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ईरान ने निकाली अमेरिका जैसे सुपरपावर की हवा, इन 5 दांव से पलट गया है पूरा खेल

28 फरवरी 2025 को जंग शुरू होते ही अमेरिका और इज़रायल ने संयुक्त अभियान चलाते हुए ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचाया।

इसके बाद दोनों देशों ने मिलकर ईरान के कई सैन्य और रणनीतिक ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए। इन हमलों में ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के मारे जाने की खबरें सामने आईं, जिनमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े कुछ शीर्ष कमांडर भी शामिल बताए गए।28 फरवरी को ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की भी हत्या कर दी गई।

हालांकि इन हमलों के बाद ईरान ने भी जोरदार पलटवार किया। ईरान ने फारस की खाड़ी में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि उसकी मिसाइलें लगातार इज़रायल की ओर दागी जा रही हैं।

जंग के 17वें दिन हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका ने ईरान पर लगातार हवाई हमले किए, लेकिन इसके बावजूद वहां सत्ता परिवर्तन या तख्तापलट कराने में उसे अब तक सफलता नहीं मिली है।

ईरान ने कैसे पलटा पासा?

सैन्य रणनीति-मोज़ेक फॉर्मूला

ईरान ने युद्ध को लंबा खिंचने का रास्ता अपनाया। इसके तहत सेना की ताकत को छोटे-छोटे स्वतंत्र यूनिट्स में बांटा गया और प्रत्येक इकाई को तुरंत निर्णय लेने की स्वतंत्रता दी गई।

इसका असर दिखा, क्योंकि बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर के नुकसान के बावजूद ईरान ने अमेरिकी सहयोगियों पर हमले जारी रखे। छोटे ड्रोन के माध्यम से अरब देशों को निशाना बनाने की कोशिश भी इसी रणनीति का हिस्सा थी।

आर्थिक और रणनीतिक दबाव

ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को ब्लॉक कर अमेरिकी और सहयोगी जहाजों के लिए रास्ता मुश्किल बना दिया। इसके अलावा, स्ट्रेट के नीचे संभावित सुरंगों और रडार निगरानी के जरिए उसे सुरक्षित रखा गया। इस कदम से अमेरिकी दबाव कम करने और जंग को लंबा खींचने की कोशिश की गई।

संचार और मीडिया रणनीति

ईरान ने अमेरिकी मीडिया को सीधे एंट्री दी और अपनी स्थिति दुनिया के सामने पेश की। सीएनएन सहित कई मीडिया हाउस ने वहां रिपोर्टिंग की, जिसमें अमेरिकी हमलों में नागरिकों के नुकसान की खबरें शामिल थीं।

मिनाब में एक स्कूल पर हमले के कारण 160 से अधिक बच्चों की मौत की रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी नीति पर सवाल उठाए।

कूटनीतिक मोर्चा

ईरान के विदेश मंत्री लगातार अमेरिकी मीडिया के माध्यम से इंटरव्यू दे रहे हैं। उनका प्रयास यह दिखाना है कि संघर्ष सिर्फ़ इज़राइल बनाम ईरान का है, और ईरान केवल अपनी रक्षा कर रहा है। मैसेजिंग और मीडिया रणनीति के जरिए ईरान ने अपनी स्थिति मजबूत की।

भीतरी और बाहरी नाकामी

अमेरिका और इज़राइल को उम्मीद थी कि प्रमुख हमलों और अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद ईरान में आम जनता सड़कों पर विरोध करेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अमेरिका की कोशिशें कुर्द्स के जरिए भी असफल रहीं। अब अमेरिका नाटो और चीन जैसे देशों से मदद मांग रहा है।

news desk

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