नई दिल्ली: हर महीने नौकरीपेशा लोगों को जिस सैलरी का इंतजार रहता है, क्या आपने कभी सोचा है कि इस शब्द की शुरुआत आखिर कैसे हुई? आज सैलरी का मतलब सीधे वेतन या तनख्वाह से जोड़ा जाता है, लेकिन इसका इतिहास पैसे से नहीं बल्कि नमक से जुड़ा हुआ है। इतिहासकारों के अनुसार, एक समय ऐसा भी था जब नमक इतना मूल्यवान था कि कई क्षेत्रों में इसे भुगतान के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। इसी ऐतिहासिक परंपरा से आगे चलकर ‘सैलरी’ शब्द अस्तित्व में आया।
कभी नमक भी हुआ करता था भुगतान का जरिया
आज नमक हर घर की रसोई में आसानी से उपलब्ध है, लेकिन प्राचीन समय में इसकी कीमत बेहद अधिक मानी जाती थी। नमक केवल भोजन का स्वाद बढ़ाने तक सीमित नहीं था, बल्कि खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने में भी इसकी अहम भूमिका थी। इसकी सीमित उपलब्धता और दूर-दराज के इलाकों से लाने की वजह से नमक बेहद कीमती माना जाता था। यही कारण था कि कई स्थानों पर इसका इस्तेमाल मुद्रा की तरह भुगतान करने के लिए भी किया जाता था।
रोमन साम्राज्य से जुड़ा है सैलरी शब्द का इतिहास
इतिहास के अनुसार, प्राचीन रोमन साम्राज्य में सैनिकों को उनकी सेवाओं के बदले जो भुगतान दिया जाता था, उसे ‘सैलेरियम’ कहा जाता था। उस दौर में कई सैनिकों को नकद या सोने-चांदी के बजाय नमक के रूप में मेहनताना दिया जाता था। माना जाता है कि इसी ‘सैलेरियम’ शब्द से आगे चलकर अंग्रेजी का ‘सैलरी’ शब्द विकसित हुआ, जिसका इस्तेमाल आज वेतन या तनख्वाह के अर्थ में किया जाता है।
इतिहासकारों ने भी किया है इसका उल्लेख
रिपोर्ट के मुताबिक, रोमन इतिहासकार प्लीनी द एल्डर ने अपनी पुस्तक नेचुरल हिस्ट्री में उल्लेख किया है कि प्राचीन रोम में सैनिकों को उनके कार्य के बदले नमक दिया जाता था। इसी परंपरा को सैलरी शब्द की उत्पत्ति से जोड़कर देखा जाता है। कई अध्ययनों में यह भी बताया गया है कि ‘सोल्जर’ शब्द को लैटिन भाषा के ‘सल डेयर’ से जोड़ा जाता है, जिसका अर्थ ‘नमक देना’ बताया गया है। वहीं रोमन भाषा में नमक के लिए ‘सैलेरियम’ शब्द का प्रयोग किया जाता था, जिससे आगे चलकर ‘सैलरी’ शब्द प्रचलन में आया।
वेतन देने की परंपरा कब शुरू हुई?
कुछ फ्रांसीसी इतिहासकारों का मानना है कि वेतन देने की परंपरा 10,000 ईसा पूर्व से 6,000 ईसा पूर्व के बीच शुरू हुई थी। हालांकि प्राचीन रोम में लंबे समय तक सैनिकों को भुगतान के रूप में नमक दिए जाने का उल्लेख मिलता है। उस समय नमक का व्यापार भी बड़े पैमाने पर होता था और इसकी कीमत काफी अधिक थी। बाद में जब सिक्कों और मुद्रा का प्रचलन बढ़ा, तब भुगतान के तरीके बदल गए और नकद लेनदेन शुरू हो गया। इसके बावजूद ‘सैलरी’ शब्द आज भी उसी ऐतिहासिक विरासत की याद दिलाता है।
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