तेहरान/वॉशिंगटन। मध्य पूर्व में जारी तनाव कम होने के बजाय और भी हिंसक होता जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच आठवें हफ्ते में प्रवेश कर चुकी यह जंग अब एक निर्णायक मोड़ पर है। इस्लामाबाद में पहले दौर की शांति वार्ता विफल होने के बाद, अब दूसरे दौर की बातचीत पर भी काले बादल मंडरा रहे हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक अमेरिका अपना ‘अड़ियल रुख’ नहीं छोड़ता और साझा फ्रेमवर्क पर सहमति नहीं बनती, तब तक मेज पर बैठना मुमकिन नहीं है।
ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के अपने फैसले को वापस ले लिया है। शनिवार को जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहे जहाजों पर ईरानी सेना ने फायरिंग की। ईरान की ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड नेवी’ ने चेतावनी जारी की है कि:
“जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी खत्म नहीं करता, तब तक यह मार्ग बंद रहेगा। किसी भी जहाज का इस क्षेत्र में आना दुश्मन का सहयोग माना जाएगा और उस पर हमला किया जाएगा।”
इस तनाव की आंच अब भारतीय हितों तक भी पहुंच गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान द्वारा भारत के झंडे वाले दो मर्चेंट शिप (Merchant Ships) पर फायरिंग की गई।
तनाव के बावजूद, पर्दे के पीछे कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। पाकिस्तानी मध्यस्थ दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत का एक और दौर आयोजित करने की कोशिश कर रहे हैं। ईरान ने पुष्टि की है कि उसे अमेरिका से कुछ ‘नए प्रस्ताव’ मिले हैं, लेकिन जमीनी हकीकत फिलहाल किसी समझौते की ओर इशारा नहीं कर रही है।
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