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क्या अमेरिका इज़रायल के कब्जे में है? जॉनी किर्क हत्याकांड में खुल रहे हैं चौंकाने वाले राज, पत्नी भी मोसाद एजेंट?

news desk
Last updated: January 26, 2026 3:13 pm
news desk
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हाल के दिनों में मोसाद के एजेंटों को लेकर चर्चाएं तेज़ हैं। इज़रायल की खुफिया एजेंसी मोसाद को दुनिया की सबसे प्रभावशाली एजेंसियों में गिना जाता है और कहा जाता है कि उसका नेटवर्क कई देशों तक फैला हुआ है।

ईरान में हाल के वर्षों में कई सैन्य जनरलों और परमाणु वैज्ञानिकों की हत्याओं के पीछे मोसाद की भूमिका होने के दावे किए जाते रहे हैं। इसी कड़ी में, इस्माइल हानिया की हत्या के बाद भी अटकलें लगीं कि इसके पीछे मोसाद के एजेंटों का हाथ हो सकता है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अमेरिका पर इज़रायल का प्रभाव?

इन घटनाओं के बीच एक बड़ा सवाल यह उठने लगा है कि क्या वैश्विक राजनीति में इज़रायल का प्रभाव इतना बढ़ चुका है कि अमेरिका की नीतियों पर भी इसका असर दिखाई देता है? यह सवाल अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नई बहस को जन्म दे रहा है।

कुछ विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका इज़रायल के आगे अपनी नीतियों में नरम पड़ चुका है। यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि अमेरिका में हाल ही में जॉनी किर्क हत्याकांड के बाद कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि जॉनी किर्क की पत्नी भी मोसाद की एजेंट हो सकती हैं।

जॉनी किर्क हत्याकांड

ynetnews.com और newsweek.com ने एक रिपोर्ट में बताया है कि जॉनी किर्क अमेरिकी राजनीति में एक बड़ा चेहरा थे। उनकी हत्या ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जॉनी किर्क वही शख्स हैं जिन्होंने इज़रायल के पीएम नेतन्याहू से हमास को लेकर तीखा सवाल पूछा था।

मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि उन्होंने पूछा कि जिस इलाके में सुरक्षा इतनी कड़ी थी कि परिंदा भी पर न मार सके, वहां इतनी बड़ी संख्या में हमास के हमलावर आखिर कैसे दाखिल हो गए। साथ ही यह सवाल भी उठाया कि जिस हमले में हमास द्वारा रॉकेटों के इस्तेमाल की बात इज़रायल ने कही, क्या वास्तव में उस समय हमास के पास इतनी क्षमता और संख्या में रॉकेट मौजूद थे?

इन सवालों ने इज़रायल की खुफिया और सुरक्षा व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी। नेतन्याहू ने इसे टालते हुए कहा कि जवाब बाद में देंगे, लेकिन कुछ दिन बाद ही जॉनी किर्क की हत्या कर दी गई। इसके अलावा उनकी पत्नी को एक ऐसे शख्स के साथ देखा गया, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि उसके तार मोसाद से जुड़े हैं।

एपस्टीन फाइल और अमेरिका का सरेंडर

कुछ विश्लेषकों का मानना है कि एपस्टीन फाइल भी अमेरिका के इज़रायल के आगे सरेंडर करने की वजह है। एपस्टीन को मोसाद का एजेंट माना जाता है और उसकी फाइलों में कई संवेदनशील राज दफ्न हैं।

विशेषज्ञों का दावा है कि अमेरिका के लगभग 90% नेताओं के नाम इन फाइलों में हैं। अमेरिका अब इन पन्नों के खुलने की संभावना नहीं देखना चाहता और इस वजह से उसने इज़रायल के आगे अपने आपको नरम कर लिया है। अमेरिका इज़रायल के हर कदम का समर्थन करता है और आर्थिक मदद भी प्रदान करता है।

वैश्विक राजनीति में मोसाद का असर?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि दुनिया के और भी कई देशों की सरकारें मोसाद के ज़रिये इज़रायल के प्रभाव में हैं। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में यह आशंका लगातार बढ़ रही है कि खुफिया एजेंसियों के नेटवर्क के ज़रिये सत्ता और नीतियों को प्रभावित किया जा रहा है।

इसी क्रम में आलोचकों का कहना है कि एपस्टीन फाइल जैसे संवेदनशील मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने के लिए ग्रीनलैंड और ईरान जैसे मामलों को जानबूझकर उठाया जा रहा है। राष्ट्रवाद और बाहरी ख़तरे का नैरेटिव गढ़कर डोनाल्ड ट्रंप अपनी राजनीतिक नाकामियों और घरेलू सवालों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं।

लोकतांत्रिक सरकार या पर्दे के पीछे की शक्तियां?

इन घटनाक्रमों ने यह सवाल और गहरा कर दिया है कि वैश्विक राजनीति में असली ताकत लोकतांत्रिक सरकारों के पास है या पर्दे के पीछे काम करने वाली खुफिया शक्तियों के हाथों में।

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TAGGED: anti-Israel claims, Charlie Kirk, ethnic cleansing, Gaza civilian casualties, Israel advocacy, Israel apartheid, Israel-Palestine conflict, Netanyahu criticism, pro-Israel activism, U.S. foreign policy
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