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Trending Newsसियासी

“घोटाले का आरोप लगाने वालों के साथ आज सत्ता में हूं…” – अजीत पवार के बयान से BJP की ‘जीरो टॉलरेंस’ पर सवाल

news desk
Last updated: January 3, 2026 2:40 pm
news desk
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अजीत पवार के बयान से BJP की ‘जीरो टॉलरेंस’ पर सवाल
अजीत पवार के बयान से BJP की ‘जीरो टॉलरेंस’ पर सवाल
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महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजीत पवार के हालिया बयान ने भाजपा सरकार की कथित “भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस” की नीति पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुक्रवार  को एक चुनावी सभा में अजीत पवार ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उन पर 70 हजार करोड़ रुपये के सिंचाई घोटाले का आरोप लगाया गया था, लेकिन आज वे उन्हीं राजनीतिक दलों के साथ सत्ता में हैं जिन्होंने कभी उन्हें इसी घोटाले के नाम पर कठघरे में खड़ा किया था। यह बयान ऐसे समय आया है जब महाराष्ट्र में टिकट वितरण, दागी नेताओं और नैतिक राजनीति को लेकर बहस तेज है।

Contents
आरोपों से सत्ता तक का सफरचुनावी असर और सियासी बहस

आरोपों से सत्ता तक का सफर

अजीत पवार ने मंच से कहा, “मुझ पर 70 हजार करोड़ के घोटाले का आरोप था, है ना? आज मैं उन्हीं लोगों के साथ सरकार में हूं जिन्होंने मुझ पर आरोप लगाए थे।” उनका यह इशारा संभवतः भाजपा और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर माना जा रहा है, जिन्होंने 2014 से 2019 के बीच विपक्ष में रहते हुए अजीत पवार को सिंचाई घोटाले का चेहरा बनाकर पेश किया था। पवार ने आपराधिक या ‘दागी’ पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को टिकट देने के सवाल पर यह तर्क दिया कि आरोप लगना और दोष सिद्ध होना अलग बातें हैं, लेकिन विपक्ष का कहना है कि यही तर्क भाजपा की दोहरी राजनीति को उजागर करता है।

70 हजार करोड़ रुपये का सिंचाई घोटाला 1999 से 2009 के बीच की उन परियोजनाओं से जुड़ा है, जब अजीत पवार जल संसाधन मंत्री थे। आरोप थे कि हजारों करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद सिंचाई क्षमता में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई और ठेकों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं। 2016 में बीबीसी की रिपोर्ट ने इस घोटाले को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर किया। 2018 में एंटी-करप्शन ब्यूरो ने अजीत पवार को आरोपी बनाया, लेकिन 2019 में सत्ता समीकरण बदले और घोटाले से जुड़े नौ मामलों की फाइलें बंद कर दी गईं।

चुनावी असर और सियासी बहस

2022 में बॉम्बे हाईकोर्ट में एसीबी ने हलफनामा दाखिल कर अजीत पवार को 17 मामलों में क्लीन चिट देने की जानकारी दी। इसके बाद 2023 में एनसीपी से अलग होकर अजीत पवार एकनाथ शिंदे–देवेंद्र फडणवीस सरकार में शामिल हो गए और उपमुख्यमंत्री बने। विपक्ष का आरोप है कि यह सब भाजपा की राजनीतिक जरूरतों के मुताबिक हुआ, जहां भ्रष्टाचार के आरोप सत्ता की जरूरत पड़ने पर बेमानी हो जाते हैं।

अजीत पवार के बयान पर पूछे गए सवाल के जवाब में महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष रविन्द्र चव्हाण ने कहा कि ‘अगर हम बोलने लगेंगे, तो अजित दादा मुश्किल में पड़ जाएंगे’.

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अजीत पवार का यह बयान महाराष्ट्र में आने वाले उपचुनावों या स्थानीय निकाय चुनावों पर असर डाल सकता है। महायुति गठबंधन में अजीत पवार की एनसीपी एक मजबूत साझेदार मानी जा रही है, लेकिन सिंचाई घोटाले जैसे पुराने आरोप बार-बार सामने आने से गठबंधन की नैतिक छवि पर सवाल उठते हैं। भले ही एसीबी की जांच फिलहाल ठंडे बस्ते में पड़ी हो, विपक्ष इस मुद्दे को चुनावी हथियार बनाने की कोशिश में जुटा हुआ है। महाराष्ट्र सरकार की ओर से अभी तक इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सियासी गलियारों में यह मुद्दा चर्चा के केंद्र में बना हुआ है। विपक्ष का कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम भाजपा सरकार की उस नीति को बेनकाब करता है, जिसमें भ्रष्टाचार के आरोप सत्ता के समीकरण बदलते ही नजरअंदाज कर दिए जाते हैं।

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TAGGED: Ajit Pawar, Ajit Pawar Statement, BJP Zero Tolerance, Devendra Fadnavis, Indian Politics, Irrigation Scam, Maharashtra Politics, Mahayuti Government, NCP News, political controversy, अजीत पवार बयान, भ्रष्टाचार मुद्दा, महाराष्ट्र सियासत, सिंचाई घोटाला
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