वॉशिंगटन/तेहरान। Donald Trump ने ईरान के साथ सैन्य टकराव को “समाप्त” घोषित कर एक नई राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया है। व्हाइट हाउस की ओर से अमेरिकी संसद को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि 7 अप्रैल 2026 के बाद अमेरिका और ईरान के बीच कोई सैन्य झड़प नहीं हुई, इसलिए आगे की कार्रवाई के लिए कांग्रेस की मंजूरी की समयसीमा अब लागू नहीं होती।
दरअसल, यह पूरा मामला War Powers Resolution से जुड़ा है, जिसके तहत राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई शुरू करने के 60 दिनों के भीतर उसे समाप्त करना या फिर कांग्रेस से मंजूरी लेना अनिवार्य होता है। ट्रंप प्रशासन ने 2 मार्च को इस सैन्य अभियान की जानकारी संसद को दी थी, जिससे तय समयसीमा 1 मई को पूरी हो रही थी।
विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप का यह बयान केवल सैन्य स्थिति का आकलन नहीं, बल्कि एक रणनीतिक कदम भी है। “जंग खत्म” घोषित करके प्रशासन कांग्रेस से संभावित टकराव और कानूनी दबाव को कम करना चाहता है। इससे यह संकेत भी मिलता है कि अमेरिका फिलहाल औपचारिक रूप से किसी नए सैन्य विस्तार से बचना चाहता है।
हालांकि, ट्रंप ने साफ किया कि ईरान के साथ बातचीत की स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि तेहरान समझौते की बात तो कर रहा है, लेकिन मौजूदा प्रस्ताव संतोषजनक नहीं हैं। साथ ही उन्होंने ईरानी नेतृत्व को “बिखरा हुआ” बताते हुए कहा कि अंदरूनी मतभेद बातचीत को कमजोर कर रहे हैं।
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि हालिया संघर्ष के बाद ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर हो चुकी है। उनके अनुसार, ईरान के पास अब प्रभावी नौसेना या वायुसेना नहीं बची है और उसकी रक्षा क्षमताएं सीमित हो गई हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
कड़े बयानों के बावजूद ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि बातचीत सफल नहीं होती, तो सैन्य विकल्प भी खुले रहेंगे।
ट्रंप का यह रुख अमेरिका की आंतरिक राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है—क्या “जंग खत्म” घोषित करना वास्तव में कानूनी दायित्वों से बचने का तरीका है, या यह एक वास्तविक रणनीतिक बदलाव का संकेत है?
आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह कदम केवल राजनीतिक दबाव को टालने के लिए था या अमेरिका-ईरान संबंधों में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत।
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