गंजाम : भारत समुद्री बुनियादी ढांचे को नई ऊंचाई देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रहा है। ओडिशा के गंजाम जिले में एक अत्याधुनिक डीप-सी पोर्ट और पारादीप में शिपबिल्डिंग क्लस्टर विकसित करने की घोषणा की गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 50 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। घोषणा के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या यह पोर्ट समुद्र के भीतर या पानी के नीचे बनाया जाएगा?
दरअसल, डीप-सी पोर्ट का मतलब पानी के नीचे बना बंदरगाह नहीं होता। यह ऐसे बंदरगाह होते हैं जिन्हें गहरे समुद्री क्षेत्र में विकसित किया जाता है ताकि बड़े और भारी मालवाहक जहाज सीधे वहां तक पहुंच सकें। सामान्य बंदरगाहों के मुकाबले यहां पानी की गहराई अधिक होती है।
क्या होता है डीप-सी पोर्ट और क्यों है इसकी जरूरत?
सामान्य तौर पर तटीय बंदरगाह उथले पानी वाले क्षेत्रों में होते हैं, लेकिन आधुनिक और विशाल मालवाहक जहाजों को संचालन के लिए काफी गहराई चाहिए होती है। ऐसे जहाजों को सुरक्षित रूप से ठहराने के लिए लगभग 15 से 20 मीटर तक गहरे पानी की जरूरत पड़ सकती है।
इसी वजह से डीप-सी पोर्ट या तो समुद्र के अंदर गहरे हिस्सों में कृत्रिम संरचना बनाकर विकसित किए जाते हैं या समुद्री तल को तकनीकी तरीके से गहरा किया जाता है, ताकि बड़े जहाज सीधे बंदरगाह तक पहुंच सकें।
गंजाम परियोजना क्यों मानी जा रही है खास?
गंजाम में बनने वाला डीप-सी पोर्ट बड़े अंतरराष्ट्रीय कार्गो जहाजों के लिए महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। इससे माल ढुलाई तेज होने के साथ लागत में भी कमी आने की संभावना जताई जा रही है।
इसके साथ पारादीप में प्रस्तावित शिपबिल्डिंग क्लस्टर जहाज निर्माण, मरम्मत और रखरखाव का बड़ा केंद्र बनने की दिशा में काम करेगा। राज्य सरकार के मुताबिक यह परियोजना समुद्री संसाधन, बंदरगाह गतिविधियों और मत्स्य क्षेत्र को जोड़कर ब्लू इकोनॉमी को गति देने का प्रयास है, जिससे बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
दुनिया में कहां-कहां हैं ऐसे बड़े डीप-सी पोर्ट?
दुनिया के कई देशों ने गहरे समुद्री बंदरगाहों के जरिए अपने समुद्री व्यापार को नई दिशा दी है। चीन का यांगशान डीप-वाटर पोर्ट गहरे समुद्र में विकसित बड़े बंदरगाहों में गिना जाता है। वहीं नीदरलैंड का रॉटरडैम पोर्ट यूरोप का प्रमुख समुद्री व्यापार केंद्र माना जाता है।
इसके अलावा पाकिस्तान का ग्वादर पोर्ट सामरिक दृष्टि से अहम माना जाता है, जबकि सिंगापुर का बंदरगाह वैश्विक समुद्री व्यापार का बड़ा केंद्र बना हुआ है।
सिर्फ कारोबार नहीं, सुरक्षा रणनीति का भी हिस्सा
इस परियोजना की घोषणा भुवनेश्वर में आयोजित 14वीं मल्टी-एजेंसी मैरीटाइम सिक्योरिटी ग्रुप बैठक के दौरान की गई। राज्य सरकार के अनुसार यह पहल केवल व्यापारिक विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि समुद्री सुरक्षा, रणनीतिक तैयारी और समुद्री आपदा प्रबंधन जैसे पहलुओं को भी मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।
ओडिशा की लंबी समुद्री सीमा को देखते हुए इस क्षेत्र को राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और आर्थिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बदलते समय में समुद्री सुरक्षा का दायरा पारंपरिक चुनौतियों से आगे बढ़कर साइबर सुरक्षा और महत्वपूर्ण ढांचागत सुरक्षा तक पहुंच चुका है।