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क्या तीसरे विश्वयुद्ध की आहट? अमेरिका-ईरान में फिर भड़की जंग, ट्रंप के ऐलान के बाद दुनिया में बढ़ी बेचैनी

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। तुर्की में चल रहे नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त बयान और उससे पहले अमेरिकी सेना की ओर से ईरान पर किए गए बड़े सैन्य हमलों ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। मौजूदा हालात को देखते हुए दुनिया भर में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या पश्चिम एशिया एक बार फिर बड़े युद्ध की ओर बढ़ रहा है।

ट्रंप ने साफ कहा- अब ईरान से किसी समझौते का सवाल नहीं

नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान के साथ हुआ युद्धविराम अब समाप्त हो चुका है और उनकी सरकार अब तेहरान के साथ किसी नए समझौते के पक्ष में नहीं है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने पिछली रात ईरान के कई ठिकानों पर जोरदार कार्रवाई की और चेतावनी दी कि यदि ईरान की ओर से कोई हमला होता है तो अमेरिका हर बार उसी ताकत से जवाब देगा। उनके अनुसार अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान के 80 से अधिक ठिकानों पर मिसाइल हमले किए।

कैसे टूटा युद्धविराम, क्या रही पूरी वजह?

बताया गया कि इसी वर्ष 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच एक अंतरिम समझौता हुआ था। इसके तहत दोनों देशों ने 60 दिनों का शांति काल तय किया था ताकि परमाणु समझौते की दिशा में आगे बढ़ा जा सके। इसके बदले अमेरिका ने ईरान को तेल निर्यात से जुड़े कुछ प्रतिबंधों में सीमित राहत भी दी थी। हालांकि, अमेरिकी पक्ष का आरोप है कि ईरान ने इस समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया और हालात लगातार बिगड़ते गए।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव की सबसे बड़ी वजह

दोनों देशों के बीच विवाद की सबसे बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य को माना जा रहा है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति इसी समुद्री मार्ग से होती है। आरोप है कि ईरान ने इस क्षेत्र से गुजर रहे तीन अंतरराष्ट्रीय व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाया और चेतावनी दी कि निर्धारित मार्ग का पालन नहीं करने वाले जहाजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी उसकी नहीं होगी।

इन जहाजों में कतर का एलएनजी टैंकर ‘अल रेकय्यात’, सऊदी अरब का ‘वेडयान’ और लाइबेरिया का एक व्यावसायिक जहाज शामिल बताया गया है। अमेरिका ने इसे युद्धविराम का गंभीर उल्लंघन माना।

80 से ज्यादा ठिकानों पर अमेरिकी सेना की बड़ी कार्रवाई

घटनाक्रम के दौरान डोनाल्ड ट्रंप तुर्की में नाटो शिखर सम्मेलन में मौजूद थे। वहीं से उन्होंने अमेरिकी सेंट्रल कमांड को ईरान के खिलाफ आक्रामक सैन्य कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही ईरान को तेल निर्यात में दी गई राहत भी तत्काल प्रभाव से वापस लेने का फैसला किया गया।

इसके बाद अमेरिकी लड़ाकू विमानों और सटीक मिसाइलों के जरिए ईरान के 80 से अधिक ठिकानों पर हमले किए गए।

ट्रंप ने साझा किया हमले का वीडियो

अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सोशल मीडिया मंच पर हमले से जुड़ा एक वीडियो भी साझा किया, जिसमें लगातार विस्फोट दिखाई दे रहे हैं। ट्रंप ने इस सैन्य कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर हुए हमलों का जवाब बताया।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक अभियान का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना था, जिनके जरिए अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को खतरा पहुंचाया जा रहा था। कार्रवाई के दौरान ईरान के वायु रक्षा तंत्र को भी निशाना बनाया गया ताकि अमेरिकी विमानों के लिए खतरा कम किया जा सके।

कम्युनिकेशन नेटवर्क और रडार सिस्टम भी बने निशाना

अमेरिकी कार्रवाई में ईरान की सैन्य कमान और नियंत्रण प्रणाली पर भी हमला किया गया। इसके अलावा संचार नेटवर्क को बाधित करने, तटीय रडार केंद्रों को नष्ट करने और जहाजों को निशाना बनाने वाली एंटी-शिप मिसाइल क्षमताओं को भी तबाह करने का दावा किया गया।

ईरान का पलटवार, अमेरिकी ठिकानों पर दागीं मिसाइलें

अमेरिकी हमलों के बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर दर्जनों मिसाइलें दागीं।

इसी दौरान पत्रकारों के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत अब समय की बर्बादी है। उन्होंने ईरानी नेतृत्व पर तीखे आरोप लगाते हुए कहा कि अब किसी भी नए समझौते का कोई औचित्य नहीं बचा है।

रियायत देने के मूड में नहीं अमेरिका

ट्रंप के बयान से संकेत मिल रहे हैं कि अमेरिका अब ईरान के प्रति किसी तरह की नरमी बरतने के पक्ष में नहीं है। इस घटनाक्रम का असर वैश्विक बाजारों पर भी दिखाई दिया। अमेरिकी कार्रवाई और ट्रंप के बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 6 प्रतिशत तक तेजी दर्ज की गई। यदि तनाव लंबा खिंचता है तो भारत समेत कई देशों में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर इसका असर पड़ सकता है।

यूरोप चिंतित, नाटो ने किया समर्थन

यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने इस घटनाक्रम पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे खाड़ी क्षेत्र में शांति स्थापित करने के प्रयासों को गंभीर झटका लगा है।

वहीं नाटो महासचिव मार्क रुटे ने अमेरिकी कार्रवाई का समर्थन किया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर हमले और तेज किए तो हालात पूर्ण युद्ध का रूप ले सकते हैं।

कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं

मौजूदा हालात में अमेरिका और ईरान दोनों अपने-अपने रुख पर कायम दिखाई दे रहे हैं। अमेरिका अपनी वैश्विक साख और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा को प्राथमिकता बता रहा है, जबकि ईरान लगातार दबाव के बावजूद झुकने के संकेत नहीं दे रहा।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बढ़ता तनाव दोनों देशों को फिर बातचीत की मेज तक लाएगा या पश्चिम एशिया एक और बड़े सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ चुका है।

बढ़ा संघर्ष तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और बढ़ता है तो इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा। कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, वैश्विक महंगाई, आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव और आर्थिक अस्थिरता जैसी चुनौतियां दुनिया के कई देशों को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर अब पश्चिम एशिया में तेजी से बदलते घटनाक्रम पर टिकी हुई है।

 

 

vineet verma

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