर तक प्रवेश करके नमूने जुटाएगा।

इन नमूनों को एक विशेष वापसी कैप्सूल में रखा जाएगा। कैप्सूल को इस तरह तैयार किया गया है कि पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करते समय पैदा होने वाली अत्यधिक गर्मी से अंदर मौजूद सामग्री सुरक्षित रह सके।

योजना के अनुसार, कैप्सूल के ऑस्ट्रेलिया में उतरने के बाद नमूनों को जापान ले जाया जाएगा। वहां वैज्ञानिक अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में इनका विस्तृत विश्लेषण करेंगे।

फोबोस पर उतरना इतना मुश्किल क्यों है?

फोबोस पर उतरना पृथ्वी या बड़े खगोलीय पिंडों पर उतरने जैसा नहीं है। इसका गुरुत्वाकर्षण बेहद कमजोर है। इसकी वजह से अंतरिक्ष यान को सतह पर नियंत्रित तरीके से उतारना और स्थिर बनाए रखना बड़ी तकनीकी चुनौती है।

कम गुरुत्वाकर्षण के कारण सतह को छूते समय यान का संतुलन बिगड़ सकता है। नमूने इकट्ठा करने के दौरान भी विशेष सावधानी बरतनी होगी, ताकि यान अपनी निर्धारित स्थिति से न हटे।

इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए MMX के लैंडिंग सिस्टम में झटकों को सहने वाले चार पैरों की व्यवस्था की गई है। मिशन में शामिल रोवर को भी कम गुरुत्वाकर्षण वाले वातावरण में चलने और पलट जाने की स्थिति में खुद को सीधा करने की क्षमता के साथ तैयार किया गया है।

क्या मंगल पर जीवन के रहस्य भी खुलेंगे?

MMX मिशन से मंगल पर जीवन होने का सीधा प्रमाण मिलने की उम्मीद करना अभी जल्दबाजी होगी। हालांकि, इससे मंगल और उसके आसपास के क्षेत्र के शुरुआती इतिहास को समझने में मदद मिल सकती है।

फोबोस की मिट्टी में मंगल से आए पदार्थ मौजूद हुए तो वैज्ञानिकों को लाल ग्रह की सतह और उसकी प्राचीन परिस्थितियों के बारे में अतिरिक्त जानकारी मिल सकती है। इससे मंगल के भूवैज्ञानिक इतिहास और उन परिस्थितियों का अध्ययन करने में मदद मिलेगी, जिनमें कभी जीवन के अनुकूल वातावरण मौजूद रहा हो सकता है।

इसके अलावा, यह अभियान भविष्य में मंगल तक मानव मिशन भेजने की तैयारियों के लिहाज से भी उपयोगी हो सकता है। फोबोस के संसाधनों, सतह और पर्यावरण की जानकारी भविष्य के अभियानों की योजना बनाने में मदद कर सकती है। हालांकि, इसे मानव मिशन के लिए पड़ाव या संचालन केंद्र के रूप में इस्तेमाल करने की संभावनाओं पर अभी और शोध की जरूरत है।

चंद्र मिशन में झटका झेल चुका है जापान

जापान इससे पहले चंद्रमा पर उतरने के प्रयासों में चुनौतियों का सामना कर चुका है। जून 2025 में जापानी निजी कंपनी आईस्पेस का रेजिलिएंस लैंडर चंद्रमा की सतह पर उतरने के दौरान विफल हो गया था। लैंडर से संपर्क टूटने के बाद उसे दोबारा स्थापित करने की कोशिशें की गईं, लेकिन सफलता नहीं मिली। अंततः कंपनी ने मिशन को विफल घोषित कर दिया।

हालांकि, चंद्रमा पर लैंडिंग की उस नाकामी और MMX की तकनीकी चुनौतियां अलग हैं। मंगल के चंद्रमा से नमूने लाकर पृथ्वी पर पहुंचाना कई चरणों वाला जटिल अभियान होगा। इसकी सफलता जापान की अंतरिक्ष तकनीक के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग की क्षमताओं की भी बड़ी परीक्षा होगी।

Subscribe to Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

TAGGED: H3 rocket Japan, JAXA MMX mission, Mars moon sample return, Martian Moons Exploration, Phobos rover IDEFIX, Phobos sample mission, अंतरिक्ष विज्ञान समाचार, जापान MMX मिशन, जापान अंतरिक्ष एजेंसी, जापान अंतरिक्ष मिशन, फोबोस डीमोस रहस्य, फोबोस से मिट्टी, मंगल के चंद्रमा फोबोस, मंगल ग्रह के चंद्रमा, मंगल पर जीवन की खोज
Share This Article
Twitter Email Copy Link Print
Previous Article फ्रांस में हिंसा पर अमेरिका में घमासान, जेडी वेंस ने इमिग्रेशन को घेरा तो रो खन्ना ने उठाए आर्थिक असमानता पर सवाल
Next Article पैदा होते ही ‘बेबी किंग’ का स्वैग! सिर के पीछे हाथ, पैर पर पैर रखकर लेटा नवजात, VIDEO देख लोग बोले- इसे कोई टेंशन नहीं

