Trending News

क्या बृजभूषण अब ‘कमल’ छोड़कर ‘साइकिल’ की रफ्तार बढ़ाने वाले हैं?

उत्तर प्रदेश की राजनीति के सबसे बेबाक और कद्दावर चेहरों में शुमार बृजभूषण शरण सिंह के ताजा तेवरों ने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक हलचल तेज कर दी है। ‘कैसरगंज के दबंग’ कहे जाने वाले पूर्व सांसद ने जिस तरह से सार्वजनिक मंच से अपनी ही पार्टी (BJP) को निशाने पर लिया है, उसके बाद गलियारों में एक ही सवाल है-क्या बृजभूषण अब ‘कमल’ छोड़कर ‘साइकिल’ की रफ्तार बढ़ाने वाले हैं?

“अगर हम बोझ हैं, तो बता दो”: आत्मसम्मान या सियासी बगावत?

बिहार के भागलपुर में एक कार्यक्रम के दौरान बृजभूषण सिंह का दर्द और गुस्सा एक साथ फूट पड़ा। उन्होंने किसी का नाम लिए बिना सीधे नेतृत्व को संदेश दिया कि यदि उन्हें अब “अनुपयोगी” माना जा रहा है, तो उन्हें साफ बता दिया जाए।

टिकट कटना और बढ़ती दूरी: 2024 के लोकसभा चुनाव में अपना टिकट कटने और उसके बाद पार्टी के बड़े कार्यक्रमों से खुद को दूर किए जाने को बृजभूषण ने अपने स्वाभिमान से जोड़ लिया है।

2029 का खुला ऐलान: उन्होंने पहले ही साफ कर दिया है कि वह 2029 का चुनाव लड़ेंगे। ऐसे में बीजेपी की ‘खामोशी’ उन्हें नए रास्ते तलाशने पर मजबूर कर रही है।

अखिलेश यादव का ‘सॉफ्ट कॉर्नर’: क्या पक रही है खिचड़ी?

बृजभूषण के तीखे तेवरों के बीच समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव की नरमी बहुत कुछ बयां कर रही है।

‘गोंडा के नेता’: अखिलेश यादव ने हाल ही में उन्हें ‘अपना नेता’ और ‘गोंडा का बड़ा नेता’ कहकर संबोधित किया। राजनीतिक पंडित इसे सपा की ओर से ‘खुला आमंत्रण’ मान रहे हैं।

बृजभूषण की ‘साधुवाद’ कूटनीति: बीजेपी विधायक का हाल जानने अस्पताल पहुंचे अखिलेश यादव की तारीफ कर बृजभूषण ने यह संकेत दे दिया है कि राजनीति में उनके लिए ‘दुश्मनी’ स्थायी नहीं है।

दल बदलना: आसान नहीं है ‘पाला’ बदलना

भले ही कयास तेज हों, लेकिन बृजभूषण के लिए बीजेपी का साथ छोड़ना इतना सरल नहीं है:

पारिवारिक विरासत: उनके बेटे प्रतीक भूषण सिंह (विधायक) और करण भूषण सिंह (सांसद) दोनों बीजेपी के टिकट पर सदन में हैं। पिता का एक फैसला बच्चों के राजनीतिक करियर पर भारी पड़ सकता है।

पुरानी घर वापसी: बृजभूषण 2009 से 2014 तक सपा में रह चुके हैं और मुलायम सिंह यादव के परिवार से उनके ताल्लुक हमेशा मधुर रहे हैं।

वर्चस्व की जंग: बृजभूषण उस मिजाज के नेता हैं जो किनारे लगकर राजनीति नहीं कर सकते। यदि बीजेपी में उन्हें अहमियत नहीं मिली, तो वह 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से पहले कोई बड़ा धमाका कर सकते हैं।

बृजभूषण सिंह जिस तरफ चलते हैं, उस तरफ एक बड़ा वोट बैंक और काफिला चलता है। अब यह काफिला ‘भगवा’ रहेगा या ‘लाल टोपी’ पहनेगा, इसका जवाब 2027 की सियासी बिसात तय करेगी। फिलहाल, उनकी खामोशी एक बड़े तूफान का संकेत दे रही है।

news desk

Recent Posts

20 साल में बनाया था हिज्बुल्लाह ने ये गुप्त ठिकाना, इजरायल ने एक झटके में कर दिया तबाह

नई दिल्ली: इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने दावा किया है कि उसने दक्षिणी लेबनान में…

3 hours ago

‘न टॉयलेट फ्लश करें, न हाथ धोएं, न नहाएं…’ इस शहर में क्यों जारी करना पड़ा ऐसा हैरान करने वाला आदेश?

नई दिल्ली: सोचिए, अगर एक सुबह उठते ही प्रशासन की ओर से संदेश मिले कि…

4 hours ago

स्पेन में 50 हजार प्रवासियों की एंट्री से क्यों घबराया पूरा यूरोप? इटली-फ्रांस में भी अलर्ट, जानिए क्या है पूरा संकट

नई दिल्ली: स्पेन के उत्तरी अफ्रीकी एन्क्लेव सेउटा में मोरक्को की ओर से बड़ी संख्या…

4 hours ago

कोयला खदान में मौत का धमाका! 32 मजदूरों की गई जान, आखिर कैसे हुआ इतना बड़ा हादसा?

नई दिल्ली: पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिमी बलूचिस्तान प्रांत में स्थित एक कोयला खदान में हुए भीषण…

4 hours ago

स्पेन की सीमा पर बेकाबू हालात! मोरक्को से घुसपैठ की कोशिश में 18 की मौत, हजारों प्रवासियों के पहुंचने से सेना तैनात

नई दिल्ली: स्पेन के उत्तरी अफ्रीकी एन्क्लेव सेउटा में मोरक्को से बड़ी संख्या में प्रवासियों…

4 hours ago

‘सीढ़ियां मलबे में दब गईं, खिड़की से कूदकर बचाई जान’… भिवंडी हादसे के चश्मदीदों ने सुनाई रोंगटे खड़े कर देने वाली आपबीती

मुंबई: महाराष्ट्र के भिवंडी में चार मंजिला कोहिनूर बिल्डिंग के एक हिस्से के ढहने से…

4 hours ago