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खामेनेई के बाद ईरान में बड़ा ट्विस्ट ! रजा पहलवी ने अंतरिम सरकार का दावा पेश किया, अरब देशों से कहा – “साथ आइए”

ईरान की सियासत में इन दिनों जबरदस्त हलचल मची हुई है। सुप्रीम लीडर Ali Khamenei को लेकर चल रही खबरों और क्षेत्रीय तनाव के बीच निर्वासित क्राउन प्रिंस Reza Pahlavi ने एक बड़ा दांव चल दिया है।

उन्होंने अपने X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर एक वीडियो जारी कर दावा किया कि वे ईरान में संभावित अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं और देश को स्थिरता व सामान्य हालात की तरफ वापस ले जाना चाहते हैं।

पहलवी का यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य-पूर्व में अमेरिका-इजराइल हमलों और बढ़ते तनाव के कारण ईरानी इस्लामिक गणराज्य पर दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

“ईरानियों ने अपनी पसंद चुन ली है”

वीडियो संदेश में रजा पहलवी ने कहा कि उन्हें ईरानी लोगों की ओर से बदलाव का ‘मैंडेट’ मिला है और वे इसे स्वीकार करते हैं।

उनके शब्दों में:

“ईरानियों ने अपनी पसंद चुन ली है – बहुत बड़ी कीमत चुकाकर। मेरी जिम्मेदारी है कि बदलाव व्यवस्थित तरीके से हो, देश स्थिर रहे और लोग अपने भविष्य का फैसला बैलेट बॉक्स के जरिए करें।”

पहलवी का कहना है कि अगर राजनीतिक संक्रमण होता है, तो एक अंतरिम सरकार बनाई जाएगी जो देश को स्थिर रखेगी और आगे चलकर लोकतांत्रिक चुनाव कराएगी

अरब देशों को दिया सीधा मैसेज

अपने वीडियो में पहलवी ने खास तौर पर अरब दुनिया के नेताओं से अपील भी की।

उन्होंने कहा कि अगर ईरान में अंतरिम सरकार बनती है तो सऊदी अरब, यूएई, बहरीन और कतर जैसे देशों को उसे मान्यता देने और सहयोग करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

पहलवी ने यह भी कहा कि नया ईरान टकराव की राजनीति छोड़कर सहयोग और आर्थिक साझेदारी का रास्ता अपनाएगा

उनका दावा है कि भविष्य का ईरान मिसाइल और ड्रोन हमलों वाली आक्रामक नीति से दूर रहेगा और क्षेत्र में स्थिरता और विकास का भागीदार बनेगा।

180 दिन में बदलाव का प्लान

राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक रजा पहलवी पहले भी एक ट्रांजिशन प्लान पेश कर चुके हैं।

इस प्लान में कहा गया है कि अंतरिम सरकार बनने के बाद:

  • करीब 180 दिनों में आर्थिक स्थिरता बहाल करने की कोशिश होगी
  • सरकारी संस्थानों का पुनर्निर्माण किया जाएगा
  • और आखिर में फ्री और फेयर चुनाव कराए जाएंगे ताकि लोग अपनी सरकार चुन सकें।

क्यों अहम है यह बयान?

दरअसल, ईरान और कई अरब देशों के बीच दशकों से तनाव रहा है। ऐसे में पहलवी का यह संदेश कि नया ईरान टकराव नहीं बल्कि सहयोग चाहता है, क्षेत्रीय राजनीति में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।

हालांकि फिलहाल ईरान के अंदर वास्तविक सत्ता अभी भी मौजूदा व्यवस्था के पास है, इसलिए यह देखना दिलचस्प होगा कि पहलवी का यह कदम आगे चलकर सिर्फ राजनीतिक बयान साबित होता है या सच में किसी बड़े बदलाव की शुरुआत।

news desk

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