ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच अमेरिका–ईरान तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर ईरानी सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा करती है या उन्हें मारती है, तो संयुक्त राज्य अमेरिका हस्तक्षेप करेगा और प्रदर्शनकारियों की “रक्षा” करेगा। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान में आर्थिक संकट के खिलाफ भड़के प्रदर्शनों में अब तक कम से कम सात लोगों की मौत हो चुकी है।
अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले छह दिनों से ईरान के कई प्रांतों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक बदहाली से परेशान लोग सड़कों पर उतर आए हैं। कई इलाकों से सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पों की खबरें सामने आई हैं, वहीं कुछ स्थानों पर सरकारी बलों द्वारा गोलीबारी के आरोप भी लगाए गए हैं। इसी पृष्ठभूमि में ट्रंप ने सोशल मीडिया पर तीखे शब्दों में कहा कि अमेरिका “लॉक एंड लोडेड” है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।
ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा क्षेत्रीय तनाव
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अगर ईरान ने प्रदर्शनकारियों को “हिंसक तरीके से मारा”, तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आगे आएगा। उन्होंने ईरानी सरकार को चेतावनी देते हुए यहां तक कह दिया कि अगर ईरान ने खुद को दोबारा खड़ा करने की कोशिश की, तो अमेरिका उसे फिर से तबाह कर देगा। ट्रंप के इस बयान को पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ाने वाला माना जा रहा है, जहां पहले से ही कई मोर्चों पर अस्थिरता बनी हुई है।
ईरान की तीखी प्रतिक्रिया, संप्रभुता पर सवाल
ईरान की ओर से ट्रंप के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने इसे “लापरवाह और खतरनाक” करार देते हुए कहा कि अमेरिका का किसी भी तरह का हस्तक्षेप ईरान की संप्रभुता का सीधा उल्लंघन होगा और यह एक “लाल रेखा” है। वहीं, ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारीजानी ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने दखल दिया, तो पूरे क्षेत्र में अराजकता फैल सकती है और अमेरिकी हितों को भारी नुकसान होगा। उन्होंने ट्रंप पर “दुस्साहस” दिखाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिका को अपने सैनिकों की सुरक्षा की चिंता करनी चाहिए।
यह विवाद ऐसे समय उभरा है जब ईरान के सर्वोच्च नेता की सेहत को लेकर अफवाहें चल रही हैं और देशभर में प्रदर्शन लगातार फैल रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही रिश्ते तनावपूर्ण हैं, ऐसे में ट्रंप के बयान ने संभावित सैन्य टकराव की आशंकाओं को और बढ़ा दिया है। हालांकि, अमेरिकी रक्षा विभाग ने फिलहाल यह स्पष्ट किया है कि क्षेत्र में सैनिकों की तैनाती में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया जा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान एक तरफ ईरानी प्रदर्शनकारियों को समर्थन देने की कोशिश है, लेकिन दूसरी तरफ इससे पश्चिम एशिया में अस्थिरता और गहराने का खतरा भी है। ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर प्रदर्शनों को भड़काने का आरोप लगाया है। स्थिति पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है, जबकि संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों से संयम बरतने और हालात को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने की अपील की है।