डॉक्टर ही बने डॉक्टर की जान के दुश्मन!
मेडिकल की पढ़ाई, बड़े सपने और डॉक्टर बनने की चाह, लेकिन राजकोट AIIMS के एक होनहार छात्र के लिए यह सफर किसी नाईटमेयर से कम नहीं था। 26 साल के इंटर्न डॉक्टर रतन कुमार मेघवाल की आत्महत्या ने पूरे देश के मेडिकल फ्रेटरनिटी को झकझोर कर रख दिया है। अब इस केस में ‘बुलिंग’ और टॉर्चर का जो सच सामने आया है, उसने पुलिस के भी होश उड़ा दिए हैं।
रेलवे ट्रैक पर मिला शव
14 मार्च की सुबह, राजकोट के घंटेश्वर-पारा पिपलिया रेलवे ट्रैक पर एक लाश मिली। जांच हुई तो पता चला कि ये लाश राजस्थान के रहने वाले और AIIMS स्टूडेंट , रतन कुमार की है। घटनास्थल से पुलिस को सिर्फ एक शव नहीं मिला, बल्कि मिला एक 17 पन्नों का रतन का सुसाइड नोट, जिसमें उसके साथ हुए हर चीज़ की एक-एक परत खुली थी।
टॉक्सिक दोस्ती या खूनी साजिश?
रतन ने अपने नोट को ‘डाइंग डिक्लेरेशन’ का नाम दिया है। इसमें जो खुलासे हुए हैं, वो किसी हॉरर मूवी से कम नहीं हैं:
रतन ने सीधे तौर पर अपने 5 क्लासमेट्स पर उसे शारीरिक और मानसिक रूप से तोड़ने का आरोप लगाया। आरोपियों को शक था कि रतन का किसी लड़की के साथ अफेयर है। इसी ‘शक’ को हथियार बनाकर उसे महीनों तक टारगेट किया गया। रतन ने लिखा कि जनवरी 2026 में उसके साथ कुछ ऐसा हुआ जिसने उसे अंदर से मार दिया था जिसके बाद उसने ये खुद को खत्म करने रास्ता चुना।
पुलिस का एक्शन
रतन के पिता की शिकायत पर गांधीग्राम पुलिस ने ज़रा भी देरी नहीं की। DCP राकेश देसाई की लीडरशिप में पुलिस ने उन 5 ‘नामज़द’ आरोपियों को धर दबोचा, जिनके नाम रतन के नोट में दर्ज थे: प्रणव पालीवाल, अस्मित शर्मा, आयुष यादव, निर्विघ्नं नूर, युवराज चौधरी
इन पांचों पर BNS की धारा 108 उकसाना और SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। फिलहाल ये जेल में हैं, लेकिन कोर्ट ने इन्हें पुलिस कस्टडी में MBBS की परीक्षाएं देने की परमिशन दी है।
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