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Ram Mandir Row: ‘चंदे में गड़बड़ी पर क्यों हैं चुप?’ राहुल गांधी और खरगे का पीएम मोदी को संयुक्त पत्र, संसद सत्र से पहले भारी बवाल!

संसद के आगामी मानसून सत्र (Monsoon Session) की शुरुआत से पहले देश का सियासी पारा अचानक गरमा गया है। राम मंदिर के चढ़ावे और उसमें कथित वित्तीय अनियमितताओं (Financial Irregularities) का मुद्दा एक बार फिर देश की राजनीति के केंद्र में आ गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस मामले को लेकर सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक साझा चिट्ठी लिखी है, जिसने विपक्षी तेवरों को साफ कर दिया है।

राम मंदिर चंदा विवाद की 5 बड़ी बातें

  • विपक्ष का साझा हमला: राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने संयुक्त रूप से पत्र लिखकर राम मंदिर के चंदे में कथित गड़बड़ी पर पीएम मोदी की चुप्पी को लेकर तीखे सवाल दागे हैं।
  • स्वतंत्र जांच की मांग: दोनों शीर्ष नेताओं ने पूरे मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और व्यापक जांच कराए जाने की मांग सरकार के सामने रखी है।
  • पब्लिक किए जाएं रिकॉर्ड: कांग्रेस नेतृत्व ने मांग की है कि राम मंदिर ट्रस्ट के अब तक के सभी वित्तीय (फाइनेंशियल) रिकॉर्ड आम जनता के सामने सार्वजनिक किए जाएं।
  • संसद सत्र से ठीक पहले टाइमिंग: यह चिट्ठी 20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले भेजी गई है, जिससे सदन में भारी हंगामे के आसार हैं।
  • सियासी बहस तेज: इस कदम के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच राम मंदिर के नाम पर एक नया सियासी घमासान छिड़ना तय माना जा रहा है।

‘पीएम की चुप्पी पर उठाए सवाल’ क्या लिखा है पत्र में?

कांग्रेस के दोनों दिग्गज नेताओं ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में आरोप लगाया है कि राम मंदिर के नाम पर देश और दुनिया भर से आए करोड़ों रुपये के चंदे और चढ़ावे में कथित रूप से वित्तीय हेरफेर की शिकायतें आ रही हैं। विपक्ष का कहना है कि इतने संवेदनशील मुद्दे पर देश के प्रधान का चुप रहना कई तरह के संदेह पैदा करता है।

विपक्ष की मुख्य मांग: “आस्था के इस बड़े केंद्र से करोड़ों लोगों की भावनाएं जुड़ी हैं। ऐसे में पारदर्शिता (Transparency) बेहद जरूरी है। सरकार को तुरंत प्रभाव से राम मंदिर ट्रस्ट के आय-व्यय और भूमि सौदों से जुड़े सभी रिकॉर्ड सार्वजनिक करने चाहिए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।”

मानसून सत्र में दिखेगा असर, हंगामेदार होगी शुरुआत

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी और खरगे के इस साझा पत्र ने विपक्ष के इरादे साफ कर दिए हैं। सोमवार (20 जुलाई) से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में विपक्ष इस मुद्दे को दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में पूरी ताकत से उठाने की तैयारी में है। पहले से ही कर सुधार, रोजगार योजना और विदेशी कर्ज जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा विपक्ष अब राम मंदिर के इस कथित विवाद को मुख्य हथियार बनाने की कोशिश करेगा।

news desk

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