फीचर

View More

खेती के साथ बंपर कमाई का मौका: बेहद कम लागत में शुरू करें केंचुआ खाद का बिजनेस, जानें पूरी प्रोसेस और प्रॉफिट

खेती किसानी के साथ यदि अतिरिक्त आमदनी का जरिया तलाश रहे हैं, तो वर्मीकम्पोस्ट यानी केंचुआ खाद का बिजनेस आपके…

By Shivani Kalani 4 Min Read

Europe Protests 2026: 2017 में UAE के मंत्री ने कट्टरपंथ पर दी थी चेतावनी, फ्रांस में हिंसा के बाद फिर चर्चा में बयान

फ्रांस में महंगाई, महंगी जीवनशैली और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर हुए प्रदर्शनों…

8 Min Read

नवरात्रि में उपवास का नया ट्रेंड: ‘डिजिटल उपवास’ से बदल रही युवाओं की ज़िंदगी

आज की युवा पीढ़ी में सुबह उठते ही और रात को सोने…

5 Min Read

विचार

View More

भारतीय रेडियो प्रसारण के 100 वर्ष: ‘श्रुति’ की परंपरा से ‘मन की बात’ तक… ऐसा रहा जादुई तरंगों का 100 साल का सफर

उस अविस्मरणीय पल को याद कीजिए, जब आपने पहली बार…

August 13, 2026

क्या कभी सोचा है कि आखिर कैसे दक्षिण से उत्तर तक पूरे देश में छा जाते हैं बादल और शुरू हो जाती है झमाझम बारिश?

नई दिल्ली: देश में मानसून की…

July 9, 2026

‘एक भी अमेरिकी सैनिक जिंदा नहीं लौटेगा’… आखिर ईरान ने अमेरिका को क्यों दी खुली चेतावनी? जानिए कैसे बढ़ा नया सैन्य तनाव

तेहरान: पश्चिम एशिया में अमेरिका और…

July 9, 2026

अमीर पति बनेगा सहारा या मुसीबत? डेटिंग ऐप CEO की सलाह से छिड़ी बहस, महिलाओं से कहा- ‘कमाई का अंतर ज्यादा हो तो सोचिए’

नई दिल्ली: शादी और रिश्तों को…

June 9, 2026

मानसून की दस्तक में फिर देरी, आखिर कब पहुंचेगा केरल? जानिए क्यों बार-बार बदल रही है IMD की तारीख

नई दिल्ली: देश के कई राज्यों…

June 4, 2026

You Might Also Like

Trending Newsराज्य

दिल्ली में दशहरे पर रावण के साथ जलेगा 30 फीट का कॉकरोच, कहीं ‘हे राम’ बोलेगा रावण तो कहीं नकली दवाओं का होगा दहन

नई दिल्ली: दिल्ली में दशहरे के मौके पर इस बार रावण दहन के साथ सामाजिक समस्याओं पर भी खास अंदाज…

6 Min Read
Trending Newsवर्ल्ड

फ्रांस में हिंसा पर अमेरिका में घमासान, जेडी वेंस ने इमिग्रेशन को घेरा तो रो खन्ना ने उठाए आर्थिक असमानता पर सवाल

नई दिल्ली: फ्रांस में हिंसा और आगजनी की घटनाओं ने अमेरिका में नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति…

9 Min Read
EntertainmentTrending News

9वीं में फेल, फिर वेल्डिंग का काम… टाइगर श्रॉफ की कार पर फायरिंग के आरोपियों की सोनीपत से मुंबई तक की कहानी

मुंबई: अभिनेता टाइगर श्रॉफ की कार पर गोलीबारी के मामले की जांच में हरियाणा के सोनीपत के दो युवकों के…

5 Min Read
Trending Newsराज्य

सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका को राहत नहीं, दो दिन और जेल में रहेंगे दोनों

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रांका की न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए…

5 Min Read
  • होम
  • सियासी
  • वर्ल्ड
  • राज्य
  • क्राइम
  • शॉर्ट्स
  • फीचर
  • वेब स्टोरी
  • विचार
  • खेल
  • Entertainment
  • बाजार
  • धर्म
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य

© Indian Press House. Managed by EasyLauncher.

Welcome Back!

Sign in to your account

Lost your password?