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मिडिल ईस्ट युद्ध में बढ़ सकता है नया खतरा ! पाकिस्तान और अजरबैजान से दो जमीनी मोर्चों पर घिर सकता है ईरान

इस्लामाबाद: अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए हमलों के बीच मिडिल ईस्ट का संकट लगातार गहराता जा रहा है। हालात ऐसे बनते दिख रहे हैं कि आने वाले दिनों में यह संघर्ष और बड़ा रूप ले सकता है। खास बात यह है कि ईरान की सीमाएं पाकिस्तान और अजरबैजान दोनों देशों से लगती हैं। ऐसे में अगर इन देशों ने भी मोर्चा खोल दिया तो ईरान के सामने दो नए जमीनी फ्रंट खुल सकते हैं।

फिलहाल अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर हवाई हमले किए जा रहे हैं, लेकिन पाकिस्तान और अजरबैजान के पास जमीनी कार्रवाई की क्षमता भी है। अगर ऐसा होता है तो ईरान एक साथ कई मोर्चों पर घिर सकता है, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।

सऊदी अरब की पाकिस्तान से अहम बैठक

इसी बीच सऊदी अरब के रक्षा मंत्री प्रिंस खालिद बिन सलमान ने रियाद में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर से मुलाकात की है। इस बैठक में ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों के खिलाफ रक्षा समझौते को सक्रिय करने पर चर्चा हुई। बताया जा रहा है कि इस मुलाकात के बाद पाकिस्तान पर ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने का दबाव बढ़ गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब और अजरबैजान के साथ मिलकर पाकिस्तान ईरान के खिलाफ मोर्चा खोल सकता है। अगर ऐसा होता है तो मिडिल ईस्ट का यह संघर्ष और ज्यादा खतरनाक रूप ले सकता है।

ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमले

उधर ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। जानकारी के अनुसार ईरान ने अजरबैजान के नखचिवन हवाई अड्डे पर ड्रोन हमला किया, जिसमें चार लोग घायल हो गए और एयरपोर्ट की इमारत को नुकसान पहुंचा। अजरबैजान ने इस हमले को “आतंकवादी कार्रवाई” बताया है और जवाबी कदम उठाने की चेतावनी दी है।

इसके अलावा ईरान ने सऊदी अरब की तेल रिफाइनरियों और राजधानी रियाद को भी निशाना बनाया। सऊदी अरब की रास तनुरा रिफाइनरी पर ड्रोन हमले के बाद आग लग गई, जिससे कुछ समय के लिए उत्पादन रोकना पड़ा। सऊदी रक्षा मंत्रालय का कहना है कि उनकी एयर डिफेंस सिस्टम ने कई ड्रोन और मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन मलबा गिरने से रिफाइनरी में आग लग गई।

सऊदी ने सक्रीय किया SMDA अग्रीमेंट

सऊदी अरब ने इन हमलों के बाद पाकिस्तान के साथ सितंबर 2025 में हुए स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट (SMDA) को सक्रिय कर दिया है। इस समझौते के तहत अगर किसी एक देश पर हमला होता है तो उसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भी ईरान को चेतावनी दी है कि अगर सऊदी अरब पर हमले जारी रहते हैं तो पाकिस्तान को हस्तक्षेप करना पड़ सकता है। साथ ही पाकिस्तान ने तुर्की और अजरबैजान पर हुए हमलों को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है और कूटनीतिक चैनलों के जरिए ईरान को संदेश दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की आक्रामक कार्रवाई से क्षेत्र की कई ताकतें एकजुट होती दिख रही हैं। पाकिस्तान पहले से ही अफगानिस्तान और बलूचिस्तान में संघर्ष झेल रहा है, लेकिन सऊदी अरब के दबाव के चलते वह इस युद्ध में शामिल हो सकता है। अगर पाकिस्तान और अजरबैजान ने जमीनी हमला शुरू किया तो ईरान को बहुमुखी युद्ध का सामना करना पड़ सकता है, जिसका असर वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।

news desk

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