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क्या आपका बच्चा भी मोबाइल देखकर खा रहा है खाना? रिसर्च में बड़ा खुलासा, भाषा और दिमागी विकास पर पड़ सकता है बड़ा असर

नई दिल्ली: छोटे बच्चों को खाना खिलाने के लिए मोबाइल फोन दिखाना आजकल कई घरों में आम बात हो गई है। बच्चा रो रहा हो, जिद कर रहा हो या खाना खाने से मना कर रहा हो, तो माता-पिता अक्सर स्मार्टफोन का सहारा लेते हैं। लेकिन अब एक नई रिसर्च ने इस आदत को लेकर गंभीर चिंता जताई है। अध्ययन के अनुसार, कम उम्र में बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों के मानसिक, सामाजिक और शारीरिक विकास को प्रभावित कर सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि शुरुआती उम्र में मोबाइल और डिजिटल उपकरणों पर बढ़ती निर्भरता बच्चों की सीखने, बोलने और दूसरों से संवाद करने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है। यही नहीं, लंबे समय तक स्क्रीन देखने की आदत उनके समग्र विकास की रफ्तार भी धीमी कर सकती है।

18 महीने की उम्र में ही स्क्रीन तक पहुंच रहे बच्चे

पीजीआई चंडीगढ़ की पीडियाट्रिक्स और सोशल पीडियाट्रिक्स विभाग की प्रोफेसर भवनीत भारती और उनकी टीम द्वारा किए गए अध्ययन में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिसर्च के मुताबिक करीब 18 महीने की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते 68 प्रतिशत बच्चे किसी न किसी रूप में स्क्रीन के संपर्क में आ चुके होते हैं।

इसका मतलब है कि डेढ़ साल की उम्र में ही बड़ी संख्या में बच्चे स्मार्टफोन, टैबलेट या अन्य डिजिटल उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं।

18 से 24 महीने के बच्चों पर हुई स्टडी

अध्ययन में 18 से 24 महीने आयु वर्ग के बच्चों को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि अधिक स्क्रीन देखने वाले बच्चों में सीखने की क्षमता और सामाजिक संवाद पर असर दिखाई देता है।

रिसर्च के अनुसार खाना खाते समय मोबाइल देखने की आदत विशेष रूप से चिंताजनक है। इससे बच्चों की भाषा विकसित होने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और उनका ध्यान केंद्रित करने का स्तर भी कमजोर पड़ सकता है।

हर तीसरा बच्चा एक घंटे से ज्यादा देख रहा स्क्रीन

अध्ययन में शामिल आंकड़ों के अनुसार लगभग 33 प्रतिशत बच्चे रोजाना एक घंटे से अधिक समय मोबाइल या अन्य स्क्रीन के सामने बिताते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों की शारीरिक गतिविधियों को कम कर रहा है। जो समय खेलकूद, दौड़ने-भागने और नई चीजें सीखने में लगना चाहिए, वह स्क्रीन के सामने बीत रहा है। इसका असर उनकी फिटनेस और शारीरिक विकास पर भी पड़ सकता है।

कम स्क्रीन टाइम वाले बच्चों में दिखी बेहतर क्षमता

रिसर्च में यह भी सामने आया कि जिन बच्चों का स्क्रीन टाइम अपेक्षाकृत कम था, उनमें समस्या समाधान की क्षमता अधिक विकसित पाई गई।

शोधकर्ताओं के अनुसार ऐसे बच्चे अपने आसपास के माहौल को बेहतर तरीके से समझते हैं और नई परिस्थितियों के अनुसार खुद को अधिक प्रभावी ढंग से ढाल पाते हैं। इससे उनकी सामाजिक और व्यक्तिगत विकास यात्रा भी बेहतर रहती है।

बच्चों के विकास के लिए क्या सलाह दे रहे विशेषज्ञ?

विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे बच्चों के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज स्क्रीन नहीं, बल्कि इंसानी संवाद है। माता-पिता, परिवार के सदस्य और हमउम्र बच्चों के साथ बातचीत उनके मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

डॉक्टरों के अनुसार बच्चों को अधिक समय खिलौनों, रचनात्मक गतिविधियों और वास्तविक दुनिया के अनुभवों के साथ बिताना चाहिए। इससे उनकी भाषा, सोचने-समझने की क्षमता और सामाजिक कौशल बेहतर तरीके से विकसित होते हैं।

क्यों जरूरी है स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण?

विशेषज्ञ मानते हैं कि जीवन के शुरुआती वर्षों में मस्तिष्क का विकास सबसे तेजी से होता है। ऐसे में यदि बच्चा लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन पर निर्भर रहता है, तो उसके सीखने और सामाजिक व्यवहार पर असर पड़ सकता है।

इसी वजह से डॉक्टर माता-पिता को सलाह देते हैं कि बच्चों को खाना खिलाने या शांत कराने के लिए मोबाइल का सहारा लेने के बजाय उनसे बातचीत करें, खेलें और उन्हें वास्तविक गतिविधियों में शामिल करें। इससे उनका मानसिक और शारीरिक विकास अधिक संतुलित तरीके से हो सकेगा।

 

vineet verma

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vineet verma
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