आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में क्रेडिट कार्ड नेसेसरी हो गया है। इमरजेंसी में जेब खाली हो और सामने ATM दिखे, तो क्रेडिट कार्ड से कैश निकालना लाइफ-सेवर लगता है। लेकिन संभल जाइए! जिसे आप ‘सुविधा’ समझ रहे हैं, वो असल में बैंकों का सबसे बड़ा ट्रैप (कर्ज का जाल) है। क्रेडिट कार्ड से शॉपिंग करना और कैश निकालना, दो बिल्कुल अलग बातें हैं।
अगर आप भी अक्सर कार्ड से कैश निकालते हैं, तो ये 5 बातें आपका होश उड़ा देंगी:
- कैश एडवांस फीस
जैसे ही आप कार्ड स्वाइप करके कैश निकालते हैं, बैंक अपनी ‘सर्विस फी’ वसूल लेता है। ये आमतौर पर निकाली गई रकम का 2.5% से 3% होता है। मतलब, 10,000 रुपए निकालते ही 300 रुपए तो बैंक ने अपनी फीस काट ली। - मीटर पहले दिन से हो जाता है चालू
शॉपिंग करने पर आपको 45-50 दिन का ‘फ्री टाइम’ मिलता है, लेकिन कैश के मामले में कोई रियायत नहीं है। जिस पल कैश बाहर आया, उसी सेकंड से इंटरेस्ट लगना शुरू हो जाता है। इसकी सालाना दर 36% से 48% तक जाती है, जो किसी भी पर्सनल लोन से कई गुना ज्यादा है। - GST की एक्स्ट्रा मार
बैंकिंग की दुनिया में GST आपका पीछा नहीं छोड़ती। बैंक जो आपसे फीस और ब्याज वसूलता है, उस पर अलग से 18% GST लगता है। यानी चार्जेस के ऊपर चार्जेस लगते ही जाता है| - फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स की मानें तो बार-बार कैश निकालना ये दिखाता है कि आप ‘Credit Hungry’ हैं और आपकी फाइनेंशियल हालत ठीक नहीं है। बैंक इसे ‘रेड फ्लैग’ मानते हैं, जिससे आपका सिबिल स्कोर गिर सकता है और फ्यूचर में होम या कार लोन मिलना मुश्किल हो सकता है।
- रिवॉर्ड पॉइंट्स भूल जाइए!
कार्ड से शॉपिंग पर मिलने वाले कैशबैक या रिवॉर्ड पॉइंट्स कैश निकालने पर नहीं मिलते। यहाँ सिर्फ ‘देना’ पड़ता है, ‘मिलता’ कुछ भी नहीं।